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चुनाव आचार संहिता लागू रहते मुंबई पुलिस चीफ की पत्नी-बेटे को मिला फड़णवीस के मंत्रालय से ठेका

इसी बीच जब मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे से इंडियन इक्सप्रेस ने संपर्क साधा तो उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपनी सेवाएं मुफ्त में देने की पेशकश की थी।

मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे।

महाराष्ट्र में चुनावी आचार संहिता लागू होने के बीच मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे के बेटे और पत्नी के स्वामित्व वाली एक निजी कंपनी को मुंबई पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण का कार्य आवंटित करने का आदेश जारी किया। ये आदेश राज्य के गृह विभाग द्वारा जारी किया जो महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मातहत काम करता था।

इंडियन एक्सप्रेस को मिले आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक गृह विभाग ने सात अक्टूबर, 2019 को बर्वे के कार्यालय को बताया कि क्रिस्पक्यू सूचना प्रौद्योगिकी प्राइवेट लिमिटेड (CITPL) को पांच साल के लिए रिकार्ड डिजिटलीकरण का कार्य आवंटित करने के प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी दी गई थी। कंपनी ने अपनी सेवाएं मुफ्त में देने की पेशकश की थी। पत्र में आगे पुलिस कमिश्नर के कार्यालय को निर्देश दिया गया कि वो यूनिट्स और फाइलों की संख्या को अंतिम रूप दे, जिन्हें काम के दौरान कवर किया जा सकता है।

मामले में पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि करते हुए कहा कि सरकार के निर्देश पर कार्रवाई की गई थी मगर प्रोजेक्ट तकनीकी मुद्दों के चलते शुरू नहीं हो पाया। बता दें कि क्रिस्पैक की नींव 10 दिसंबर 2014 को संजय बर्वे की पत्नी शर्मिला बर्वे और उनके बेटे सुमुख बर्वे ने रखी थी, जिनकी कंपनी में क्रमश: दस और 90 फीसदी हिस्सेदारी है।

इसी बीच जब मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे से इंडियन इक्सप्रेस ने संपर्क साधा तो उन्होंने कहा कि कंपनी ने अपनी सेवाएं मुफ्त में देने की पेशकश की थी। उन्होंने कहा, ‘जो सॉफ्टवेयर ऑफर किया गया वो मुफ्त था और इसका इस्तेमाल मुंबई पुलिस अपने फायदे के लिए कर सकती थी। इसमें किसी तरह के वित्तीय लाभ का कोई सवाल ही नहीं है।’

उल्लेखनीय है कि क्रिस्पक्यू वेब, मोबाइल और डेस्कटॉप एप्लकेशन सहित सॉफ्टवेयर डवलपमेंट के क्षेत्र में काम करती है। कंपनी का पंजीकृत कार्यालय दक्षिण मुंबई में मरीन लाइन्स में है। कंपनी के रिकॉर्ड के मुताबिक इसने साल 2018-19 में अपना कारोबार शुरू किया। वित्त वर्ष 2019 में कंपनी ने 10.56 लाख रुपए के कुल राजस्व पर 4.53 लाख रुपए का लाभ कमाया।

इंडियन एक्सप्रेस को मिले दस्तावेजों से पता चलता है कि कंपनी ने 30 सितंबर, 2019 को पहली बार डिजटलीकरण के प्रस्ताव के साथ सरकार से संपर्क किया। और 24 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए आचार संहिता 21 सितंबर से लागू हो गई थी। कंपनी का लेटर सीधे अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय कुमार को भेजा गया, जिसमें मुंबई पुलिस को निशुल्क आधार पर डिजिटलीकरण की सुविधा देने की पेशकश की गई। लेटर की एक कॉपी मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेजी गई।

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