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तेज हो रही है इन कानूनों की मांग, लागू हुए तो बढ़ जाएंगी भारतवासियों की मुश्किलें

केन्द्र सरकार गोकशी को गैर जमानती अपराध बना सकती है। हैदराबाद हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सरकार को कहा है कि प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट, 1960 और आईपीसी की धारा 429 में संशोधन किया जाए और गोकशी को गैर जमानती अपराध करार दिया जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री राजनाथ सिंह। (File Photo: PTI)

भारत में बदलते सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों में कुछ नये कानूनों की मांग हो रही है। केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को अपने तीन साल के कार्यकाल में नयी चुनौतियों और विपक्ष के अलग किस्म के हमले का सामना करना पड़ा रहा है। इन हमलों में EVM की विश्वसनीयता पर सवाल, गौरक्षा समेत कई मुद्दे शामिल है। केन्द्र सरकार को विधायिका और न्यायपालिका से सलाह मिली है कि नयी चुनौतियों को देखते हुए नये कानून भी बनाए जाएं। लेकिन अगर ये कानून अमल में आ जाएं तो आम लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती है। नरेन्द्र मोदी सरकार जिन मुद्दों पर कानून बनाना चाहती है वो मुद्दे पिछले कुछ दिनों से काफी चर्चा में रहे हैं।

गोकशी
अंग्रेजी अखबार हफिंग्टन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक केन्द्र गोकशी को गैर जमानती अपराध बना सकती है। हैदराबाद हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सरकार को कहा है कि प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट, 1960 और आईपीसी की धारा 429 में संशोधन किया जाए और गोकशी को गैर जमानती अपराध करार दिया जाए। इससे पहले केन्द्र अधिसूचना जारी कर वध के लिए पशुओं की खरीद बिक्री पर रोक लगा चुकी है।

देशद्रोह
विरोध और सरकार की आलोचना लोकतंत्र की मूल भावना है। लेकिन कुछ ही दिन पहले केन्द्रीय मंत्री वेंकैया नायडु ने संकेत दिया था कि आजादी के नारे को भी ‘देशद्रोह’ के दायरे में लाया जा सकता है। बता दें कि लॉ कमीशन देशद्रोह से जुड़े कानूनों की समीक्षा कर रहा है। यहां ये बताना जरूरी है कि जेएनयू में कथित रुप से देश विरोधी नारे लगाने पर पूरे देश में बवाल हुआ था।

गंगा प्रदूषण
आने वाले दिनों में गंगा को प्रदूषित करना एक गंभीर अपराध हो सकता है। केन्द्र द्वारा तैयार द नेशनल रिवर गंगा बिल 2017 गंगा के प्रदूषण पर कड़ी सजा का प्रावधान करता है। हालांकि केन्द्र की मंशा तो गंगा की सफाई है, लेकिन उसका तरीका अव्यवहारिक लगता है। गंगा को प्रदूषित करने पर होने वाला अपराध डकैती, धोखा जैसा होगा, यही नही गंगा प्रदूषण का अपराध साबित होने पर 100 करोड़ रुपये तक का जुर्माना भी हो सकता है।

चुनाव आयोग की अवमानना
ईवीएम की विश्वसनीयता पर उठे सवाल से नाराज चुनाव आयोग अब ऐसे लोगों को दंडित करने की सोच रहा है, और ऐसे लोगों पर अवमानना का मुकदमा चलाने की सोच रहा है। कानून मंत्रालय को भेजे एक पत्र में चुनाव आयोग ने मांग की है कि कंटेम्पट ऑफ कोर्ट एक्ट 1971 में संशोधन किया जाए और आयोग के अधिकार और निष्ठा पर गलत सवाल उठाने वालों को दंडित करने का अधिकार उसे दिया जाए। बता दें कि हाल ही में आम आदमी पार्टी ने EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया था और कहा था ईवीएम से छेड़छाड़ से संभव है।

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