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भाटी हत्याकांड में डीपी यादव को उम्रकैद

दादरी के पूर्व विधायक महेंद्र सिंह भाटी हत्याकांड में पूर्व सांसद और पूर्व सपा नेता डीपी यादव को देहरादून में सीबीआइ की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। यादव ने सोमवार को सीबीआइ की अदालत में बड़े ही नाटकीय ढंग से बड़े काफिले के साथ आत्मसमर्पण किया था। डीपी यादव के साथ मंगलवार […]

Author March 11, 2015 12:01 PM
दादरी के पूर्व विधायक महेंद्र सिंह भाटी हत्याकांड में पूर्व सांसद और पूर्व सपा नेता डीपी यादव को देहरादून में सीबीआइ की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।

दादरी के पूर्व विधायक महेंद्र सिंह भाटी हत्याकांड में पूर्व सांसद और पूर्व सपा नेता डीपी यादव को देहरादून में सीबीआइ की विशेष अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। यादव ने सोमवार को सीबीआइ की अदालत में बड़े ही नाटकीय ढंग से बड़े काफिले के साथ आत्मसमर्पण किया था। डीपी यादव के साथ मंगलवार को सीबीआइ अदालत ने महेंद्र सिंह भाटी और उनके साथी उदय प्रकाश आर्य की हत्या के मामले में खूंखार बदमाश पाल सिंह उर्फ लक्कड़पाला प्रणीत भाटी और डीपी के एक रिश्तेदार करण यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

सीबीआइ की विशेष अदालत के जज अमित कुमार सिरोही ने लंबी बहस के बाद अपना फैसला सुनाया। फैसले के बाद यादव समर्थकों में मायूसी छा गई। डीपी के वकील रूपेंद्र भंडारी ने कहा कि वे सीबीआइ की विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे। वहीं महेंद्र सिंह भाटी के बेटे संदीप भाटी ने कहा कि आखिर 23 साल बाद उनके पिता को न्याय मिला है। उनके पिता हत्यारों को उनके किए की सजा मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जब उनके पिता महेंद्र सिंह भाटी की हत्या हुई थी तब वे 24 साल के थे। मंगलवार को सीबीआइ की अदालत में भारी पुलिस बल तैनात था। सीबीआइ परिसर और आसपास का इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था।

डीपी यादव और महेंद्र सिंह भाटी के समर्थक उत्तर प्रदेश और हरियाणा से बड़ी संख्या में आए थे। वे हथियारों से लैस थे। सीबीआइ के जज अमित सिरोही ने डीपी यादव और उनके साथियों पर 302, 307, 120 बी धाराओं के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई। सीबीआइ की अदालत में 41 गवाहों के बयान दर्ज किए और 28 फरवरी को इन बयानों के आधार पर डीपी यादव, उसके साथी करण यादव, पाल सिंह उर्फ लक्कड़पाला और प्रणीत भाटी को दोषी करार दिया था। प्रणीत भाटी, करण और पाल सिंह को सीबीआइ की अदालत में 28 फरवरी को ही हिरासत में लेकर देहरादून की जिला जेल में भेज दिया था।

डीपी यादव ने दिल की बीमारी का हवाला देते हुए अदालत में 28 फरवरी पेश न होने की दरखास्त दी थी तब सीबीआइ अदालत ने उन्हें नौ मार्च तक सीबीआइ की अदालत में आत्म समर्पण करने का वक्त दिया था।

जिस पर यादव ने सोमवार को देहरादून में आकर सीबीआइ की अदालत के सामने आत्म समर्पण कर दिया। इस हत्याकांड के मामले में कुल आठ लोग आरोपी बनाये गए थे। जिनमें 4 अन्य आरोपी महाराज सिंह, जयपाल गुर्जर, औलाद अली, और तेजपाल भाटी की मुकदमा चलने के दौरान मृत्यु हो गई थी। महेंद्र सिंह भाटी की हत्या 13 सितंबर 1992 की शाम दादरी के पास भंगेल रोड पर रेलवे फाटक के पास की गई थी। इस हत्याकांड में उनके एक साथी उदयप्रकाश आर्य उनके साथ मारे गए थे जबकि उनका ड्राइवर देवेंद्र और सुरक्षाकर्मी वेदराम कौशिक घायल हो गए थे।

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