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सियाचिन में शहीद लांस नायक का शव 38 साल बाद बंकर से मिला

लांस नायक चंद्रशेखर 25 मई 1984 को आए बर्फीले तूफान में फंस गए थे।

सियाचिन में शहीद लांस नायक का शव 38 साल बाद बंकर से मिला

भारत-पाकिस्तान के बीच 38 साल पहले हुई एक झड़प के दौरान बर्फीले तूफान में फंसकर लापता हुए 19 कुमाऊं रेजीमेंट के लांस नायक चंद्रशेखर हर्बोला का शव सियाचिन के पुराने बंकर में मिला है। इसकी जानकारी कुमाऊं रेजीमेंट रानीखेत के सैनिक ग्रुप केंद्र की ओर से परिजनों को दी गई है। हर्बोला के साथ एक और सैनिक का शव मिलने की सूचना है।

मूल रूप से अल्मोड़ा के निवासी हर्बोला की पत्नी शांति देवी और उनका परिवार इस समय हल्द्वानी के सरस्वती विहार कालोनी में रहता है। लांस नायक चंद्रशेखर 25 मई 1984 को आए बर्फीले तूफान में फंस गए थे। उस तूफान में एक अधिकारी समेत सात जवान लापता हो गए थे। सेना के आपरेशन मेघदूत के दौरान यह टुकड़ी सियाचिन में तैनात थी। गश्त के दौरान सभी जवान बर्फीले तूफान में फंस गए थे।

लांस नायक चंद्रशेखर के अवशेष शनिवार को सियाचिन में गश्त कर रही एक टीम को मिले। भारतीय सेना के एक अधिकारी के मुताबिक, 25 मई 1984 को सियाचिन में हुआ शायद पहला हादसा था। इनमें से पांच जवानों के शव नहीं मिल पाए थे। इस बार जब सियाचिन ग्लेशियर पर बर्फ पिघलनी शुरू हुई, तो खोए हुए सैनिकों की तलाश शुरू की गई। भारतीय सेना के गश्ती दस्ते को एक टूटे बंकर में मानव अवशेष मिले। अवशेषों के साथ एक ‘आइडेंटिटी डिस्क’ मिली। दरअसल, हर भारतीय सैनिक किसी भी मिशन में जाते वक्त ‘आइडेंटिटी डिस्क’ पहनता है, जिसमें उसका आर्मी नंबर लिखा होता है। डिस्क में पड़े नंबर (5164584) से लांस नायक चंद्रशेखर की पहचान हो पाई।

उस मिशन के वक्त लांस नायक चंद्रशेखर 30 साल के थे। अब उनकी पत्नी 65 साल की हैं। उनकी दो बेटियां हैं। सेना की ओर से उनके परिवार को शव मिलने की सूचना दी गई। उनकी पत्नी शांति देवी ने घर पहुंचे मीडियाकर्मियों से कहा, ‘फोन से सूचना मिली कि उनका शव मिला है। आठ-नौ साल तक तो हम इंतजार करते रहे कि शायद कोई चमत्कार हो जाए और वे वापस लौट जाएं लेकिन फिर हमने भी उम्मीद छोड़ दी थी।’

उनकी बेटी कविता बताती हैं, ‘जिस समय पापा शहीद हुए उस समय छोटी बहन डेढ़ साल की थी, तो हमको तो कुछ याद भी नहीं है पापा की। बस इस बार उनका चेहरा देख सकेंगे। पर अब कहीं पर सही लग रहा है कि हम उन्हें देख पाएंगे, लेकिन दुख भी हो रहा है।’शांति देवी के मुताबिक, शादी के नौ साल बाद उनके पति लापता हो गए थे और उस समय उनकी उम्र सिर्फ 28 साल थी। उनकी बड़ी बेटी चार साल व दूसरी बेटी डेढ़ साल की थी। शांति देवी के मुताबिक, जनवरी 1984 में जब उनके पति अंतिम बार घर आए थे, तब उन्होंने जल्दी लौटने का वादा किया था।

द्वाराहाट के रहने वाले हर्बोला 1975 में सेना में भर्ती हुए थे और 1984 में जब भारत-पाकिस्तान में सियाचिन के लिए टकराव हुआ था, तब ‘आपरेशन मेघदूत’ के तहत क्षेत्र में गश्त के लिए हर्बोला समेत 20 सैनिकों को भेजा गया था। इसी दौरान, सभी सैनिक एक बर्फीले तूफान के चलते बर्फीली चट्टान की चपेट में आ गए। बाद में हादसे में शहीद हुए 15 जवानों के शव बरामद कर लिए गए, लेकिन हर्बोला समेत पांच सैनिकों के शव नहीं मिल पाए थे।

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