केरल पुलिस ने मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी देने के आरोप में सोनी थॉमस को गिरफ्तार किया है। जबकि एक अन्य विधायक टी.के. गोविंदन ने भी इसी तरह की धमकी मिलने की शिकायत दर्ज कराई है।
अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी भरे फोन करने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान अटिंगल निवासी सोनी थॉमस के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार, शुक्रवार शाम 6:50 बजे एक अज्ञात व्यक्ति ने तिरुवनंतपुरम शहर जिला पुलिस कमान एवं नियंत्रण केंद्र (DPCC) को फोन किया और मुख्यमंत्री और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी।
एफआईआर के अनुसार, कारण पूछे जाने पर, फोन करने वाले ने कथित तौर पर कहा कि वह मुख्यमंत्री सतीशन को पसंद नहीं करता। अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने शाम 6:53 बजे फिर से फोन किया और धमकी दोहराई। एफआईआर में कहा गया है कि फोन उठाने वाले पुलिस अधिकारी को गाली देने के बाद, आरोपी ने कथित तौर पर पूछा कि क्या मुख्यमंत्री के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
धमकी भरे फोन कॉल के बाद हुई गिरफ्तारी
इसके तुरंत बाद, छावनी पुलिस (Cantonment Police) ने मामला दर्ज कर उन फोन नंबरों का पता लगाना शुरू कर दिया जिनसे कॉल किए गए थे। शनिवार सुबह पुलिस ने थॉमस को अटिंगल से हिरासत में ले लिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने शराब के नशे में कॉल किए थे। अधिकारियों ने आगे बताया कि उसे रिमांड की कार्यवाही के तहत बाद में अदालत में पेश किया जाएगा।
विधायक को भी मिली जान से मारने की धमकी
इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को थालीपरम्बा विधायक टी.के. गोविंदन को जान से मारने की धमकी भरा फोन आने के बाद कन्नूर के मय्यिल पुलिस स्टेशन में एक और मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, गोविंदन को शाम करीब 4 बजे फोन आया और कथित तौर पर उन्हें गाली-गलौज और धमकी दी गई। मय्यिल पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बताया कि फोन करने वाले की पहचान कर ली गई है और जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। सीपीआई (एम) से निष्कासित गोविंदन ने यूडीएफ समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और थालीपरम्बा निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की।
केरल की राजनीति में मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता कभी सीधा नहीं रहा। यहां नेता सिर्फ चुनाव जीत कर मुख्यमंत्री नहीं बनते, उन्हें विचारधारा, संगठन, गुटबाजी, चर्च, समुदायों, छात्र राजनीति और सार्वजनिक बहसों की लंबी सुरंग से गुजरना पड़ता है। वी.डी. सतीशन भी इसी रास्ते से होकर निकले हैं। फर्क बस इतना है कि उन्होंने यह यात्रा बिना ज्यादा शोर, बिना नाटकीय नारों और बिना खुद को “भविष्य का मुख्यमंत्री” घोषित किए पूरी की। पढ़ें पूरी खबर।
