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गोहत्या से आता है भूकंप! कामधेनु आयोग की क्लास में बताई जा रही आइंस्टीन पेन वेव्स की थ्योरी

राष्ट्रीय कामधेनु आयोग ने गाय के महत्व को रेखांकित करते हुए एक राष्ट्रीयस्तर की ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है।

Translated By subodh gargya नई दिल्ली | Updated: January 7, 2021 4:02 PM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर किया गया है।

साल 2019-20 के अंतरिम बजट में राष्ट्रीय कामधेनु आयोग बनाए जाने की बात केंद्र सरकार ने कही थी। जिसका उद्देश्य “आधुनिक वैज्ञानिक आधार पर ” पशुपालन को बढ़ावा देना था। अब आयोग ने गाय के महत्व को रेखांकित करते हुए एक राष्ट्रीयस्तर की ऑनलाइन परीक्षा आयोजित करने का फैसला किया है। जहां प्रतिभागियों का मूल्यांकन इस बात पर किया जाएगा कि उनको भारतीय गाय के बारे में कितनी जानकारी है। परीक्षा में भारतीय नस्ल की गायों की विदेशी नस्ल की गायों से श्रेष्ठता, गोबर के लाभ, गौकशी और भूकंप का संबंध (आइंस्टीन पेन वेव) , कैसे भारत एक बीफ निर्यातक देश बना आदि, से जुड़े सवाल पूछे जाएंगे।

मंगलवार को आयोग ने परीक्षा से जुड़ा एक रेफ्रेंस मटीरियिल वेबसाइट पर अपलोड किया। परीक्षा का नाम कामधेनु गौ विज्ञान प्रचार प्रसार परीक्षा रखा गया है जो कि 25 फरवरी को ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। वेबसाइट के मुताबिक इस मटीरियल से उम्मीदवारों को काफी मदद मिलेगी। कामधेनु गौ विज्ञान को लेकर उम्मीदवार जागरूक होंगे।

मटीरियल में गाय को दैवीय बताया गया है। ऋगवेद से लेकर बाइबल तक का जिक्र किया गया है। रेफ्रेंस मटीरियल में कहा गया है, “ गाय का चेहरा मासूमियत का अनुभव कराता है — उसकी आँखें शांति और कान बुद्धिमत्ता को दर्शाती हैं। गाय का दूध अमृत है।” एक भाग में बताया गया है कि कैसे भारतीय “देसी” गाय “विदेशी” जर्सी गाय से बेहतर है। भारतीय गायों के विपरीत, जिनसे कई लाभ होते हैं, विदेशी नस्ल की गाय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। भारतीय गाय जहां दयालु होती है और स्वच्छ रहती है तो वहीं विदेशी गाय कोई भावना नहीं दिखाती है। मटीरियल में “सभी देसी गायों की नस्लों के बारे में बताया गया है। साथ ही गौशाला क्या है और इसके लिए “पांच स्वतंत्रता” का लक्ष्य क्या होना चाहिए ये भी बताया गया है।

मटीरियल में पंचगव्य और उसकी उपयोगिता के बारे में बताया गया है। जिसमें गोबर और गौमूत्र के गुणों और उनके औषधीय महत्व को विस्तार से समझाया गया है। मटीरियल में बताया गया है कि कैसे इससे सभी खून से जुड़ी बीमारियां और कुष्ठ रोग दूर होते हैं। ये एंटीसेप्टिक, त्वचा के लिए टॉनिक और दांतों के लिए पॉलिश के रूप में काम करता है। इसमें रेडियोएक्टिव और एंटी-थर्मल गुण भी हैं। मटीरियल में गौमूत्र को अमृत कहा गया है और गंगाजल से तुलना की गई है।

मटीरियल में कहा गया है कि 1984 में, भोपाल में गैस त्रासदी के कारण 20,000 से अधिक लोग मारे गए। हालांकि गोबर से लिपी दीवारों वाले घरों में रहने वाले लोग इससे प्रभावित नहीं हुए। आज भी, भारत और रूस में परमाणु ऊर्जा केंद्र गोबर का उपयोग करते हैं।

मटीरियिल में कहा गया है कि गोहत्या और भूकंप का एक दूसरे से संबंध है। तर्क दिया गया है कि वैज्ञानिक एमएम बजाज, इब्राहिम और विजयराज सिंह ने ये सिद्धांत दिया है कि पशु वध और प्राकृतिक आपदाओं का परस्पर संबंध होता है। मरते हुए पशु आइंस्टीन पेन वेव छोड़ते हैं।

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