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शराब पीकर गाड़ी चलाने के मामले में भी मिल सकता है गाड़ी का इंश्योरेंस क्लेम! जान लें नियम

अगर आपने सीमित स्वीकृत मात्रा में शराब पीकर गाड़ी चलाते हैं और उस दौरान गाड़ी को क्षति पहुंचती है तो इसका क्लेम आप बीमा कपंनियों से ले सकते हैं।

Author Published on: September 22, 2019 3:26 PM
इंश्योरेंस लेते वक्त इन बातों का रखें ध्यान।

अगर आप लिमिट के अंदर शराब पीकर गाड़ी चला रहे हैं और किसी दुर्घटना में क्षति पहुंचती है तो आप अपनी गाड़ी का इश्योरेंस क्लेम ले सकते हैं। अगर आपने मोटर अधिनियम एक्ट के तहत सीमित शराब का सेवन (जिसकी इजाजत है) किया है, तो कार क्षति की अवस्था में इंश्योरेंस कंपनिया अपने वादे से पीछे नहीं हट सकतीं। कई मामले ऐसे आए हैं, जिनमें मामला अदालत में पहुंचा है और कोर्ट ने कार-मालिकों के हक में फैसला दिया है। ‘लाइव मिंट’ ने अपनी रिपोर्ट में बेंगलुरु के एक कैब ड्राइवर जीटी मन्जगौड़ा का जिक्र किया है, जिन्हें नवंबर 2016 में ‘शराब के प्रभाव’ में एक्सिडेंट होने की सूरत में बीमा कंपनी ने क्षतिपूर्ति से इनकार कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जीटी मंजीगौड़ा की आय का स्रोत उनकी कार ही थी। ऐसे में उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम में अपना मामला दायर किया। अदालत में बीमा कंपनी के खिलाफ लड़ाई दो सालों तक चली। मंडीगौड़ा का दावा था कि बीमा कंपनी द्वारा उन्हें मानसिक कष्ट पहुंचाने के लिए अतिरिक्त दंड के साथ मामले का निपटारा किया जाए। अदालत ने पाया कि गाड़ी चलाते वक्त ड्राइवर ने इजाजत के मुताबिक सीमित शराब का सेवन किया था। ऐसे में अदालत ने कैब ड्राइवर मंडीगौड़ा के हक में फैसला दिया। ‘लाइव मिंट’ की रिपोर्ट में एको जनरल इंश्योरेंस (Acko General Insurance) के प्रॉडक्ट स्ट्रैटडी हेड अनिमेश दास ने कहा कि मोटर इंश्योरेंस उत्पादों के नियमों और शर्तों के मुताबिक दुर्घटना में क्षति या शराब के सेवन के दौरान ड्राइविंग में हुई क्षति की भरपाई नहीं होती है। लेकिन, फिर भी अदालत ने कार मालिकों के हक में फैसला दिया है।

गौरतलब है कि भारत में शराब की स्वीकृत सीमा प्रति 100 मिलीलीटर खून में 0.03% निर्धारत है। हालांकि, इंश्योरेंस सेक्टर से जुड़े कई जानकारों का तर्क है कि यदि व्यक्ति नशे में या मादक द्रव्यों का सेवन करता है तो उसका एक दावा खारिज किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त किसी भी गैरकानूनी गतिविधि के तहत दावे को खारिज किया जा सकता है। हालांकि, संदेह के मामले में बीमाधारक भारतीय विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरदाई) को रिपोर्ट कर सकते हैं।

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