जवानों में आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं से चिंतित होकर, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने ऐसे मामलों की मासिक समीक्षा करने और उन्हें रोकने के लिए एक उच्च स्तरीय कोर ग्रुप का गठन किया है। यह निर्णय सीआरपीएफ मुख्यालय में इसी महीने की शुरुआत में हुई एक बैठक के बाद लिया गया है।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने इस तरह की घटनाओं की जांच करने, बार-बार होने वाले जोखिम की पहचान करने और सहायता प्रणालियों में सुधार करने के लिए एक कमेटी की जरूरत पर चर्चा की थी।

सीआरपीएफ कर्मियों में आत्महत्या से होने वाली मौतों की संख्या साल 2025 में पांच साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल ऐसी 59 मौतें दर्ज की गईं। आंकड़ों के मुताबिक, 2021 में 57, 2022 में 43, 2023 में 57, 2024 में 46 और 2025 में 59 सीआरपीएफ कर्मियों ने आत्महत्या की। वहीं, 30 मई 2026 तक 19 मौतें दर्ज की गईं। 2021 से मई 2026 तक के आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि इनमें से कई मौतें कर्मियों के ड्यूटी पर रहते हुए हुईं।

NHRC ने मांगी रिपोर्ट

पिछले हफ्ते राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले का संज्ञान लिया और गृह मंत्रालय तथा सीआरपीएफ के महानिदेशक से रिपोर्ट मांगी। एक अधिकारी के अनुसार, कोर ग्रुप की अध्यक्षता सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह करेंगे। अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “यह समूह हर महीने तीसरे सप्ताह में पिछली अवधि में दर्ज खुद को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं की समीक्षा करने के लिए बैठक करेगा। प्रत्येक समीक्षा में घटना के कारणों और परिस्थितियों, मनोवैज्ञानिक सहायता की उपलब्धता, संबंधित यूनिट द्वारा उठाए गए कदमों और सुधार की आवश्यकता वाले किसी भी मुद्दे की जांच की जाएगी।”

बटालियन के प्रमुख को प्रेजेंटेशन देनी होगी

अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक मामले में संबंधित बटालियन के कार्यालय प्रमुख या कमांडेंट को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मेन ग्रुप को प्रेजेंटेशन देनी होगी। अधिकारी के मुताबिक, “प्रेजेंटेशन में व्यक्ति का बैकग्राउंड, घटना के कारण, यूनिट द्वारा लिए गए एक्शन, दी गयी वेलफ़ेयर एंड मेडिकल हेल्प, प्रारंभिक जांच या छानबीन के निष्कर्ष और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए उठाए गए विशिष्ट उपायों को शामिल किया जाएगा।”

संबंधित डीआईजी, आईजी और एडीजी या एसडीजी सहित यूनिट के ऑपरेशनल हेड भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से रिव्यू में शामिल होंगे। अधिकारी ने बताया, “कोर ग्रुप को प्रत्येक मामले की निष्पक्ष रूप से जांच करने और जहां जरूरी हो वेलफेयर, मेडिकल और एडमिनिस्ट्रेटिव उपायों की सिफारिश करने का काम सौंपा गया है। यह समूह समीक्षा किए गए मामलों से उभरने वाले रुझानों और बार-बार होने वाले रिस्क फैक्टर की पहचान करेगा और फोर्स लेवल पर संस्थागत हस्तक्षेपों का प्रस्ताव देगा।”

योजना के अनुसार, मासिक समीक्षा का उद्देश्य सीआरपीएफ कर्मियों के बीच खुद को नुकसान पहुंचाने की प्रवृत्ति को कम करने के लिए निरंतर निगरानी, ​​समय पर हस्तक्षेप, जवाबदेही और बचाव के उपायों को मजबूत करना है।

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प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन राहत कोष (PM CARES Fund) में वित्त वर्ष 2024-25 में कुल योगदान घटकर 479.96 करोड़ रुपये रह गया। पीएम केयर फंड पोर्टल पर उपलब्ध लेटेस्ट रसीद और भुगतान लेखा के अनुसार, कुल योगदान में से 479.04 करोड़ रुपये घरेलू दान से आए जबकि विदेशी दान लगभग 92 लाख रुपये रहा। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें