ममता बनर्जी के सलाहाकार प्रशांत क‍िशोर की मदद से हुई डील- मेघालय में कांग्रेस से 11 व‍िधायकों के साथ TMC में आने वाले MLA बोले

इस सियासी घटनाक्रम से न केवल टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कद बढ़ा है बल्कि निकट भविष्य में बंगाल में शासन करने की भारतीय जनाता पार्टी (भाजपा) की महत्वाकांक्षाओं को भी झटका लगा है।

Prashant Kishor Meghalaya
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (फाइल/ इंडियन एक्सप्रेस)

मेघालय विधानसभा में कांग्रेस के 17 में से 12 विधायक गुरुवार को TMC में शामिल हो गए। उनके नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा ने इस कदम के लिये ”विभाजनकारी शक्तियों” से लड़ने में कांग्रेस की ”प्रभावहीनता” को जिम्मेदार बताया, जिसके चलते राज्य की राजनीति में कोई खास हैसियत नहीं रखने वाली ममता बनर्जी की पार्टी विपक्ष की अगुवा बन गई है। इस सियासी घटनाक्रम से न केवल टीएमसी चीफ और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कद बढ़ा है बल्कि आने वाले भविष्य में बंगाल में राज करने की भारतीय जनाता पार्टी के सपनों को भी झटका लगा है। साथ ही इसने चुनावी रणनीतिकार के रूप में प्रशांत किशोर की छवि को भी मजबूत किया है।

पूर्वोत्तर में शांत राज्य माने जाने वाले मेघालय में साल 2010 से 2018 तक मुख्यमंत्री रहे संगमा ने कहा कि टीएमसी में शामिल होने का फैसला लेने की वजह भाजपा से लड़ाई में कांग्रेस की विफलता है। भाजपा राज्य में मजबूत हो रही है। दूसरी ओर कई लोगों का मानना है कि इसकी वजह यह है कि संगमा बिना उनसे सलाह लिये विंसेंट एच पाला को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किये जाने से नाराज थे।

संगमा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “जैसा कि आप जानते हैं कि देश में विभाजनकारी ताकतें मजबूत हो रही हैं। हमें उन्हें पराजित करना होगा। कांग्रेस की प्रभावहीनता से एक खालीपन पैदा हुआ है और हमने राजग से मुकाबला करने के लिये एक अखिल भारतीय दल खोजने के अपने प्रयासों के तहत आज यह निर्णय लिया है।” उन्होंने कहा, ”मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि मैं इन विधायकों के साथ औपचारिक रूप से अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गया हूं। हम जानते हैं कि यह फैसला हमारे राज्य और हमारे देश के लिए बेहतर संभावनाएं लेकर आएगा।”

प्रशांत किशोर से मुलाकात के बाद तय हुई डील: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष चार्ल्स पनग्रोप ने मीडिया को बताया कि प्रशांत किशोर ने ही असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों को टीएमसी में शामिल होने के लिए मनाने का काम किया। उन्होंने कहा,‘‘पश्चिम बंगाल में हाल के विधानसभा चुनावों में टीएमसी ने भाजपा को जिस तरह पटखनी दी, वह दर्शाता है कि उनकी (प्रशांत किशोर) रणनीतियों ने काम किया।’’

पनग्रोप ने कहा, ”मुझे किशोर और आईपैक टीम से मिलने का अवसर मिला। हमने महसूस किया कि देश को आगे ले जाने और आज देश में सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने के लिए हमारा दृष्टिकोण एक समान है।”पनग्रोप ने कहा कि दल बदलने वाले विधायक ‘हमारे लोगों के संवैधानिक अधिकार’ सुरक्षित करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें और अन्य विधायकों को टीएमसी में शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया गया था। साठ सदस्यीय सदन में कांग्रेस के 17 विधायक हैं, जिनमें से 12 ने विधानसभा अध्यक्ष मेतबाह लिंगदोह को अपने विलय के फैसले से औपचारिक रूप से अवगत करा दिया है।

मुकुल संगमा से जब शेष पांच विधायकों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अन्य विधायकों ने अभी फैसला नहीं किया है। संगमा ने कहा कि ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी में शामिल होने का फैसला इस बात का ‘‘पूरा विश्लेषण करने के बाद किया गया है कि कैसे बेहतर तरीके से लोगों की सेवा की जा सकती है।’’संगमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राज्य में भाजपा और उसके सहयोगियों का मुकाबला करने में विफल रही है। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ वर्षों के दौरान हमने राज्य की बेहतर सेवा नहीं की है। हमारी क्षमता का उपयोग अब हो सकता है। ”संगमा ने कहा कि टीएमसी में शामिल होने से पहले वह और उनकी टीम कांग्रेस आलाकमान से मिलने और पार्टी को परेशान करने वाले मुद्दों पर चर्चा करने के लिए कई बार नयी दिल्ली गई थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि इस बात में बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है कि उन्होंने पाला के साथ अपने मतभेदों के चलते कांग्रेस छोड़ी। संगमा ने कहा, ‘‘वास्तव में, आपको याद होगा कि जब मेघालय में हम सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरने के बावजूद सरकार नहीं बना पाए, तब कांग्रेस नेतृत्व को कोई फर्क ही नहीं पड़ा।” साल 2018 के चुनाव में 60 सदस्यों वाली विधानसभा में 21 सीटें जीतकर कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। लेकिन 19 सीटें जीतने वाली कोनराड संगमा की पार्टी एनपीपी और दो सीटें जीतने वाली उसकी सहयोगी पार्टी भाजपा ने छोटे दलों के साथ मिलकर बहुमत का आंकड़ा हासिल कर लिया। राज्य में फिलहाल एनपीपी नीत गठबंधन सत्ता में है।

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