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‘हंसी के बादशाह’ नवजोत सिंह सिद्धू को पसंद नहीं था मज़ाक, बताई कहानी- जब मनिंदर सिंह पर फेंक दिया गर्म चाय का कप

सिद्धू ने कहा कि "वह कभी नहीं कहते हैं कि मुझमें त्रुटियां नहीं, मुझमें खामियां नहीं हैं, बुराइयां नहीं हैं, इंसान तो गलतियों का पुतला होता है। वह इसको स्वीकार करते है।"

Aap ki Adalat showहंसी के बादशाह और कांग्रेस पार्टी के नेता नवजोत सिंह सिद्धू। (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू अपने खास अंदाज में शेरो-शायरी करके बोलने के लिए जाने जाते हैं। जितना उनकी क्रिकेट प्रेमियों के बीच दीवानगी है, उससे कहीं ज्यादा उनके फैंस उनके बोलने के अंदाज के दीवाने हैं। चाहे वह आम सभाओं में हो, या राजनीतिक मीटिंग या फिर कामेडियन कपिल शर्मा के शो में हो। लेकिन ‘हंसी के बादशाह’ नवजोत सिंह सिद्धू को एक समय ऐसा भी था, जब उन्हें मजाक बिल्कुल पसंद नहीं था।

न्यूज चैनल इंडिया टीवी के खास शो आप की अदालत में सिद्धू ने बताया कि एक बार किसी बात पर गुस्सा होकर उन्होंने साथी क्रिकेटर मनिंदर सिंह पर गर्म चाय फेंक दी थी। हालांकि वह बच गए थे, लेकिन सिद्धू ने कहा कि वह स्थिति फिर आती तो वह फिर वही काम करते और उनके ऊपर चाय फेंक देते।

इंडिया टीवी के मालिक और शो के प्रजेंटर रजत शर्मा के साथ बातचीत में नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा कि “वह कभी नहीं कहते हैं कि मुझमें त्रुटियां नहीं, मुझमें खामियां नहीं हैं, बुराइयां नहीं हैं, इंसान तो गलतियों का पुतला होता है। वह इसको स्वीकार करते है।” उन्होंने अपने विशिष्ट स्टाइल में कहा “सोने में सुगंध नहीं, गन्ने में फूल नहीं होता, चंदन में फल नहीं होता, राजा कीर्तिजीवी नहीं होता, विद्वान के पास धन नहीं होता, किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं जमीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता।”

कहा कि “अगर मुझमें कोई त्रुटि है तो मैं समझता हूं कि मुझमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन एक बात तय है कि जिद्दी होना अगर एक तरफ बुरा है तो एक तरफ अच्छा है, क्योंकि जिद्दी होने से इच्छा शक्ति बढ़ती है। और मैं समझता हूं कि अगर आदमी अंगद के पैर की तरह अपना पैर जमा दे और किसी चीज को करने का ठान ले और अगर उसमें इच्छा शक्ति हो तो दुनिया को सांचे में ढाल सकता है।”

उन्होंने कहा कि “अरे मै तो कहता हूं कि दारू पीने वाला रात को ठेका ढूंढ लेता है तो इंसान में इच्छाशक्ति हो तो फिर वह अच्छे कार्य के लिए अगर किसी चीज को ठान ले फिर मैं समझता हं कि वह कर सकता है। वह असंभव नहीं।

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