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विदेशी करार दी गईं असम की जबीदा बेगम को हाई कोर्ट ने भी नहीं माना भारतीय, अब सुप्रीम कोर्ट में दिखाना होगा कागज

जबीदा बेगम नाम की ये महिला बेहद गरीब है और लंबे समय से अपनी नागरिकता की लड़ाई लड़ रही है। उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद अब बेगम को सुप्रीम कोर्ट में अपने कागज दिखाने होंगे।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: February 19, 2020 7:31 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – इंडियन एक्सप्रेस

असम में 50 वर्षीय एक महिला द्वारा विदेशी न्यायाधिकरण के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) ने महिला को “विदेशी नागरिक” की श्रेणी में रखा है। जबीदा बेगम नाम की ये महिला बेहद गरीब है और लंबे समय से अपनी नागरिकता की लड़ाई लड़ रही है। उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद अब बेगम को सुप्रीम कोर्ट में अपने कागज दिखाने होंगे।

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक जबीदा बेगम गुवाहाटी से लगभग 100 किलोमीटर दूर बक्सा जिले के एक गाँव में रहतीं हैं। वह अपने परिवार की एकमात्र कमाने वाली सदस्य हैं – उनके पति रेजक अली लंबे समय से बीमार हैं। दंपति की तीन बेटियां थीं, जिनमें से एक की दुर्घटना में मृत्यु हो गई और एक अन्य लापता हो गई। सबसे छोटी बेटी अस्मिना, कक्षा 5 की छात्रा है।

अस्मिना का भविष्य जबा बेगम को सबसे ज्यादा परेशान करता है। कानूनी लड़ाई से उसकी अधिकांश कमाई खर्च हो जाती है जिसके चलते अस्मिना कभी-कभी भूखी सो जाती है। जावेद बेगम ने कहा “मुझे चिंता है कि मेरे बाद उनका क्या होगा … मैंने खुद के लिए उम्मीद खो दी है।”

कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज करते हुए कहा कि ‘ बैंक खातों का विवरण, पैन कार्ड और भूमि राजस्व रसीद जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल नागरिकता साबित करने के लिए नहीं किया जा सकता है।’ जबकि असम प्रशासन द्वारा स्वीकार्य दस्तावेजों की सूची में भूमि और बैंक खातों से जुड़े दस्तावेजों को रखा गया है।

ज़ुबैदा बेगम द्वारा दायर याचिका पर गुवाहटी हाई कोर्ट ने कहा कि “यह कोर्ट पहले की कह चुकी है कि पैन कार्ड और बैंक खाते नागरिकता का प्रमाण नहीं हैं। भूमि राजस्व भुगतान रसीद किसी व्यक्ति की नागरिकता को साबित नहीं करता है। इसलिए हमने पाया है कि न्यायाधिकरण ने अपने सामने रखे गए साक्ष्यों को सही ढंग से समझा है।”


उच्च न्यायालय और न्यायाधिकरण ने कहा कि महिला ने अपने पिता और पति की पहचान घोषित करने के लिए गांव के मुखिया द्वारा जारी किया एक प्रमाण पत्र समेत 14 दस्तावेज विदेशी न्यायाधिकरण को दिए थे लेकिन वह खुद को अपने परिवार से जोड़ने का कोई भी दस्तावेज दिखाने में नाकाम रही। बेगम पहले ही कानूनी फीस चुकाने के लिए तीन बीघा जमीन बेच चुकी हैं। अब वह 150 रुपये दिन में दूसरों की जमीन पर काम करती है।

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