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कश्मीर मुद्दे पर नरेन्द्र मोदी की बोली बोल रहे हैं आर्मी चीफ बिपिन रावत: माकपा

माकपा ने कहा, "नागरिकों के खिलाफ बलपूर्वक कार्रवाई के सरकार के फैसले का अंध तरीके से अनुपालन करने से न केवल कश्मीर के लोगों, बल्कि खुद सेना को भी अपूरणीय क्षति का सामना करना पड़ेगा।"

Author June 1, 2017 22:08 pm
माकपा ने आर्मी चीफ पर सेना की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का आरोप लगाया है।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने कहा है कि भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत जम्मू एवं कश्मीर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों से सुर में सुर मिला रहे हैं और मोदी सरकार मुद्दे से जिस तरीके से निपट रही है, वह गलत है। माकपा की पत्रिका ‘ पीपुल्स डेमोक्रेसी’ में ‘डैमेजिंद द आर्मी इमेज’ के नाम से संपादकीय में एक कश्मीरी युवक को जीप से बांधकर मानव ढाल की तरह इस्तेमाल करने के सेना के मेजर के फैसले को लेकर जनरल बिपिन रावत की खिंचाई की गई है।जनरल रावत ने हाल में दिए गए एक साक्षात्कार में मेजर नितिन गोगोई की कार्रवाई का बचाव किया और उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया, जबकि इस मामले की जांच चल रही है। संपादकीय के मुताबिक, “सेना प्रमुख ने इस कार्रवाई की सराहना कर सेना के उच्च पेशेवर मानकों को नीचा दिखाया है।”

मकपा के मुताबिक, “कुछ पूर्व जनरलों ने नागरिक को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल करने की कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने साफ इशारा किया है कि सेना अपने लोगों से इस तरह का व्यवहार नहीं कर सकती।”संपादकीय में कहा गया है, “रावत मोदी सरकार के दृष्टिकोण को दर्शा रहे हैं, जिसका मकसद कश्मीर के लोगों को दबाना है, जो अपने राजनीतिक विरोध की आवाज बुलंद कर रहे हैं।” माकपा ने कहा, “नागरिकों के खिलाफ बलपूर्वक कार्रवाई के सरकार के फैसले का अंध तरीके से अनुपालन करने से न केवल कश्मीर के लोगों, बल्कि खुद सेना को भी अपूरणीय क्षति का सामना करना पड़ेगा।”

बता दें कि जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजों से निपटने के लिए सैन्य ऑफिसर मेजर गोगोई ने एक शख्स को सेना के जीप के सामने बांध दिया था। दरअसल जम्मू कश्मीर में एक जगह पत्थरबाजी हो रही थी, सेना की ओर से कई बार समझाने के बाद भी वहां के लोगों ने बात नहीं मानी और पत्थबाजी जारी रखी। इस हालात से निपटने के लिए मेजर गोगोई ने एक स्थानीय शख्स को जीप के सामने बांध दिया था। उनके इस कदम के बाद पत्थरबाजों ने पत्थर फेंकना बंद कर दिया था। हालांकि मेजर गोगोई के इस कदम की कई लोगों ने आलोचना की थी।

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