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CPM से छिन सकता है संसद भवन में मिला दफ्तर और राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा, राज्य सभा में नहीं दिखेंगे दिग्गज सीताराम येचुरी

मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी को लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। सीपीएम का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा और उसका कार्यालय छिन सकता है।

Author नई दिल्ली | June 13, 2019 9:17 AM
पार्टी ने तीसरी बार सीताराम येचुरी को राज्यसभा भेजने से इनकार कर दिया है। (फाइल फोटो)

कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) को लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। पार्टी के राष्ट्रीय दर्जे पर भी सवाल खड़े हो गये हैं। बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के कारण पार्टी को अपना राष्ट्रीय दर्जा खोना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त पार्टी का संसद भवन का कमरा भी छिन सकता है।

सूत्रों के अनुसार पार्टी के सीटों में कमी के कारण सीपीएम का संसद भवन स्थित कमरा नंबर 135 पार्टी से वापस लिया जा सकता है। यह कमरा कई दशक से सीपीएम के पास था। वहीं पार्टी के महासचिव व दिग्गज नेता सीताराम येचुरी भी अब संसद में नहीं दिखेंगे। पार्टी पहले ही उन्हें तीसरा कार्यकाल देने से इनकार कर चुकी है।

पार्टी के संविधान के अनुसार कोई भी पार्टी का नेता दो बार से अधिक ऊपरी सदन का सदस्य निर्वाचित नहीं हो सकता है। सीपीएम ने इस बार लोकसभा में सिर्फ 3 सीटें ही जीती हैं। पार्टी के राज्य सभा में वर्तमान में 5 सदस्य हैं। साल 2014 में पार्टी ने 9 सीटें जीती थी। उस समय ही पार्टी से कमरा छिनने का खतरा मंडरा रहा था लेकिन सीताराम येचुरी के पार्टी नेता रहने के कारण ऐसा नहीं हो सका था। इस बार पार्टी के पास सीताराम येचुरी के कद का कोई नेता भी नहीं है।

साल 2019 में सबसे खराब प्रदर्शनः इससे पहले इस साल हुए लोकसभा चुनाव में पार्टी ने सबसे खराब प्रदर्शन किया था। कभी पार्टी का अजेय गढ़ माने जाने वाले पश्चिम बंगाल में सीपीएम इस बार एक भी सीट जीतने में नाकाम रही। वाम दलों को इस बार पश्चिम बंगाल में महज में 6.3 फीसदी ही वोट मिले थे। इससे पहले पार्टी को 2014 में 22.96 फीसदी वोट मिले थे।

2009 से प्रदर्शन में शुरू हुई गिरावटः साल 2009 से वाम दलों को प्रदर्शन में गिरावट आने लगी थी। साल 2004 में वाम दलों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 59 सीटों हासिल की थी। इस साल पार्टी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत बन कर उभरी थी। पार्टी ने अपने दमदार प्रदर्शन के बल पर ही संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए-1) सरकार में अहम भूमिका निभाई थी।

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