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विशेषज्ञ की कलम से: तेजी से बढ़ रही ब्लॉकचेन विशेषज्ञों की मांग

ब्लॉकचेन में एक बार किसी भी लेन-देन को दर्ज करने पर इसे न तो वहां से हटाया जा सकता है और न ही इसमें संशोधन किया जा सकता है।

Author Published on: May 21, 2020 3:48 AM
जिस प्रकार हजारों-लाखों कंप्यूटरों को आपस में जोड़कर इंटरनेट का आविष्कार हुआ, ठीक उसी प्रकार डाटा ब्लॉकों (आंकड़ों) की लंबी शृंखला को जोड़कर उसे ब्लॉकचेन का नाम दिया गया है।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने क्रिप्टोकरेंसी के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए प्रतिबंध को हटा दिया था। इसी के साथ देश में एक बार क्रिप्टोकरेंसी और उसकी तकनीक को लेकर चर्चा हो रही है। फेसबुक सरीखे कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां क्रिप्टोकरेंसी और उसकी तकनीक को लेकर तेजी से काम कर रही है। क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल मुद्रा होती है, जो ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है। इस मुद्रा में कोडिंग तकनीक का उपयोग होता है। इस तकनीक के जरिए मुद्रा का लेनदेन का पूरा लेखा-जोखा होता है, जिससे इसे हैक करना बहुत मुश्किल है। यही कारण है कि क्रिप्टोकरेंसी में धोखाधड़ी की संभावना बहुत कम होती है।

आम लोगों के लिए ये एक अजनबी विषय हो सकता है, लेकिन आने वाले समय में इसका सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर ही पड़ेगा। इसलिए हम आज आम लोगों की नजर से आपको ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के बारे में बताते हैं। आपने क्रिप्टोकरेंसी और बिटकॉयन के बारे में तो सुना ही होगा। ये दो साल से दुनिया भर के निवेशकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ब्लॉकचेन को भविष्य की सबसे असरदार टेक्नोलॉजी माना जा रहा है। आज सारी चीजें डाटा के इर्द-गिर्द घूमती हैं। ब्लॉकचेन को डाटा को रिकॉर्ड और स्थानांतरण करने का सबसे पारदर्शी, कुशल, सुरक्षित, लेखापरीक्षा योग्य और छेड़छाड़ से मुक्त टेक्नोलॉजी माना जाता है। दुनियाभर की सरकारें और कंपनियां इसे अपना रही हैं।

क्या है ब्लॉकचेन
जिस प्रकार हजारों-लाखों कंप्यूटरों को आपस में जोड़कर इंटरनेट का आविष्कार हुआ, ठीक उसी प्रकार डाटा ब्लॉकों (आंकड़ों) की लंबी शृंखला को जोड़कर उसे ब्लॉकचेन का नाम दिया गया है। ब्लॉकचेन तकनीक तीन अलग-अलग तकनीकों का समायोजन है, जिसमें इंटरनेट, पर्सनल की (निजी कुंजी) की क्रिप्टोग्राफी अर्थात जानकारी को गुप्त रखना और प्रोटोकॉल पर नियंत्रण रखना शामिल है।

क्रिप्टोग्राफी की सुरक्षित शृंखला पर सर्वप्रथम 1991 में स्टुअर्ट हैबर और डब्लू स्कॉट स्टोनेर्टा ने काम किया। ब्लॉकचेन एक ऐसी तकनीक है जिससे बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टो-करेंसियों का संचालन होता है। यदि सरल शब्दों में कहा जाए तो यह एक डिजिटल ‘सार्वजनिक बही-खाता’ है, जिसमें प्रत्येक लेन-देन का रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है।

ब्लॉकचेन में एक बार किसी भी लेन-देन को दर्ज करने पर इसे न तो वहां से हटाया जा सकता है और न ही इसमें संशोधन किया जा सकता है। अमेरिकी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार ब्लॉकचेन तकनीक पूरे विश्व के इको-सिस्टम को प्रभावित करने की क्षमता रखती है और विश्व के लगभग सभी बड़े केंद्रीय बैंक इसे लेकर शोध कर रहे हैं।

