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भारत, जापान और अमेरिका के बीच करीबी रिश्ते महत्त्वपूर्ण : लामा

तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विचारों में विश्वास रखने वाले भारत, जापान और अमेरिका के बीच ‘कुछ विशेष करीबी रिश्ते’ बहुत महत्त्वपूर्ण हैं..

Author बंगलुरु | December 10, 2015 3:18 AM
तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा। (पीटीआई फाइल फोटो)

तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा कि लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के विचारों में विश्वास रखने वाले भारत, जापान और अमेरिका के बीच ‘कुछ विशेष करीबी रिश्ते’ बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। दलाई लामा ने कहा, ‘मैं एशिया में अकसर यह बात कहता रहूंगा कि भारत सर्वाधिक जनसंख्या वाल लोकतांत्रिक देश है, जो बहुत स्थिर है। उसके बाद जापान सर्वाधिक औद्योगिक और लोकतांत्रिक एशियाई देश और उसके बाद अमेरिका स्वतंत्र दुनिया का अग्रणी देश है।’ उन्होंने कहा, ‘इन तीन देशों के बीच कुछ विशेष करीबी रिश्ते बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। रूस के बारे में अनुमान लगाना कठिन है।’

उन्होंने कहा कि दूसरी तरफ चीन सर्वाधिकारवादी देश है, जबकि अमेरिका इसके उलट स्वतंत्रता, लोकतंत्र और समानता की परंपरा वाला देश है। दलाई लामा ने कहा, ‘मैं अमेरिकी सेना और परमाणु शक्ति का प्रशंसक नहीं हूं। मैं अमेरिका की आजादी, लोकतंत्र और समानता की परंपरा का प्रशंसक हूं। चीन एक महान देश है और चीनी लोग महान हैं। हम वास्तव में उनका सम्मान करते हैं और वे परिश्रमी हैं, लेकिन आज की व्यवस्था पूरी तरह सर्वाधिकारवादी स्वभाव की है।’

उन्होंने कहा कि चीनी जनता पीढ़ियों से परेशानी झेल रही है और वहां 1.3 अरब लोगों को गलत और सही की पहचान करने की क्षमता और वास्तविकता जानने का अधिकार है। दलाई लामा ने कहा, ‘कई बार मुझे लगता है कि पीपुल्स रिपब्लिक जनता को मूर्ख बना रही है। इसलिए अब यह पीपुल्स रिपब्लिक नहीं रहा।’ चीन के समर्थन वाले एशियाई इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक को विश्व बैंक के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखते हुए अमेरिकी चिंताओं के सवाल पर दलाई लामा ने कहा, ‘जब आर्थिक प्रतिस्पर्धा और वैश्विक महाशक्ति से संबंधित मामले बातचीत के लिए आते हैं, तो निश्चित रूप से अमेरिका बहुत महत्त्वपूर्ण है जो स्वतंत्र समाज में विश्वास रखता है। ऐसा मेरा मानना है।’

चीन द्वारा यूरोपीय संघ से मानवाधिकारों के मामले में बेजिंग की उपलब्धियों को उद्देश्यपूर्ण तरीके से देखने और समानता व परस्पर सम्मान के आधार पर उसके साथ मानवाधिकार विषयों का आदान-प्रदान करने के लिए कहने के संबंध में पूछे जाने पर दलाई लामा ने कहा कि चीन ने मानवाधिकारों के संदर्भ में कुछ हासिल नहीं किया है। वे हमेशा सूचना को तोड़ते-मरोड़ते रहे हैं। हम चीनी अधिकारियों को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते बल्कि पूरी व्यवस्था जिम्मेदार है।

ईयू ने मानवाधिकारों पर ईयू-चीन वार्ता के 34वें दौर के दौरान तिब्बत में मानवाधिकारों के विषय को चीन के साथ उठाया था। आइएसआइएस के बारे में एक प्रश्न पर दलाई लामा ने कहा कि धर्म संचालक शक्ति नहीं है लेकिन संघर्षों के पीछे शक्ति और अर्थव्यवस्था कारण हैं, जिनमें मुसलिम समाज के शिया और सुन्नी समुदाय के झगड़े शामिल हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें आतंकवाद और शिया व सुन्नी मुसलिमों जैसे समुदायों के बीच संघर्षों के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत अनुसंधान कार्य करने की जरूरत है। आमतौर पर मुझे लगता है कि कई मामलों में इन संघर्षों के कारणों में शक्ति और अर्थव्यवस्था है। हम पिछले 1000 साल से यह देख रहे हैं।’

जब दलाई लामा से पूछा गया कि क्या पूर्व प्रधानमंत्रियों जवाहर लाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी ने चीन की सरकार के साथ तिब्बत की समस्याओं का समाधान करने में गलतियां की थीं तो उन्होंने कहा, ‘मुझे वाकई नहीं लगता कि पंडित नेहरू ने गलती की थी। भारत सरकार ने कुछ करने का प्रयास किया।’ उन्होंने कहा कि वास्तव में ऐतिहासिक गलतियां कई सदियों से उनकी खुद की बनाई हुई हैं।

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