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आरएसएस की नीतियां विभाजनकारी: बृंदा करात

डर और नफरत की राजनीति को बढ़ाया जा रहा है। इसका मुकाबला करने के लिए मेहनतकश लोगों को इकठ्ठा होना होगा।
Author नई दिल्ली | July 5, 2017 03:44 am
माकपा पोलित ब्यूरो की सदस्य वृंदा करात।

सीपीआइ (एम) दिल्ली व हरियाणा राज्य कमेटी की तरफ से मुस्लिम अल्पसंख्यकों और दलितों पर बढ़ते हमलों व मीट व्यापार पर प्रतिबंध के खिलाफ मंगलवार को जंतर-मंतर पर धरना आयोजित किया गया। इस धरने में दिल्ली और हरियाणा समेत गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर के लोगों ने हिस्सा लिया। धरने को सीपीआइ (एम) पोलित ब्यूरो की सदस्य बृंदा करात, महासचिव अखिल भारतीय किसान सभा हन्नान मौला, सचिव दिल्ली राज्य कमेटी केएम तिवारी, सचिव हरियाणा राज्य कमेटी सुरेंदर मलिक, हरियाणा किसान सभा के नेता इंद्रजीत सिंह, जनवादी महिला समिति की नेता साहिबा फारुकी ने संबोधित किया। सभा की अध्यक्षता दलित शोषण मुक्ति मंच के नेता नत्थू प्रसाद ने की।

धरने को संबोधित करते हुए बृंदा करात ने वर्तमान सरकार में आरएसएस की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि देश के सभी जनतांत्रिक संस्थानों में आरएसएस के सदस्यों को बिठाकर विभाजनकारी नीतियों के जरिए बांटने का काम किया जा रहा है। एक तरफ दलित के नाम पर आरएसएस के सदस्य को राष्ट्रपति बनाने का काम यह सरकार कर रही है और दूसरी तरफ जातिवादी ताकतों को प्रोत्साहित कर दलितों पर हमला करवाया जा रहा है। अखलाक से लेकर पेहलु खान और 16 साल के बच्चे जुनैद की हत्या के जरिए समाज को सांप्रदायिकरण और अल्पसंख्यकों के जीवन यापन पर हमले किए जा रहे हैं। डर और नफरत की राजनीति को बढ़ाया जा रहा है। इसका मुकाबला करने के लिए मेहनतकश लोगों को इकठ्ठा होना होगा।

इस धरने में गाजियाबाद व गौतमबुद्ध नगर के छोटे-छोटे खुदरा मीट, मछली, अंडा व्यापारी शामिल हुए। भारत सरकार द्वारा पशु क्रूरता अधिनियम में अधिसूचना जारी करके पशु वध पर रोक लगा दी है। इसके कारण उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में लाखों लोगों का रोजगार छिन गया है। इसके साथ ही प्रदेश भर में किसानों के सामने भयंकर समस्या खड़ी हो गई है। अधिसूचना का बहाना बनाकर गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में जिला व पुलिस प्रशासन द्वारा छोटे-छोटे काम करने वाले कारोबारियों, होटलों, ढाबों और सड़क के किनारे रेहडी-पटरी लगाकर पेट पालने वाले लोगों को हटा दिया या बंद करा दिया गया है।

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