ताज़ा खबर
 

CJI नहीं हैं सुप्रीम कोर्ट- प्रशांत भूषण ने 142 पेज में भेजा दो पन्नों के नोटिस का जवाब

कार्यकर्ता व वकील भूषण ने वकील कामिनी जायसवाल के माध्यम से दायर 142 पृष्ठों वाले जवाबी हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों, लोकतंत्र में "असंतोष को रोकने" तथा अदालत की अवमानना पर पूर्व तथा मौजूदा न्यायाधीशों के भाषणों का भी जिक्र किया।

Author नई दिल्ली | August 4, 2020 8:46 AM
Supreme Court of Indiaवकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब दिया है। (पीटीआई)

वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में सोमवार (3 अगस्त, 2020) को कहा कि मत की अभिव्यक्ति से अदालत की अवमानना नहीं हो सकती भले ही वह ‘कुछ लोगों के लिए अरूचिकर या अस्वीकार्य” हो। उन्होंने ये भी कहा कि देश के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) की आलोचना करने का मतलब सुप्रीम कोर्ट की निंदा या उसकी गरिमा को कम करना नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को भूषण को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने न्यायपालिका के खिलाफ उनके दो कथित अपमानजनक ट्वीट को लेकर शुरू की गई आपराधिक अवमानना कार्यवाही पर पांच अगस्त को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने उनके बयानों को प्रथम दृष्टया न्याय प्रशासन की छवि खराब करने वाला बताया था। कार्यकर्ता व वकील भूषण ने वकील कामिनी जायसवाल के माध्यम से दायर 142 पृष्ठों वाले जवाबी हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों, लोकतंत्र में “असंतोष को रोकने” तथा अदालत की अवमानना पर पूर्व तथा मौजूदा न्यायाधीशों के भाषणों का भी जिक्र किया। इसके अलावा उन्होंने कुछ मामलों में न्यायिक कार्यवाही पर अपने विचारों का भी उल्लेख किया है। भूषण अपने दोनों ट्वीट पर भी कायम रहे।

Coronavirus in India Live Updates

उन्होंने दलील दी, ‘प्रतिवादी (भूषण) का कहना है कि उनके मत की अभिव्यक्ति, भले ही कुछ के लिए असहनीय या अरूचिकर हो, अदालत की अवमानना नहीं कर सकती है। यह बात सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों और ब्रिटेन, अमेरिका तथा कनाडा जैसे विदेशी न्यायालयों में कही गई है।’

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी जिक्र किया और कहा कि यह अधिकार उन सभी मूल्यों का अंतिम संरक्षक है जिन्हें संविधान पवित्र मानता है।

उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा स्थापित किसी संस्था पर सार्वजनिक हित में किसी नागरिक को ‘उचित मत’ व्यक्त करने से रोकना उचित प्रतिबंध नहीं है और यह उन बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन करता है जिन पर हमारा लोकतंत्र स्थापित है।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 लॉकडाउन में नौकरी छूटी तो बेटे का नाम स्कूल से कटवा दिया, गांव में भी नहीं मिल रहा काम; महानगरों से लौटे प्रवासी मजदूरों ने बयां किया दर्द
2 04 अगस्त का इतिहास: अभिनय, निर्देशन और गायन में परचम लहराने वाले हरदिल अजीज किशोर कुमार का आज ही के दिन हुआ था जन्म
3 अर्चना सोरेंग: जलवायु संकट से बचाने में गुतारेस की करेंगी मदद
ये पढ़ा क्या?
X