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हिरासत में मौत का मामला: पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को उम्र कैद

1990 में जामनगर में भारत बंद के दौरान हिंसा हुई थी। हिंसा के बाद 100 से ज्यादा लोंगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद आरोपी प्रभुदास माधवजी वैश्नानी की रिहाई के बाद मौत हो गई थी।

Author जामनगर | June 20, 2019 2:19 PM
पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्। फोटो: इंडियन एक्सप्रेस

गुजरात कैडर के पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को 1990 के हिरासत में मौत के मामले में उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। जामनगर सेशन कोर्ट ने उन्हें  दोषी करार दिया है। बता  दें कि 1990 में जामनगर में भारत बंद के दौरान हिंसा हुई थी।

हिंसा के बाद 100 से ज्यादा लोंगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद आरोपी प्रभुदास माधवजी वैश्नानी की रिहाई के बाद मौत हो गई थी। कोर्ट ने संजीव भट्ट को कस्टडी में लेने के दौरान हुई मारपीट और प्रताड़ना का जिम्मेदार मानते हुए ये सजा सुनाई।  पूर्व आईपीएस अधिकारी उस वक्त जामनगर के एएसपी थे।

वैश्नानी को करीब 10 दिन तक हिरासत में रखा गया था। जमानत पर रिहा होने के 10 दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। मौत के बाद भट्ट और अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

बता दें कि भट्ट ने इस मामले में 12 जून को सुप्रीम कोर्ट में याचिक दायर की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। उन्होंन याचिका में गवाहों की एकबार फिर से नए सिरे से जांच की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा करीब 300 गवाहों को सूचीबद्ध किया गया था लेकिन ट्रायल के दौरान सिर्फ 32 गवाहों के ही बयान दर्ज किए गए। मामले में इंवेस्टिगेशन टीम में शामिल तीन पुलिस अधिकारी और कुछ अन्य गवाह जिन्होंने हिरासत में किसी भी तरह की हिंसा की बात से इनकार किया है उनके बयानों को दर्ज नहीं किया गया।

वहीं गुजरात पुलिस ने उनकी इस याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि वह मामले में कोर्ट का फैसले देरी से आये इसलिए याचिका का सहारा ले रहे हैं। बता दें कि संजीव भट्ट को 2011 में ड्यूटी के दौरान लापरवाही बरतने के लिए सस्पेंड कर दिया गया था।

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