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जीपीएस डाटा से हुई पुष्टि, पाकिस्तान से आए थे उरी हमला करने वाले आतंकवादी

मारे गए आतंकवादियों के पास सेना को दो जीपीएस उपकरण मिले थे जिनमें से एक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।

Author Updated: December 1, 2016 7:46 AM
उरी के जिस सेना कैम्प पर हमला हुआ था उसके बाहर का दृश्य। (PTI Photo)

फोरेंसिक विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर के उरी स्थित 12 इंफैंट्री ब्रिगेड हेडक्वार्टर पर हमला करने वाले सभी आतंकवादी पाकिस्तान से भारत आए थे। उरी हमले की जांच से जुड़े सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि आतकंवादियों के पास से मिले विभिन्न जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) उपकरणों के डाटा से इसकी पुष्टि हुई है। 17 सितंबर को हुए उरी हमले में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। भारतीय सुरक्षाबलों की जवाब कार्रवाई में चार हमलावर मारे गए थे। मारे गए आतंकवादियों के पास से सेना को दो जीपीएस उपकरण मिले थे जिनमें से एक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था।

सूत्रों के अनुसार आतंकवादियों के पास से मिले जर्मिन ईट्रेक्स जीपीएस यूनिट से पता चलता है कि आतकंवादी मुजफ्फराबाद-श्रीनगर के रास्ते नियंत्रण रेखा (एलओसी) तक पहुंचे थे। आतंकवादियों ने चकोथी के पास पहाड़ की चढ़ाई करके 17 सितंबर की रात को एलओसी पार की। आतंकवादी तीन रिजलाइन पार करते हुए दारा गूलान गांव तक पहुंचे थे। सभी आतंकियों ने उरी के सैन्य कैंप पर हमला करने से पहले गांव में आराम किया था। रेडियो तरंगों से चलने वाला जीपीएस सिस्टम उपग्रहों के नेटवर्क से संचालित होता है। इसका प्रयोग अपरिचित भौगोलिक इलाकों में रास्ते की पहचान के लिए किया जाता है।

उरी हमले से जुड़े एक सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “आतंकवादियों की गतिविधियों की टाइमलाइन से साफ है कि वो एलओसी की तीन स्तरीय सुरक्षा को भेदने में कामयाब रहे थे, साथ ही कश्मीर घाटी में भी सेना की पैट्रोलिंग टुकड़ी से नजर से भी बचे रहे। ये हमारे लिए काफी चिंता की बात है।” जीपीएस उपकरणों से मिले आंकड़ों के अनुसार इन उपकरण को सबसे पहले चार सितंबर को लीपा घाटी स्थित लश्कर-ए-तैयबा के ठिकाने पर चार्ज किया गया था। उरी हमले के बाद 29 सितंबर को भारतीय सेना ने एलओसी पार कर के जिन आतंकी ठिकानों पर हमला किया था उनमें ये ठिकाना भी शामिल था।

सूत्रों के अनुसार आधिकारिक तौर पर इसकी जांच नहीं हुई है कि चारो आतंकी सेना के कैम्प के अंदर कैसे घुसे लेकिन माना जा रहा है कि उन्होंने कंटीली बाड़ को पार करने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल किया। पिछले महीने आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने उरी हमले की जिम्मेदारी ली थी। लश्कर के अनुसार हमले में मोहम्मद अनस उर्फ अबु सिराक़ा नामक एक आतकंवादी भी शामिल था। पाकिस्तान के गुजरांवाला के निवासी अबु सिराक़ा के अंतिम संस्कार के लिए लश्कर ने लोगों को पोस्टर लगाकर बुलाया था। पोस्टर पर लिखा गया था, “शेर दिल मुजाहिद अबु सिराक़ा मोहम्मद अनस, जिन्होंने उरी ब्रिगेड कैम्प में 177 हिंदू सैनिकों को जहन्नुम में पहुंचा दिया और शहीद हुए।”

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) को आतंकियों के पास से पाकिस्तान में बने सीरिंज, पेनकिलर, दूसरी दवाएं, रेडिमेड खाना इत्यादि मिले थे। हालांकि पाकिस्तान उरी हमले में शामिल आतंकियों के पाकिस्तानी होने से इनकार करता रहा है। पाकिस्तान सरकार उरी हमले को कश्मीरी अलगाववादियों की कार्रवाई बताती रही है।

वीडियोः चर्चा: डिजिटल डाटा से पता चला उरी हमला करने वाले आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे

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