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सावरकर ने जेल से चिट्ठी लिख अंग्रेजों से मांगी थी दया की भीख? सरकार के पास रिकॉर्ड नहीं

सेल्युलर जेल के लाइट एंड साउंड शो में सावरकर से जुड़ी दया याचिकाओं का उल्लेख नहीं किया गया है क्योंकि अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के कला और संस्कृति विभाग के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

Author नई दिल्ली | Updated: February 5, 2020 8:19 AM
अंडमान प्रशासन के पास वीर सावरकर की दया याचिकाओं का रिकॉर्ड नहीं है।

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय ने मंगलवार को संसद को बताया कि अंडमान प्रशासन के पास विनायक दामोदर सावरकर की दया याचिकाओं का रिकॉर्ड नहीं है। संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को बताया कि अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के कला और संस्कृति विभाग के पास वी डी सावरकर की दया याचिकाओं का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

अंडमान सेल्युलर जेल के ‘लाइट एंड साउंड शो’ में सावरकर द्वारा अंग्रेजों को लिखी गई दया याचिकाओं का कोई उल्लेख न होने के बारे में पूछे गए प्रश्न के लिखित जवाब में पटेल ने इस संबंध में रिकॉर्ड न होने की बात कही। उन्होंने बताया ‘‘अंडमान एवं निकोबार प्रशासन (कला एवं संस्कृति निदेशालय) से प्राप्त सूचना के अनुसार, सेल्युलर जेल के लाइट एंड साउंड शो में ऐसी दया याचिकाओं का उल्लेख नहीं किया गया है क्योंकि अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के कला और संस्कृति विभाग के पास ऐसा कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

बीते शनिवार को वीर सावरकर के सम्मान में बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रम में हेगड़े ने कन्नड में कथित तौर पर कहा था कि स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंने देश के लिए कुछ भी कुर्बान नहीं किया, उनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने उपवास सत्याग्रह से स्वतंत्रता हासिल की। गांधी ने विरोध के लिए उपवास का सहारा लिया।

हेगड़े ने कहा, ‘‘ ऐसे लोग महापुरुष बन गए।’’ उन्होंने कथित रूप से कहा कि गांधी नीत स्वतंत्रता संग्राम ब्रिटिश के साथ समझौता था। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘ उन्हें लगता है क्रांतिकारियों और अन्य स्वतंत्रता सेनानी जो कांग्रेस से जुड़े नहीं थे, उनकी अनदेखी की गई।

केंद्र ने मंगलवार को संसद में यह भी कहा कि ‘लव जिहाद’ मौजूदा कानूनों के तहत परिभाषित नहीं है और इससे जुड़ा कोई मामला केंद्रीय एजेंसियों के संज्ञान में नहीं आया है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। रेड्डी ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद किसी भी धर्म को स्वीकारने, उस पर अमल करने और उसका प्रचार-प्रसार करने की आजादी देता है।

उन्होंने कहा कि केरल उच्च न्यायालय सहित कई अदालतों ने इस विचार को सही ठहराया है। रेड्डी ने कहा, ‘‘यह ‘लव जिहाद’ शब्द मौजूदा कानूनों के तहत परिभाषित नहीं है। लव जिहाद का कोई मामला केंद्रीय एजेंसियों के संज्ञान में नहीं आया है।’’ उन्होंने कहा कि एनआईए ने केरल में अलग अलग धर्मों के जोड़ों के विवाह के दो मामलों की जांच की है।

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