एक क्रेडिट कार्ड यूजर को बड़ी राहत तब मिली, जब एक निजी बैंक की लापरवाही के कारण उसे 3.21 लाख रुपये का मुआवजा मिला। यह मामला तब सामने आया जब यूजर ने अपने अनुभव को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर साझा किया, जो तेजी से वायरल हो गया।
यूजर के अनुसार, उसने मई 2025 में अपने दो क्रेडिट कार्ड बंद कराने के लिए बैंक को ईमेल किया था। इन कार्डों के नाम थे कोटक मिंत्रा और कोटक मोजो प्लेटिनम। कार्ड बंद कराने की वजह यह थी कि बैंक ने उसकी क्रेडिट लिमिट 1 लाख रुपये से घटाकर सिर्फ 10,000 रुपये कर दी थी। यूजर ने कार्ड बंद करने के लिए ईमेल के जरिए अनुरोध किया और इसके बाद दो बार रिमाइंडर भी भेजे, लेकिन बैंक की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
लगभग एक साल बाद, अप्रैल 2026 में जब यूजर अपने खातों की जांच कर रहा था, तब उसे 1,180 रुपये का चार्ज दिखा। यह चार्ज वार्षिक शुल्क या फाइनल सेटलमेंट के नाम पर लिया गया था। जब उसने इस बारे में बैंक से शिकायत की, तो उसे बताया गया कि उसके कार्ड कभी बंद ही नहीं किए गए थे।
इसके बाद यूजर ने फिर से बैंक से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बार-बार प्रयास करने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उसने अपनी शिकायत बैंकिंग ओम्बड्समैन के पास दर्ज कराई। इसके बाद बैंक के नोडल अधिकारी ने उससे संपर्क किया।
नोडल अधिकारी ने यूजर से कहा कि गलती उसकी है, क्योंकि कार्ड बंद करने के लिए ईमेल मान्य नहीं होता और उसे फोन करके अनुरोध करना चाहिए था। हालांकि, यूजर का कहना था कि उसने लिखित में अनुरोध किया था और कई बार फॉलो-अप भी किया, लेकिन बैंक ने कोई कार्रवाई नहीं की।
जब मामला ठंडा पड़ता नजर आ रहा था, तभी अचानक यूजर को सूचना मिली कि उसके खाते में 3,21,000 रुपये का मुआवजा जमा कर दिया गया है। बाद में यूजर ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार, अगर क्रेडिट कार्ड बंद करने में देरी होती है, तो बैंक को हर दिन 500 रुपये का जुर्माना देना होता है।
यूजर ने 23 मई को कार्ड बंद करने का अनुरोध किया था, लेकिन बैंक ने इसे 18 अप्रैल को बंद किया। इस तरह कुल 321 दिनों की देरी हुई। चूंकि उसके दो कार्ड थे, इसलिए 500 रुपये प्रति दिन प्रति कार्ड के हिसाब से कुल 3,21,000 रुपये का मुआवजा बना। इसके अलावा, जो 1,180 रुपये का चार्ज लगाया गया था, वह भी वापस कर दिया गया।
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने यूजर की सराहना की। कई लोगों ने कहा कि सही प्रक्रिया अपनाने से उन्हें भी न्याय मिला है, जबकि कुछ ने अपने ऐसे ही अनुभव भी साझा किए, जहां उन्होंने बैंक की गलती के खिलाफ शिकायत की और बाद में समाधान मिला।
यह भी पढ़ें: RBI ने ई-मैंडेट नियमों में किया बदलाव, अब 15000 रुपये तक का लेनदेन आसान; जानें क्या है नया नियम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेगुलर ई-मैंडेट ट्रांजैक्शन के लिए गाइडलाइंस में बदलाव किया है। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, हर ट्रांजैक्शन पर 15,000 रुपये तक के पेमेंट बिना किसी एडिशनल फैक्टर ऑफ ऑथेंटिकेशन (AFA) के किए जा सकेंगे। इस लिमिट से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए AFA की जरूरत बनी रहेगी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
