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‘हम भी तो देश के नागरिक हैं, हमारे भी कुछ अधिकार हैं, पर न पानी मिल रहा, न टॉयलेट’ ; CRPF जवान ने चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को लिखी चिट्ठी में उन्होंने सीआरपीएफ जवानों की अमानवीय और दयनीय स्थिति का जिक्र किया है।

झारखंड विधानसभा चुनाव के लिए ड्यूटी पर तैनात एक सीआरपीएफ जवान ने सरकार की और से सहुलियतें न मिलने पर चुनाव आयोग को चिट्ठी लिखी है। सीआरपीएफ के असिस्टेंट कमांडेंट राहुल सोलंकी ने चिट्ठी में लिखा है कि वह भी भारत के नागरिक हैं और उनके भी कुछ अधिकार हैं लिहाजा उन्हें भी और लोगों की तरह ही सुख-सुविधाएं मिलनी चाहिए।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा को लिखी चिट्ठी में उन्होंने सीआरपीएफ जवानों की अमानवीय और दयनीय स्थिति का जिक्र किया है। 23 नवंबर को लिखी गई इस चिट्ठी में सोलंकी ने भोजन, पानी, स्वच्छता, आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी को इंगित किया है। ‘द क्विंट’ में छपी एक रिपोर्ट इस चिट्ठी में लिखी गई शिकायत का जिक्र किया गया है।

सीआरपीएफ जवान ने लिखा ‘प्रशासन से कई बार अनुरोध करने के बावजूद जवानों के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। सिविल पुलिस कह रही है कि पेयजल केवल भुगतान के आधार पर प्रदान किया जा सकता है।’

सीआरपीएफ के जवानों को झारखंड में कुहुक्खाला में माध्यमिक विद्यालय में शिविर में रखा जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि को-एड स्कूल में 600 से अधिक छात्र, 280 लड़के और 320 लड़कियां हैं, लेकिन शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए केवल 2 टॉयलेट हैं। लेकिन 2 टॉयलेट जवानों के लिए कम हैं इस वजह से बांस के डंडों और काली पॉलीथीन से एक काम चलाऊ टॉयलेट बनाया गया है।

क्विंट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक जवानों को यहां पर पीने के पानी खरीदकर पीना पड़ रहा है। पत्र में सोलंकी ने बताया कि जवानों को प्रतिदिन 117 रुपए प्रति दिन दिए जाते हैं। जब सीनियर अधिकारियों से पानी के बारे में शिकायत की गई तो उन्होंने कहा कि पानी फूड इंग्रीडेंट में शामिल होता है इसलिए इसके लिए अतिरिक्त रकम नहीं दी जाएगी। रिपोर्ट के मुताबिक जवानों के सोने के लिए गद्दे, तकिया मुहैया नहीं करवाए जा रहे। 18×20 फीट साइज वाले क्लासरूम में 15 जवान रह रहे हैं।

रिपोर्ट में सीआरपीएफ के बयान की भी जानकारी दी गई है। सीआरपीएफ के एक प्रवक्ता ने चिट्ठी के बारे में कहा, ‘जवानों के अधिकतर मामले सुलझाएं जा चुके हैं। अन्य समस्याओं को भी सुलझाने के प्रयास जारी हैं।’

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