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जम्मू-कश्मीर में जल्द तय होगी चुनाव की तारीख

जनसत्ता ब्यूरो  नई दिल्ली। चुनाव आयोग जम्मू कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से अक्तूबर में रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद बाढ़ प्रभावित इस राज्य में विधानसभा चुनाव कराने के बारे में फैसला करेगा। 87 सदस्यीय राज्य विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 19 जनवरी को खत्म होगा। आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने रविवार को पत्रकारों […]

Author September 29, 2014 9:01 AM
जम्मू-कश्मीर की 18 और झारखंड की 15 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जा रहे हैं। (फ़ाइल फ़ोटो)

जनसत्ता ब्यूरो 

नई दिल्ली। चुनाव आयोग जम्मू कश्मीर के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से अक्तूबर में रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद बाढ़ प्रभावित इस राज्य में विधानसभा चुनाव कराने के बारे में फैसला करेगा। 87 सदस्यीय राज्य विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 19 जनवरी को खत्म होगा। आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने रविवार को पत्रकारों से कहा- हम अपेक्षा करते हैं कि सीईओ 15 अक्तूबर के आसपास अपनी रिपोर्ट दे देंगे। रिपोर्ट मिलने के बाद चुनाव आयोग चुनाव के समय पर फैसला करेगा।

चुनाव आयोग की एक प्रमुख चिंता मतदान केंद्रों की हालत और सड़क संपर्क को लेकर है। आयोग को मतदाता सूचियों के संशोधन को लेकर भी चिंता है जो काम राज्य में बाढ़ आने से पहले चल रहा था। संशोधन अक्तूबर के पहले हफ्ते में पूरा होने की उम्मीद थी। लेकिन अब इसमें देरी हो गई है। पूर्ण आयोग जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त होंगे, जल्दी राज्य का दौरा कर सकता है और केंद्रीय गृह मंत्रालय से जानकारी ले सकता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त वीएस संपत ने जम्मू कश्मीर में चुनाव कराने के संबंध में पिछले दिनों कहा था- हम हालात पर करीब से नजर रख रहे हैं। चीजें कुछ सही होने के बाद हालात को देखते हुए फैसला किया जाएगा। दूसरी ओर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि राजग सरकार कश्मीर को लेकर एक व्यापक नीति तैयार कर रही है। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा- हम कश्मीर पर एक व्यापक नीति तैयार कर रहे हैं। हम जल्द ही इसकी घोषणा करेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या पूर्वोत्तर की तरह कश्मीर से संबंधित सभी पक्षों के साथ बातचीत के लिए वार्ताकार नियुक्त करने का कोई प्रस्ताव है, राजनाथ सिंह ने कहा कि इस तरह का कोई कदम नहीं उठाया जाएगा। गृह मंत्री ने कहा- मैं जम्मू-कश्मीर के लिए वार्ताकार नियुक्त करने के पक्ष में नहीं हूं।

उन्होंने एक पाक्षिक पत्रिका को हाल में दिए साक्षात्कार में कहा था कि जम्मू-कश्मीर के लिए वार्ताकार नियुक्त करने की पुरानी परंपरा बंद होनी चाहिए क्योंकि ये बनतीजा रही हैं। पत्रिका को दिए इस साक्षात्कार में गृह मंत्री ने कहा था कि वार्ताकार नियुक्त करने पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है। ऐसा कहते हुए मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैं वार्ता के खिलाफ नहीं हूं। लेकिन मैं बेनतीजा बातचीत के पक्ष में भी नहीं हूं। जो राष्ट्र विरोधियों द्वारा जम्मू-कश्मीर या पूर्वोत्तर में अपनी खुद की राजनीतिक छवि चमकाने के लिए की जाती है। यूपीए सरकार के शासनकाल में शिक्षाविद राधा कुमार, पत्रकार दिलीप पडगांवकर और पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त एमएम अंसारी को कश्मीर को लेकर वार्ताकार नियुक्त किया गया था। गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के स्तर में काफी हद तक कमी आई है और सुरक्षा बल कड़ाई से अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा की सुरक्षा कर रहे हैं। गृहमंत्री ने इससे पहले जम्मू-कश्मीर सरकार से करीब तीन लाख कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान करने को कहा था। 1990 के दशक की शुरुआत में आतंकवाद की वजह से कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर घाटी से पलायन कर लिया था।

नरेंद्र मोदी सरकार ने करीब 62,000 कश्मीरी पंडित परिवारों की घाटी में अपने घरों में पूरे सम्मान के साथ वापसी को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई है और 2014-15 के केंद्रीय बजट में इसके लिए 500 करोड़ रुपए की राशि तय की है। सिंह ने विस्थापितों के पुनर्वास योजना के क्रियान्वयन के लिए सरकारी योजना के तहत इन परिवारों के लिए आवासीय इकाइयों के निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि के आबंटन के लिए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को पत्र लिखा है।

 

 

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