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बिना वीजा पांच हजार श्रद्धालुओं को मिले रोज दर्शन की इजाजत

पिछले साल नवंबर में भारत और पाकिस्तान ऐतिहासिक गुरुद्वारा दरबार साहिब को गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नानक से जोड़ने के लिए करतारपुर गलियारे का निर्माण करने पर सहमत हुए थे।

Author March 15, 2019 2:45 AM
भारत और पाकिस्तान के बीच पहली सचिव स्तरीय बैठक हुई। (फोटो सोर्स : PTI)

गुरुद्वारा करतारपुर साहिब तक जाने के लिए गलियारा तैयार करने की परियोजना पर बातचीत के लिए गुरुवार को भारत और पाकिस्तान के बीच पहली सचिव स्तरीय बैठक हुई। दोनों देशों के अधिकारियों ने बताया कि गलियारे के समझौते में शामिल विभिन्न मुद्दों पर दोनों देश मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं। भारत ने अपने प्रस्ताव दस्तावेज में मांग रखी है कि करतारपुर गुरुद्वारा तक जाने के लिए रोजाना पांच हजार श्रद्धालुओं को पाकिस्तान वीजा मुक्त प्रवेश की सुविधा दे। बैठक के बाद गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एससीएल दास ने कहा, ‘पहले फेज में हमने हर दिन पांच हजार तीर्थयात्रियों के दौरे के लिए दबाव बनाया है। इसमें भारतीय नागरिकों के साथ-साथ भारतीय मूल के नागरिकों को भी शामिल करने के लिए कहा है’।

यह बैठक अटारी-वाघा सीमा पर भारतीय हिस्से में हुई। करतारपुर गुरुद्वारा गलियारे को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच अगली बैठक दो अप्रैल को वाघा में होगी। गुरुवार की बैठक में पंजाब के गुरदासपुर जिले एवं सीमा पार स्थित करतारपुर साहिब के बीच नियोजित गलियारे को खोलने पर चर्चा करने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर अधिकारियों ने चर्चा की। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव एससीएल दास ने बताया, भारत ने इस बात पर जोर दिया कि गलियारा में आवाजाही पूरी तरह वीजा मुक्त होनी चाहिए। किसी दस्तावेज या प्रक्रिया के रूप में अन्य कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। भारत यह भी चाहता है कि पाकिस्तान उन श्रद्धालुओं को भी गुरुद्वारे आने की अनुमति दे जो वहां पैदल जाना चाहते हैं।

दोनों देशों की बैठक से पहले पाकिस्तान ने भारत को 59 पेजों का एक दस्तावेज भेजा। इसमें उसकी ओर से 14 सिफारिशें की गई हैं। पाकिस्तान ने कहा है कि गलियारे का मुख्य उद्देश्य करतारपुर में भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए वीजामुक्त यात्रा की सुविधा देना है। इसके लिए दोनों पक्षों (भारत व पाक) को सक्रिय होना चाहिए। अगर भारत इन सिफारिशों पर राजी हो जाता है तो यह समझौता लागू हो जाएगा।

इस बैठक के बाद जारी साझा बयान में कहा गया कि करतारपुर गलियारा खोलने के साधनों पर चर्चा करने के लिए भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच बैठक मैत्रीपूर्ण माहौल में हुई। दोनों पक्षों ने परियोजना के विभिन्न पहलुओं और प्रावधानों को लेकर विस्तृत और रचनात्मक बातचीत की और करतारपुर साहिब गलियारे को जल्द चालू करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई।

बयान में कहा गया, ‘तीर्थयात्रियों को करतारपुर गलियारे का उपयोग करते हुए गुरुद्वारा करतारपुर साहिब जाने की सुविधा मुहैया कराने की परियोजना के तौर-तरीकों और मसविदा समझौते पर चर्चा के लिए पहली बैठक गुरुवार को अटारी, भारत में सौहार्दपूर्ण वातावरण में आयोजित की गई’। बयान के अनुसार, दो अप्रैल को अगली बैठक वाघा में आयोजित करने पर सहमति बनी और इससे पहले 19 मार्च को प्रस्तावित जीरो प्वाइंट पर तकनीकी विशेषज्ञों की बैठक होगी, जिसमें गलियारे के एलाइनमेंट को अंतिम रूप दिया जाएगा।

पिछले साल नवंबर में भारत और पाकिस्तान ऐतिहासिक गुरुद्वारा दरबार साहिब को गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नानक से जोड़ने के लिए करतारपुर गलियारे का निर्माण करने पर सहमत हुए थे। गुरुद्वारा दरबार साहिब में सिख पंथ के संस्थापक गुरु नानकदेव ने अपना अंतिम समय व्यतीत किया था। करतारपुर साहिब पाकिस्तान में पंजाब के नरोवाल जिले में है। रावी नदी के दूसरी ओर स्थित करतारपुर साहिब की डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे से दूरी करीब चार किलोमीटर है।

बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव एससीएल दास ने किया। पाकिस्तानी टीम की अगुआई पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के महानिदेशक (दक्षिण एशिया और दक्षेस) डॉ. मोहम्मद फैसल ने की। बयान में कहा गया, ‘दोनों पक्षों ने विभिन्न पहलुओं और प्रस्तावित समझौते के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तृत और रचनात्मक बातचीत की और करतारपुर साहिब गलियारे को तेजी से चालू करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई’।
उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पिछले साल 26 नवंबर को गुरदासपुर जिले में करतारपुर गलियारे की आधारशिला रखी थी। दो दिन बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने लाहौर से 125 किलोमीटर दूर नरोवाल में गलियारे की आधारशिला रखी थी।

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