कहां मिलेगा प्रशिक्षण
हाल ही में प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म लिंक्डइन ने ‘इमर्जिंग जॉब्स 2020’ नाम से उन नौकरियों की एक सूची जारी की है, जो साल 2020 में मांग में रहने वाली हैं। इसमें से एक ब्लॉकचेन तकनीक भी है। ब्लॉकचेन तकनीक की मांग को देखते हुए भारत के कई आइआइटी के इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में अलग से एक मॉड्यूल के तौर पर इस विषय की पढ़ाई कराई जा रही है। कुछ निजी कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रम भी चलाया जा रहा है। मौजूदा वक्त को देखते हुए भारतीय कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अधीन गठित टेलीकॉम क्षेत्र स्किल काउंसिल द्वारा भी ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी के प्रशिक्षण देने की तैयारी की जा रही है।

इन क्षेत्रों में मिलेगी नौकरी
ब्लॉकचेन तकनीकी जानने वालों को बैंकिंग-भुगतान, साइबर सुरक्षा, आपूर्ति शृंखला प्रबंधन, अनुमान आधारित चीजें, नेटवर्किंग और इंटरनेट आॅफ थिंग्स, बीमा, निजी परिवहन और साझा सवारी, क्लाउड स्टोरेज, चैरिटी, मतदान, सरकारी विभाग, स्वास्थ्य विभाग, ऊर्जा प्रबंधन, आॅनलाइन संगीत, रिटेल, रियल एस्टेट, जनसहयोग आदि के क्षेत्र में नौकरी मिलने की संभावना है। भारत में इस तकनीक का उपयोग सूचना प्रौद्योगिकी और डाटा प्रबंधन, सरकारी योजनाओं का लेखा-जोखा, आर्थिक सहायता वितरण, कानूनी कागजात रखने, बैंकिंग और बीमा, डिजिटल पहचान और प्रमाणीकरण, स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े, साइबर सुरक्षा, क्लाउड स्टोरेज, ई-गवर्नेंस, स्मार्ट अनुबंध, शैक्षणिक जानकारी समेत अन्य कामों में इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस वजह से इस क्षेत्र में करिअर की अपार संभावनाएं है।

इस क्षेत्र में नौकरियों की संभावनाओं को इस तथ्य से आप समझ सकते हैं कि नौकरी के लिहाज से दुनिया में जिन 20 कौशल की इन दिनों सबसे अधिक मांग है, उनमें ब्लॉकचेन तकनीक दूसरे नंबर पर है। कई रिसर्च फर्म की रिपोर्ट का अध्ययन करें तो पता चलता है कि वर्ष 2023 तक ब्लॉकचेन का बाजार करीब एक-दो अरब अमेरिकी डॉलर की अनुमानित है। 2025 तक करीब 69.4 फीसदी की दर से यह बढ़ रहा है। इसमें हर साल जबर्दस्त वृद्धि आना तय है। ब्लॉकचेन की समझ रखने वाले इन दिनों 150 डॉलर यानी लगभग 10,000 रुपए प्रति घंटे तक ले रहे हैं।

भारत के बैंकिंग और बीमा क्षेत्र में इसके प्रति बहुत आकर्षण देखने को मिल रहा है। वस्तुत: इन क्षेत्रों में कई लोग संघ का निर्माण कर रहे हैं, ताकि वे उद्योगों के स्तर पर ब्लॉकचेन प्रौद्योगिकी के लाभों से विश्व को अवगत करा सकें। कुछ भारतीय कंपनियों ने ब्लॉकचेन तकनीक के जरिये वित्तीय सेवाएं देना शुरू कर दिया है।
-अरविंद बाली
(कार्यवाहक सीईओ, टेलीकॉम सेक्टर स्किल काउंसिल)

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