मुंबई के दादर में एक दर्दनाक सड़क हादसे में 28 वर्षीय स्विगी डिलीवरी एग्जीक्यूटिव नियाज अहमद की मौत हो गई। सोमवार सुबह प्लाजा सिनेमा के पास एक बेस्ट बस के नियंत्रण खोने के बाद कई वाहनों को टक्कर मारने से यह हादसा हुआ। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले नियाज की शादी की बात चल रही थी। वह नौ दिन बाद अपनी होने वाली दुल्हन से मिलने वाले थे। हालांकि, संभावित दुल्हन को देखने के लिए जाने से महज नौ दिन पहले हादसे में उनकी जान चली गई।

जानकारी के मुताबिक, रूट नंबर 463 पर चल रही इलेक्ट्रिक बेस्ट बस सुबह करीब 9:30 बजे वीर कोतवाल गार्डन के पास अनियंत्रित हो गई। बस ने पहले एक क्रेन को टक्कर मारी और फिर एक प्राइवेट कार, टैक्सी, उबर कैब और दो दोपहिया वाहनों समेत पांच वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में छह अन्य लोग भी घायल हुए हैं।

ड्यूटी पर निकले थे नियाज

नियाज अहमद उस समय अपने इलेक्ट्रिक स्कूटर पर थे, जब बस ने उन्हें टक्कर मार दी। उन्हें तुरंत सायन अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं, 22 वर्षीय एक अन्य डिलीवरी कर्मी ऋषभ गुप्ता गंभीर सिर और सीने की चोटों के कारण अस्पताल में भर्ती हैं।

नियाज के चाचा रोज अली ने बताया कि वह स्विगी में डिलीवरी एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम करते थे और मुंबई में अपने चचेरे भाई के साथ रहते थे। उनका परिवार उत्तर प्रदेश में रहता है। परिवार में माता-पिता और एक छोटी बहन हैं। पहले नियाज ठेले पर प्याज-आलू बेचते थे, लेकिन बेहतर कमाई के लिए उन्होंने स्विगी जॉइन की थी। उनका मकसद परिवार का सहारा बनना और बहन की शादी के लिए पैसे जुटाना था।

शादी की तैयारी को लेकर थे खुश

करीब पांच साल पहले बेहतर रोजगार की तलाश में मुंबई आए नियाज ने हाल ही में अपनी शादी की बात शुरू की थी। परिवार के अनुसार, वह 17 जून को उत्तर प्रदेश जाने वाले थे, जहां उन्हें एक संभावित दुल्हन के परिवार से मिलना था। शादी को लेकर बातचीत चल रही थी और वह इस मुलाकात को लेकर काफी उत्साहित थे।

रोज अली ने बताया कि नियाज अक्सर कहते थे कि अब उनकी आर्थिक स्थिति इतनी बेहतर हो गई है कि वे खुद भी शादी कर सकते हैं और अपनी छोटी बहन की शादी भी करा सकते हैं। लेकिन इससे पहले ही हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली।

कंधे पर थी पूरे परिवार की जिम्मेदारी

परिवार ने अब सरकार और स्विगी दोनों से आर्थिक सहायता की मांग की है। चाचा के मुताबिक, नियाज परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके पिता दृष्टिबाधित हैं और पूरा परिवार उन्हीं की कमाई पर निर्भर था।

रोज अली ने बताया कि जब उन्हें हादसे की खबर मिली, तब वे काम पर थे। अस्पताल पहुंचने तक उन्हें बताया गया कि नियाज की मौत हो चुकी है। अब परिवार उनका पार्थिव शरीर उत्तर प्रदेश ले जाकर अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा है।

परिजनों के लिए सबसे कठिन काम नियाज के माता-पिता को यह दुखद खबर देना था। परिवार ने पहले यह खबर छिपाने की कोशिश की, लेकिन आखिरकार उन्हें बताना पड़ा कि नियाज अब इस दुनिया में नहीं रहे।