बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गौतम पटेल और उनके परिवार के सदस्यों को पिछले 10 महीनों से धमकियां मिल रही हैं। हाल ही में उनकी बेटी पर हमला हुआ। जस्टिस का दावा है कि यह धमकियां कथित तौर पर 2024 में दाऊदी बोहरा उत्तराधिकार मामले में उनके द्वारा दिए गए फैसले के कारण मिल रही हैं।

गौतम पटेल और उनकी बेटी अदिति ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि अगस्त 2025 में लंदन के एक उपनगर में उनके घर में घुसपैठ का प्रयास किया गया था। पटेल ने बताया, “इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दी गई। 3 सितंबर, 2025 को एक धमकी भरा पत्र आया जिसमें गौतम पटेल के लिए एक संदेश था लेकिन वह मेरी बेटी और उसके पति को संबोधित था। पत्र में लिखा था कि आपने दाऊदी बोहरा मामले में झूठा और भ्रष्ट फैसला सुनाया है, मामले का विशेष रूप से जिक्र किया गया था और कहा गया था कि हम दाऊदी बोहरा समुदाय का एक शक्तिशाली संगठन हैं और हमने एक आपराधिक गिरोह को अपने साथ मिला लिया है, एक खतरनाक आपराधिक गिरोह।”

पूर्व जस्टिस और उनके परिवार को धमकी

पत्र में गौतम पटेल को चेतावनी दी गई थी कि वे सितंबर के अंत तक निर्देशों का पालन करें अन्यथा उन्हें और उनके परिवार को नुकसान उठाना पड़ेगा। पूर्व जस्टिस ने बताया, “मुझसे यह मांग की जा रही है कि मैं देश छोड़ दूं और 23 अप्रैल, 2024 के अपने फैसले को वापस लेते हुए एक यूट्यूब वीडियो बनाऊं। यह सब अगस्त 2025 में हुआ, मेरे रिटायर होने के डेढ़ साल बाद।”

दाऊदी बोहरा समुदाय से जुड़े फैसले पर धमकी

गौतम पटेल को बार एसोसिएशन को इंटरव्यू देने और यहां तक ​​कि अदालत में गवाही देने के लिए कहा गया था जिसमें उन्होंने अपने फैसले को गलत बताया था। खबरों के मुताबिक, इन पत्रों में उस फैसले को रद्द करने की मांग की गई है जिसमें 2014 में अपने पिता सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन की मृत्यु के बाद सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय के आध्यात्मिक प्रमुख के पद का सही दावेदार घोषित किया गया था।

गौतम पटेल को भेजे गए पत्रों में से एक में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने भ्रष्टाचार और दबाव के आगे झुककर दोषपूर्ण फैसला सुनाया। पत्र में लिखा था, “आपने न्याय का मजाक उड़ाया है और अपनी ही विरासत को धूमिल कर दिया है। हम डीबी समुदाय के सदस्यों का एक सशक्त संगठन हैं जो अपने समुदाय के लिए न्याय सुनिश्चित करने में रुचि रखते हैं।”

बेटी पर विदेश में हमला

उनकी बेटी अदिति 22 अप्रैल को सुबह करीब 8.45 बजे अपने बच्चे को पास के स्कूल में छोड़ने गई थी। घर लौटते समय एक नकाबपोश व्यक्ति ने उस पर पीछे से हमला कर दिया। उसने अदिति के चेहरे पर कई घूंसे मारे जिससे उसकी नाक में फ्रैक्चर हो गया। उन्होंने कहा, “पड़ोसी दौड़ते हुए आए तो वह आदमी भाग गया। हमने फिर से स्थानीय पुलिस को सूचना दी। फिलहाल, वे दोनों घटनाओं को जोड़ रहे हैं। यह कोई आकस्मिक घटना नहीं है। यह कोई आकस्मिक लूटपाट नहीं है। यह बहुत सुरक्षित इलाका है। इससे पहले यहां कभी ऐसी घटना नहीं हुई है।”

बेटी को 5 जून को एक और पत्र मिला जिसमें लिखा था, “ये लीजिए। आपको पर्याप्त चेतावनी दी जा चुकी थी। गिरोह को भुगतान कर दिया गया है। अगला कदम है आपका और आपके परिवार का अंतिम संस्कार। आप पिछले पत्र में बताई गई बातों का पालन कर सकते हैं। साथ में चिप संलग्न है इसमें पता चलेगा कि आपके निर्देशों का पालन न करने पर क्या होता है।” पत्र में एक एसडी कार्ड भी संलग्न था, जिसे परिवार ने कंप्यूटर पर न खोलने का फैसला किया।

गौतम पटेल ने मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई

पूर्व जज पटेल की पत्नी को भी मुंबई में ऐसा ही एक लिफाफा मिला जिसके बाद परिवार ने मुंबई की स्थानीय पुलिस को सूचित किया और उन्हें सुरक्षा दी गयी। बेटी ने बताया कि अप्रैल की घटना से पहले के महीनों में ब्रिटेन की पुलिस ने मामला बंद कर दिया था। अदिति ने कहा, “उन्होंने हमें बताया कि उनके पास कोई और सुराग नहीं है। उन्हें कुछ नहीं मिला। कोई फॉरेंसिक जांच नहीं हुई। इसलिए, उन्होंने मामला बंद कर दिया। हम मानते हैं कि सभी उचित माध्यमों और अधिकारियों से संपर्क किया जा चुका था इसलिए हमें अधिकारियों पर पूरा भरोसा है।”

गौतम पटेल ने 9 सितंबर, 2025 को मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा, “हमने पुलिस, यहां के भारतीय उच्चायोग और सभी संबंधित पक्षों से संपर्क किया है। फिलहाल मुंबई में कुछ नहीं हुआ है, लेकिन सारा मामला लंदन में केंद्रित है। समूह का कहना है कि यह शक्तिशाली दाऊदी बोहरा समुदाय का एक संघ है और विशेष रूप से उस फैसले को वापस लेने की मांग करता है।” गौतम पटेल ने आगे कहा, “मैंने पुलिस आयुक्त को इस बारे में सूचना दे दी है लेकिन अभी तक भारत में कुछ नहीं हुआ है।”

शादी से पहले शारीरिक संबंध किसी के चरित्र पर दाग नहीं- सुप्रीम कोर्ट 

सुपीम कोर्ट ने हाल ही में शादी से पहले संबंधों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि विवाह पूर्व शारीरिक संबंध चरित्र पर कोई धब्बा नहीं हैं। यह टिप्पणी अदालत ने तेलंगाना में पुलिस कांस्टेबल उम्मीदवार के चयन को रद्द करने के एक फैसले को निरस्त करते हुए की। सर्वोच्च न्यायालय ने यह माना कि सहमति से दो अविवाहित वयस्कों के बीच बने शारीरिक संबंध किसी व्यक्ति के चरित्र के बारे में गलत धारणा बनाने का आधार नहीं हो सकता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें