ताज़ा खबर
 

Video Analysis: क्‍या चुनावी मुद्दा है मायावती पर दयाशंकर सिंह की टिप्‍पणी?

बसपा के सामने खोया दलित वोट बैंक वापस पाने और भाजपा-सपा के सामने उसे बनाए रखने की चुनौती है, ऐसे में इस बयान के कई मायने हो सकते हैं।

Author July 21, 2016 7:47 PM
विवाद के बाद दयाशंकर सिंह को पद से हटा दिया गया है।

मायावती के खिलाफ भाजपा के निलंबित नेता दयाशंकर सिंह ने जो आपत्तिजनक टिप्‍पणी की, उसके बाद बनी स्थिति से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यूपी में भाजपा को दलित वोटों का नुकसान होगा।

नहीं है चुनावी मुद्दा-

यह चुनावी मुद्दा नहीं है, पर बनाया जा रहा है। असल में यह नेताओं की अनुशासनहीनता और गलत राजनीतिक संस्‍कृति का मुद्दा है। इसे इसी रूप में अगर हर पार्टी ले और दृढ़ इच्‍छाशक्ति के साथ समाधान करने की सोचे तो राजनीति में बेतुकी बयानबाजी की बढ़ती संस्‍कृति पर लगाम लग सकती है।

अब जहां तक सवाल इस मुद्दे का यूपी चुनाव पर असर पड़ने या न पड़ने का है तो इसे इन आंकड़ों के मद्देनजर समझा जा सकता है। यूपी में दलितों की आबादी करीब 21 फीसदी है। वे अमूमन बसपा के वोटर हुआ करते थे। Centre for the Study of Developing Societies (CSDS) के मुताबिक 2007 के विधानसभा चुनाव में 86 फीसदी जाटव वोट मायावती को गए थे। 71 फीसदी वाल्‍मीकियों ने भी उन्‍हें ही वोट दिया था। पर 2012 में ऐसा नहीं हुआ। बसपा के हाथों से करीब 25 फीसदी दलित वोट छिटक गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी ऐसा ही हुआ। 18 फीसदी जाटवों और 45 फीसदी अन्‍य दलितों ने भाजपा/एनडीए के पक्ष में वोट किया। ऐसे में मायावती के सामने खोया दलित वोट बैंक वापस पाने की चुनौती है, जबकि भाजपा-सपा के सामने उसे बनाए रखने का चैलेंज है। दोनों ही पक्ष को चुनाव से इतने महीने पहले हुई इस बयानबाजी से अपनी-अपनी चुनौतियों से निपटने में शायद ही कोई मदद मिले।

अति उत्‍साह में आकर दिया गया बयान-

आम तौर पर देखा जाता है कि चुनाव से पहले इस तरह की बयानबाजी कुछ ज्‍यादा ही तेज हो जाती है। मगर दयाशंकर सिंह के बयान में ऐसा नहीं है। जो प्रायोजित बयानबाजी होती है, वह वोट बैंक को बचाने या बढ़ाने के लिए होती है। पर यह बयान एक दलित नेता के विरोध में है तो इससे दलित तो खुश नहीं ही होंगे। इसलिए लगता है दयाशंकर सिंह ने अति उत्‍साह में आकर या किसी और भावना के तहत यह बयान दे दिया होगा।

भाजपा के पास नहीं था चारा-

ऐसे बयानों में इतनी जल्‍दी कार्रवाई नहीं होती, पर यह मामला अपवाद है क्योंकि एक तो संसद सत्र के दौरान यह घटना हुई। सदन में बेहद आक्रामक भाषण देकर मायावती ने ऐसा माहौल बना दिया कि कार्रवाई नहीं होने पर भाजपा के लिए बचाव करना मुश्किल हो जाता और विपक्ष को हमलावर होने के लिए बड़ा ह‍थियार मिल जाता। यह बयान भी ऐसा था कि भाजपा किसी तरह इसका बचाव नहीं कर सकती थी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X