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मौजूदा शिक्षा प्रणाली तैयार कर रही भ्रष्टाचारी: हिंदू शिक्षा बोर्ड

उच्च शिक्षण संस्थाओं पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा नियंत्रण करने का प्रयास करने के आरोपों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक शैक्षणिक संस्था...

सच तो यह है कि सरकारी विद्यालयों की दुर्दशा और शिक्षा के बाजारीकरण की जिम्मेदारी सरकार पर आती है।

उच्च शिक्षण संस्थाओं पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा नियंत्रण करने का प्रयास करने के आरोपों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े एक शैक्षणिक संस्था ने वर्तमान प्रणाली को अक्षमता और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला करार देते हुए उसकी आलोचना की और इन शैक्षणिक संस्थाओं को अपना अकादमिक कार्यक्रम स्वयं तैयार करने के लिए प्रोत्साहन दिए जाने की वकालत की। हिंदू शिक्षा बोर्ड ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से कहा- हमारी नियामक प्रणाली जटिल और भ्रमित करने वाली है। इससे अक्षमता और भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन मिलता है जबकि नई पहल और प्रयोग के मार्ग में बाधा पैदा होती है।

बोर्ड ने कहा कि यह सुविधाजनक और सबको साथ लेकर चलने वाली व्यवस्था को राह प्रदान करने वाला होना चाहिए जो समग्रता, पारदर्शिता और खुलेपन पर जोर देता हो। मानव संसाधन विकास मंत्रालय नई शिक्षा नीति तैयार करने के बारे में विचार विमर्श कर रहा है। इसमें कहा गया है कि सरकार को संबद्धता प्रणाली को समाप्त करना चाहिए क्योंकि यह कालेजों को नवाचार से दूर करता है और गैर-गंभीर पक्षों को शिक्षा बाजार में प्रवेश करने को प्रोत्साहित करता है। इस प्रणाली से विश्वविद्यालय महज परीक्षा नियंत्रक बन कर रह गए हैं।

बोर्ड का मानना है कि इसके स्थान पर हमारे पास एक ऐसी प्रणाली होनी चाहिए जहां शैक्षणिक संस्थाओं के पास अपना अकादमिक कार्यक्रम तैयार करने, उपयुक्त पाठ्यक्रम का विकास करने और डिग्री प्रदान करने का अवसर होना चाहिए। संघ से जुड़ी संस्था ने कहा कि इसके साथ ही पेशेवर निकायों के जरिए मूल्यांकन की ठोस प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए जहां मूल्यांकन (एक्रीडिटेशन) संस्थागत स्तर की बजाए निजी अकादमिक कार्यक्रम के स्तर पर होना चाहिए।

शैक्षणिक संस्थाओं को और अधिक स्वायत्ता देने के सुझाव और नियामक तंत्र के बारे में बोर्ड के विचारों का कई वर्ग स्वागत कर सकते हैं विशेष तौर पर शिक्षाविद्। मंत्रालय को बोर्ड के विचार ऐसे समय में प्राप्त हुए हैं जब कुछ ही हफ्ते पहले हिंदू शिक्षा बोर्ड के सम्मेलन में आरएसएस के महासचिव कृष्ण गोपाल ने शिक्षा प्रणाली में आमूलचूल बदलाव की वकालत की थी और इसमें हिंदू विचारों का समावेश करने पर जोर दिया था।

इस सम्मेलन में मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी और कई केंद्रीय मंत्रियों ने हिस्सा लिया था। इसमें अन्य मांगों के अलावा आयुर्वेद, सिद्धा और अन्य स्वदेशी चिकित्सा पद्धतियों को चिकित्सा के समन्वित पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने की बात कही गई थी। इसमें उच्च शिक्षा में आमूलचूल बदलाव पर भी जोर दिया गया था।

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