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दादरी कांड: बिगड़े हालात पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने जताया दर्द, बोले- गंवाए नहीं जा सकते एकता के बुनियादी मूल्य

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गोमांस खाने की अफवाह के बाद दादरी में एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या किए जाने की पृष्ठभूमि में बुधवार को कहा कि भारतीय सभ्यता के विविधता, सहिष्णुता और अनेकता में एकता के बुनियादी मूल्यों को हमें निश्चित तौर पर अपने दिमाग में बनाए रखना चाहिए और इसे कभी भी यूं ही गंवाने नहीं दिया जा सकता।

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राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने गोमांस खाने की अफवाह के बाद दादरी में एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या किए जाने की पृष्ठभूमि में बुधवार को कहा कि भारतीय सभ्यता के विविधता, सहिष्णुता और अनेकता में एकता के बुनियादी मूल्यों को हमें निश्चित तौर पर अपने दिमाग में बनाए रखना चाहिए और इसे कभी भी यूं ही गंवाने नहीं दिया जा सकता।

मामले में राष्टÑपति तक के मुखर होने के बाद भी दादरी मसले पर सियासी बवाल कम नहीं हो रहा है। बुधवार को भाजपा नेता साध्वी प्राची को बिसहड़ा गांव में प्रवेश करने से रोका गया तो उन्होंने जमकर आग उगली। वहीं भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ के एक संगठन ने बुधवार को बिसहड़ा गांव के हिंदुओं को ‘बंदूक समेत’ हर संभव मदद देने की पेशकश करते हुए आरोप लगाया कि वहां मोहम्मद अखलाक की पीट-पीटकर हत्या के बाद हिंदुओं को परेशान किया जा रहा है।

राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, ‘मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि हम अपनी सभ्यता के बुनियादी मूल्यों को यूं ही गंवाने की अनुमति नहीं दे सकते। ये बुनियादी मूल्य हैं। विविधता, सहिष्णुता, सहनशीलता और अनेकता में एकता, जिसे वर्षों से हमारी सभ्यता ने संजो कर रखा और उसका जश्न मनाया’।

उन्होंने कहा, ‘इन्हीं बुनियादी मूल्यों ने हमें सदियों तक एक साथ बांधे रखा। कई प्राचीन सभ्यताएं खत्म हो गर्इं। लेकिन यह सही है कि एक के बाद एक आक्रमण और लंबे विदेशी शासन के बावजूद भारतीय सभ्यता अगर बची तो अपने बुनियादी मूल्यों के कारण ही बची। हमें निश्चित तौर पर इसे ध्यान में रखना चाहिए। अगर इन बुनियादी मूल्यों को हम अपने मन-मस्तिष्क में बनाए रखें तो हमारे लोकतंत्र को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता’।

उनकी यह टिप्पणी उत्तर प्रदेश के दादरी में गोमांस खाने की अफवाह पर 50 साल के एक व्यक्ति की पीट-पीट कर की गई हत्या की पृष्ठभूमि में आई है। इस घटना के कारण देशभर में आक्रोश है। राष्ट्रपति को यहां राष्ट्रपति भवन में एक कार्यक्रम के दौरान उन पर लिखी एक ‘कॉफी टेबल बुक’ सौंपी गई, जिसे ‘न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ के संपादकीय निदेशक प्रभु चावला ने लिखा है और जिसका विमोचन उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने किया था।

इस कार्यक्रम में गृह मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला और कई सांसद मौजूद थे।
राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने पहले चुनाव, जब लोग हैरान थे कि कैसे 35 करोड़ लोगों को दायरे में रखते हुए सुचारू रूप से चुनाव हो सकते हैं, से लेकर पिछले चुनाव तक देश में कई अहम घटनाएं करीब से होते देखी हैं।

उन्होंने उन दिनों को याद किया जब वे ‘एक संकटकाल’ के दौरान राज्यसभा सदस्य के तौर पर संसद पहुंचे थे। उस समय कांग्रेस बैंकों के राष्ट्रीयकरण को लेकर एक बड़े संकट का सामना कर रही थी और आखिरकार पार्टी में विभाजन हो गया। मुखर्जी ने याद किया कि उनकी मां उनसे हर दिन दस किलोमीटर चलकर स्कूल जाने को कहती थी और इस चीज ने ‘कोई विकल्प नहीं होने पर’ कड़ी मेहनत करने का उनपर बड़ा प्रभाव डाला।

वहीं उत्तर प्रदेश के दादरी के एक गांव में गौमांस खाने की अफवाह पर अखलाक की पीट-पीट कर हत्या कर दिए जाने की घटना के परिपे्रक्ष्य में केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सम्मान को सियासी स्वार्थों की सूली नहीं चढ़ने दिया जाएगा और उनके सामाजिक आर्थिक सरोकार तय करना हम सबकी जिम्मेदारी है। नकवी ने कहा कि नफरत की पेशेवर पाखंडी राजनीति को समाज की एकता और सौहार्द की ताकत से परास्त करना होगा।

देश के सभी लोगों, विशेषकर अल्पसंख्यकों के सामाजिक-आर्थिक सरोकार को तय करना हम सबकी जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी को निभाने में संकीर्णता और सियासी स्वार्थ आड़े नहीं आने देना चाहिए। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और सम्मान को सियासी स्वार्थों की सूली नहीं चढ़ने दिया जाएगा। अब वक्त आ गया है, जब वोट के लिए जज्बातों पर चोट बंद होनी चाहिए। सेकुलरिज्म के सियासी सूरमाओं को यह संदेश और सबक देश की जनता बार-बार दे रही है।

भाजपा नेता ने दावा किया कि सत्ता में आने के बाद से ही केंद्र की मोदी सरकार ने गरीबों, उपेक्षितों, दलितों और अल्पसंख्यक तबके के समुचित विकास के लिए मजबूत कदम उठाए हैं। अल्पसंख्यकों में विश्वास का माहौल बना है, लेकिन कुछ वोट के सौदागरों को यह सकारात्मक माहौल हजम नहीं हो रहा है। हम समाज के बिखराव-टकराव की सियासत की निंदा करते हैं और ऐसी ताकतें, जो देश के धार्मिक-सामाजिक सौहार्द के ताने-बाने को ध्वस्त करने का शैतानी मंसूबा लेकर काम कर रही हैं, वे इंसानियत की दुश्मन हैं। हमें एकजुट हो कर इनके मंसूबों को ध्वस्त करना होगा।

उनसे मिलने आए मुसलिम समाज के धार्मिक नेताओं, उलेमाओं और अन्य लोगों को उन्होंने विश्वास दिलाया कि भारत में अल्पसंख्यकों के धार्मिक और सामाजिक अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं। कुछ दुखद घटनाएं समाज की शांति, सौहार्द और एकता के ताने-बाने को नुकसान नहीं पहुंचा सकतीं। संसदीय और अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री ने कहा देश की प्रगति पर पलीता लगाने के पोलिटिकल पाखंड का पर्दाफाश हो चुका है। देश के सौहार्द, समृद्धि और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की शैतानी साजिश को समाज की एकता ही नाकाम कर सकती है। हम अगर किसी राष्ट्र विरोधी, समाज विरोधी ताकतों के चक्रव्यूह में फंसे तो ये शैतानी ताकतें कामयाबी का जश्न मनाएंगी। इन शैतानी ताकतों की मुराद है मुल्क की नाकामी।

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