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केजरीवाल की दादरी में ‘नो एंट्री’, ग्रामीणों ने मीडियाकर्मियों पर बरसाए पत्थर

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आज गौमांस खाने की अफवाह के बाद भीड़ द्वारा मारे गए अखलाक के परिवार से मिलने दादरी के बिसहड़ा गांव पहुंचे। हालांकि स्थानीय प्रशासन..

Author ग्रेटर नोएडा | October 3, 2015 3:07 PM
केजरीवाल ने कहा, ‘‘दादरी में जो हुआ वह मानवता के खिलाफ है। यह पूरी तरह गलत है। इससे ना तो हिन्दुओं को और ना ही मुस्लिमों को, किसे फायदा पहुंचा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और कुछ स्थानीय कांग्रेस नेताओं को आज दादरी के बिसहड़ा गांव में घुसने से रोक दिया गया। हाल में गोमांस खाने की अफवाह को लेकर गांव में एक मुस्लिम परिवार पर हमला किया गया था और एक व्यक्ति की हत्या कर दी गयी थी।

केजरीवाल और कांग्रेस के नेता वहां शोकसंतप्त परिवार से मिलने गए थे। गांव में लगातार लोगों के आने से गुस्साए ग्रामीणों ने मीडियाकर्मियों पर पत्थर बरसाए जिसके बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया।

पुलिस ने कहा कि एक महिला ने गांव में मीडिया और दूसरे लोगों की मौजूदगी पर आपत्ति जतायी और कुछ लोगों ने उनपर पथराव किया जिसके बाद से गांव में स्थिति तनावपूर्ण बन गयी है।

पुलिस के अनुसार विरोध को देखते हुए लोगों को गांव में घुसने से रोक दिया गया और प्रशासन गांववालों को शांत करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘एक बार जब हालात सामान्य हो जाएंगे तो लोगों को गांव में जाने की मंजूरी दी जाएगी।’’

केजरीवाल के साथ उनकी पार्टी के कुछ दूसरे नेता भी थे। गांव के बाहर रोके जाने से नाराज केजरीवाल ने सवाल किया कि जब असदुद्दीन ओवैसी और महेश शर्मा जैसे नेताओं को वहां जाने दिया गया तो उन्हें शोकसंतप्त परिवार से मिलने से क्यों रोका गया?

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘‘हमें पुलिस और प्रशासन ने रोक दिया। महेश शर्मा और ओवैसी को कल नहीं रोका था। फिर मुझे क्यों? मैं सबसे शांतिप्रिय हूं। केवल अखलाक के परिवार से मिलना चाहता हूं।’’

आप नेताओं ने दावा किया कि उन्हें गांववालों ने नहीं बल्कि पुलिस और प्रशासन ने रोका। बाद में प्रशासनिक अधिकारी केजरीवाल को एनटीपीसी के गेस्ट हाउस ले गए।

सिराज मेंहदी के नेतृत्व में पहुंचे प्रदेश कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल को भी आज गांव में नहीं जाने दिया गया। जिला प्रशासन ने कहा कि पीड़ित के बेटे ने अपील की कि उनका परिवार दुख की इस घड़ी में शांति चाहता है जिसके बाद उन्होंने गांव को सील कर दिया।

जिला मजिस्ट्रेट एन पी सिंह ने कल कहा था कि पीड़ित के बेटे सरताज ने लिखित अनुरोध किया कि उनका परिवार किसी से भी नहीं मिलना चाहता क्योंकि लगातार लोगों के आने से उन्हें परेशानी हो रही है।

सिंह ने कहा कि सवाल उठ रहे थे कि प्रशासन लोगों को वहां जाने से क्यों नहीं रोक रहा। उन्होंने कहा कि हालांकि वह पारदर्शिता में विश्वास रखते हैं लेकिन वहां जाने वाले लोग मुद्दे को ‘सांप्रदायिक रंग’ देने की कोशिश कर रहे हैं जोकि चिंता का विषय है।

शुक्रवार को एआईएमआईएम के नेता ओवैसी ने मृतक मोहम्मद अखलाक के परिवार को सांत्वना देने के लिए गांव का दौरा किया था और ‘पूर्व नियोजित हत्या’ पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल किया था।

ओवैसी ने उन दावों को खारिज कर दिया कि गोमांस खाने की अफवाह को लेकर अखलाक के परिवार पर हमला किया गया और आरोप लगाया कि अखलाक के धार्मिक विश्वास के कारण उसपर हमला किया गया।

उन्होंने कहा था, ‘‘यह हमला मांस के कारण नहीं किया गया। हत्यारों को गिरफ्तार करने की बजाए सपा सरकार पीड़ित के घर में पाए गए मांस का फोरेंसिक टेस्ट करा रही है। पहले जहर से भरे उनके दिमाग की जांच होनी चाहिए। वे पीड़ित को आरोपी के तौर पर देख रहे हैं।’’

स्थानीय भाजपा सांसद महेश शर्मा भी कल अखलाक के परिवार से मिले थे। उन्होंने हत्या को एक ‘हादसा’ करार देते हुए कहा था कि इसे सांप्रदायिक रंग नहीं देना चाहिए और राजनीति नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह ‘खतरनाक’ साबित हो सकता है।

गांव में पीएसी (प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी) एवं पुलिस दल तैनात किए गए और पांच या उससे ज्यादा लोगों के जमा होने पर रोक लगाने के लिए निषेधाज्ञा लगायी गयी है। इसी बीच जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि हमले में गंभीर रूप से घायल हुए अखलाक के 22 साल के बेटे दानिश की हालत सुधर रही है। उन्होंने कहा कि पीड़ित के परिवार के लोग अस्पताल में किए जा रहे इलाज से संतुष्ट हैं।

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