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उप्र सरकार की ‘अक्षमता’ से हुआ दादरी हत्याकांड: नजमा

नजमा हेप्तुल्ला ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार की ‘अक्षमता’ के चलते गोमांस की अफवाह फैलने पर दादरी में एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई और प्रधानमंत्री से सभी मुद्दे पर बोलने की अपेक्षा नहीं की जा सकती..
Author नई दिल्ली | October 12, 2015 08:34 am
अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेप्तुल्ला। (पीटीआई फाइल फोटो)

अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेप्तुल्ला ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार की ‘अक्षमता’ के चलते गोमांस की अफवाह फैलने पर दादरी में एक व्यक्ति की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई और प्रधानमंत्री से सभी मुद्दे पर बोलने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

नजमा ने कहा, ‘मैं नहीं जानती कि आखिर क्यों हम हमेशा महसूस करते हैं कि हर एक मुद्दे पर प्रधानमंत्री को वही भाषा बोलनी चहिए जो हम उनसे बुलवाना चाहते हैं। यह सही तरीका नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री की अपनी भाषा है। अपनी पसंदगी और नापसंदगी जताने का उनका अपना तरीका है। हम, व्यक्तिगत रूप से अपने लफ्ज प्रधानमंत्री के मुंह में नहीं डाल सकते।’

नजमा ने कहा कि मोदी ने पहले ही अपनी सरकार की प्राथमिकताएं साफ कर दी हैं जो सभी के लिए विकास है। उन्होंने यह बात प्रतिद्वंद्वी दलों की इस आलोचना पर प्रतिक्रिया करते हुए कही कि मोदी ने दादरी में गोमांस खाने की अफवाह पर एक व्यक्ति को पीट-पीट कर मार डालने की घटना की निंदा नहीं की। नजमा ने कहा कि मोदी शुरू से ही ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नजरिए को बुलंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और वित्तमंत्री अरुण जेटली इस घटना पर सरकार का नजरिया साफ कर चुके हैं।

नजमा ने कहा, ‘वित्तमंत्री ने इस घटना की निंदा न सिर्फ दिल्ली में की, बल्कि जब वह विदेश गए तो उन्होंने वहां से एक संदेश दिया कि इन घटनाओं ने उनका काम मुश्किल बना दिया है।’ उन्होंने उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी पर हमला करते हुए कहा कि यह राज्य सरकार है जो कानून-व्यवस्था के लिए जिम्मेदार है और उसे इन सवालों का जवाब देना चाहिए कि आखिर वह इस ‘निंदनीय घटना’ को क्यों रोक नहीं सकी।

उनसे जब प्रतिद्वंद्वी दलों के इन आरोपों के बारे में पूछा गया कि ये भाजपा-आरएसएस नेता हैं जिन्होंने बिहार चुनाव से पहले ध्रुवीकरण का माहौल बनाने में भूमिका निभाई तो नजमा ने यह कहते हुए जवाबी हमला किया कि अगर ऐसा है तो आखिर राज्य सरकार ने इसे रोकने के लिए कुछ क्यों नहीं किया। उन्होंने कहा, ‘आप (उत्तर प्रदेश सरकार) वहां किस लिए हैं? इसका मतलब है कि आप इस ध्रुवीकरण को रोकने में सक्षम नहीं हैं। यह आपकी नाअहली दिखाता है।’

इस आरोप पर कि मोदी सरकार के तहत मुसलमान अपने को ज्यादा अलग-थलग महसूस कर रहे हैं, उन्होंने कहा, ‘मुसलमान 1947 से अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। यह अब नहीं है। इसलिए अगर आप सोचते हैं कि यह एक निंदनीय घटना हैं, मैं आपको याद दिला सकती हूं कि कितनी निंदनीय घटनाएं हुई हैं।’ नजमा ने कहा, ‘एक मुसलमान नहीं, बल्कि बहुत से मुसलमान और हिंदू मारे गए। वे मुरादाबाद में मारे गए, वे भागलपुर में मारे गए, वे मेरठ में मारे गए। और बस इस खातिर कि उस सरकार ने कहा कि वह धर्मनिरपेक्ष है, इसलिए हमने अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यक की हत्याओं को स्वीकार कर लिया।’

उन्होंने कहा यह उत्तर प्रदेश सरकार है जिसमें मंत्री आजम खान शामिल हैं जो संयुक्त राष्ट्र जाने के ‘बड़े बड़े वादे’ करते हैं और उन्हें जिम्मेदारी लेनी चाहिए। नजमा ने दावा किया, ‘उन्होंने क्यों नहीं देखा कि क्या हो रहा है? अगर इस तरह का ध्रुवीकरण चल रहा था तो उनके खुफिया विभाग के लोग क्या कर रहे थे? क्या वे उन्हें खबर नहीं कर सके? क्यों हर चीज के लिए नरेंद्र मोदी को बदनाम किया जाए? क्यों हर चीज के लिए केंद्र को बदनाम किया जाए?’

मुसलमानों के उत्थान के लिए अफर्मेटिव (सकारात्मक) कार्रवाई के उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी के आह्वान पर उनका विचार पूछने पर उन्होंने कहा कि भारत में अफर्मेटिव कार्रवाई का मतलब आरक्षण होता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार का ‘सबका साथ, सबका विकास’ एजंडा अफर्मेटिव कार्रवाई है।

उन्होंने कहा कि दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी अपने समय में गरीबी के बारे में बोला करती थीं, लेकिन उन्होंने कोई फार्मूला नहीं दिया कि गरीबी कैसे खत्म होगी। ‘यह महज एक नारा था।’ लेकिन मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के साथ जनधन योजना और अन्य कार्यक्रम जैसी अनेक स्कीमें हैं।

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