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CRPF पर भी आर्थिक संकट की मार! रिपोर्ट में दावा- सितंबर के वेतन में नहीं मिलेगा राशन भत्ता

गृहमंत्रालय ने सीआरपीएफ के बकाए धन को अभी तक जारी नहीं किया है। लिहजाा, जवानों को सितंबर की सैलरी में 'राशन भत्ता' नहीं मिलेगा।

सीआरपीएफ को कैश भत्ता देने के लिए पैसे नहीं हैं। (फाइल फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

देश में आर्थिक संकट का असर अब सुरक्षा बलों पर भी पड़ने लगा है। नकदी की संकट से जूझ रही सरकार के पास देश की सबसे बड़ी पैरा-मिलिट्री फोर्स सीआरपीएफ को “राशन भत्ता” देने के लिए पैसे नहीं हैं। ‘द टेलिग्राफ’ में ‘इमरान अहमद सिद्दकी’ की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मोदी सरकार के पास देश के उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र समेत अलग-अलग हिस्सों में तैनात 3 लाख ‘केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल’ (CRPF) को भत्ता देने के लिए पैसे की कमी है। सीआरपीएफ को सैलरी में हर महीने 3,000 रुपये ‘राशन भत्ता’ दिया जाता है, लेकिन आतंरिक संचार माध्यमों के तहत यह सूचित कर दिया गया है कि इस बार सैलरी के साथ ‘राशन भत्ता’ नहीं मिलेगा।

सितंबर की सैलरी के साथ राशन भत्ता नहीं दिए जाने के पीछे गृहमंत्रालय के द्वारा पैसे जारी नहीं करने को बड़ा कारण बताया गया है। क्योंकि, गृह मंत्रालय को जुलाई, अगस्त और इस महीने में 800 करोड़ रुपये की किश्त जारी करनी बाकी है। ‘द टेलिग्राफ’ ने इस खबर के संबंध में हासिल संचार की एक प्रति होने का दावा किया है, जो 13 सितंबर की है।  दिल्ली मुख्यालय में सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यह पहली बार है जब राशन भत्ता बंद कर दिया गया है। हमने पिछले सप्ताह मंत्रालय (Home Ministry) के अधिकारियों से लंबित पड़े धन के बारे में बात की थी और तब उन्होंने लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था का हवाला दिया था।”

सीआरपीएफ के जवानों के लिए राशन भत्ता काफी अहम होता है। क्योंकि, आतंकवाद और माओवाद प्रभावित इलाकों में लड़ने के लिए उन्हें फिट रखना बेहद जरूरी है और जवान कैंटीन से लेकर अन्य जगहों पर ‘राशन भत्ते’ का इस्तेमाल करते हैं। द टेलिग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में एक अधिकारी के गुस्से के जिक्र किया है। जिसमें वह कहते हैं, “भत्ता को वापस लेने का फैसला प्रधानमंत्री के उस दावे के विपरीत है, जिसमें वह सुरक्षा बलों को लड़ाई के लिए फिट बनाने की बात करते हैं।” गौरतलब है कि सीआरपीएफ जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और माओवादी बेल्ट में विद्रोह एवं आतंकवाद से लोहा लेती रहती है।

रिपोर्ट के मुताबिक आतंरिक बातचीत में सुरक्षा बल को कहा गया है कि 22 जुलाई, 8 अगस्त और 9 सितंबर को गृह मंत्रालय को 800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि आवंटित करने के लिए कहा था ताकि नियमित राशन भत्ते को नियमित वेतन के साथ तैयार किया जा सके, लेकिन अतिरिक्त बजट का आवंटन अभी भी गृह मंत्रालय से अपेक्षित है। रिपोर्ट में सीआरपीएफ के उप महानिरीक्षक (खुफिया) मोजेज दिनाकरन के बयान का भी जिक्र है जिसमें वह कहते हैं कि इस साल राशन भत्ता थोड़ा बढ़ा दिया गया है और कर्मियों को 22,194 रुपये के अरिर्ज (Arrears) भुगतान करने के बाद जुलाई में फंड समाप्त हो गया था। गृह मंत्रालय से अतिरिक्त धनराशि मिलते ही इसे फिर से शुरू कर दिया जाएगा।

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