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चीन में रह रहे भारतीय चिकित्सक बोले- रोजाना संक्रमित मरीजों का सरकारी आंकड़ा गलत, अभी दो साल तक रहेगा कोरोना का कहर

डॉ संजीव चौबे के मुताबिक अभी तीसरी लहर भी आएगी जो बड़ी खतरनाक होगी।

देश में कोरोना की दूसरी लहर चल रही है। (पीटीआई)।

चीन में रह रहे एक भारतीय डॉक्टर का मानना है कि भारत में इस वक्त रोजाना 15 से 20 लाख लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो रहे हैं। इस समय सरकारी तौर पर आ रहे चार लाख के आंकड़े पर संदेह जताते हुए इस डॉक्टर ने कहा कि कोरोना अभी दो साल तक रहेगा।

इस भारतीय डॉक्टर का नाम संजीव चौबे है। वे सर्जरी में परास्नातक हैं और मौजूदा समय में चीन के सेंट माइकेल अस्पताल में काम करते हैं। उन्होंने चीन में कोरोना के प्रसार से लेकर उसके नियंत्रण तक का सारा मंजर देखा है। उन्होंने खुद चीनी मरीजों को बचाया है और उन्होंने यह भी निकट से देखा है कि चीन ने कोविड को कैसे मैनेज किया। एक भारतीय टीवी चैनल से बातचीत में डॉ चौबे से जब पूछा गया कि क्या उन्हें दैनिक संक्रमण के फिगर चार लाख तक जाने का अनुमान था। जवाब में उन्होंने सीधे कहा कि यह चार लाख का फिगर ही गलत है। असली संख्या 15 लाख से लेकर 20 लाख तक हो सकती है। इसका कारण यह कि ना जाने कितने लोगों में कोविड के लक्षण हैं। लेकिन वे या तो खुद जांच नहीं करा रहे या फिर यह भी है कि चाहने के बाद भी जांच नहीं करा पा रहे।

उन्होंने भारत में अपने परिचितों का हवाला दिया कि घर में एक आदमी पॉजिटिव है। बाकी लोग पॉजिटिव नहीं है लेकिन उनमें रोग के लक्षण मौजूद हैं। भारत में एक्सपर्ट कह रहे हैं कि कोरोना संक्रमण इस महीने पीक पर होंगे। इसके बाद संख्या में तेजी से गिरावट आएगी। इस बात से नाइत्तफाक रखते हुए डॉ चौबे ने कहा कि अगर संख्या गिरेगी तो बाद में बढ़ेगी भी। लहर दोनों तरफ चलेगी। ऊपर को भी और नीचे को भी। दूसरी लहर के बाद तीसरी लहर भी आएगी। और, वह इससे भी ज्यादा खतरनाक होगी।

उन्होंने ब्राजील का उदाहरण दिया। वहां पहली लहर खत्म हुई और लोग आराम के मूड में हुए ही थे कि दूसरी और ज्यादा भयंकर लहर आ गई। वहां तीसरी लहर भी आई जो सबसे अधिक जानलेवा थी। दफनाने की जगह की ऐसी किल्लत हो गई कि एक –एक कब्र में दो-दो शरीर दफन करने पड़े।

उन्होंने भारत में दूसरी लहर के लिए कोरोना संख्या में कमी देखने के बाद की गई लापरवाही को दोषी बताया। हमने होली भी खेली, चुनाव भी लड़े, कुम्भ भी नहाया और क्रिकेट भी खेला। बुरा असर तो होना ही था। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में फैल रहे कोविड को लेकर चिंता जताई क्योंकि गांवों में शहरों के मुकाबले चिकित्सा ढांचा नगण्य सा है।

डॉ चौबे ने कहा कि भारत में कोरोना तभी खत्म होगा जब देश में इसके खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो जाएगी। यह दो तरीके से हो सकती है। वैक्सीनेशन से अथवा लोगों के संक्रमित होकर बीमार पड़ने से। उनका कहना है कि कोरोना के प्रति हर्ड इम्यूनिटी तभी विकसित हो पाएगी जब देश की 70 प्रतिशत आबादी संक्रमित हो। प्राकृतिक रूप से बीमार होकर या वैक्सीन के जरिए।

उन्होंने चिंता जताई कि अभी वैक्सीनेशन का काम बहुत धीमा है। उन्होंने याद दिलाया कि महामारियां बहुत खतरनाक होती हैं। सौ साल पहले भारत में फैले स्पैनिश फ्लू से पौने दो करोड़ लोग मारे गए थे। तब भारत की आबादी सिर्फ 25 करोड़ थी। इस लिहाज से कोरोना तो बहुत पीछे है।

यह पूछने पर कि चीन ने कोरोना पर इतनी जल्दी कैसे काबू पा लिया, डॉ चौबे ने कहा कि पिछले दस सालों में चीन ने कई संक्रमणों से लड़ाई लड़ी। इनमें सार्स, स्वाइन फ्लू और बर्ड फ्लू प्रमुख थे। इन रोगों से जंग के चलते मास्क पहनना और बार-बार हाथ धोना उनके कल्चर का हिस्सा बन गया। वहां के लोग खुद जागरूक हैं। इसके अलावा अगर जागरूक न हों तो सुरक्षा बलों की सख्ती उन्हें सही कर देती है।

डॉ चौबे ने कहा कि भारत में ही अगर कोरोना का प्रबंधन आइसीएमआर जैसे संगठन को दे दिया जाए और उसको सेना और सुरक्षाबलों की मदद मिल जाए तो रोग पर काबू कहीं अच्छे ढंग से हो सकेगा।

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