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covid19: ये हैं नए स्ट्रेन के लक्षण, कम सुनाई देना भी हो सकता है संकेत

लक्षणों का मतलब संक्रमण नहीं होता और संक्रमण हो भी जाए तो उसका मतलब मौत नहीं होता। शरीर में कोरोना के प्रवेश के बाद बीमारी के लक्षणों के उभरने में दो से 14 दिन का समय लगता है। वैसे ज्यादातर लोगों में लक्षण 5 से 8 दिन में दिखने लगते हैं।

देश में रोजाना लाखों की संख्या में लोग पॉज़िटिव पाये जा रहे हैं। (express file)

कोरोना संक्रमण के पुराने लक्षण यानी बुखार, सूखी खांसी आदि खत्म नहीं हुए हैं लेकिन वायरस का नया स्ट्रेन यानी अवतार नए सिम्टम भी दे रहा है। लेकिन नए या पुराने लक्षणों का मतलब यह नहीं कि आपको संक्रमण हो ही गया है। संक्रमण की पुष्टि तो सिर्फ जांच से ही होती है। बहरहाल जो ऩए सिम्टम्स सामने आ रहे हैं उनकी जानकारी जरूरी है। इनमें प्रमुख इस प्रकार हैः

आहारनाल में संक्रमणः आहारनाल का मायने होता है मुखगुहा से बड़ी आंत तक का हिस्सा। कोविड के नए मरीजों में यहां का संक्रमण देखा जा रहा है। पेट का संक्रमण भोजन से शक्ति पाने की शारीरिक क्षमता गिरती है जो अंततः शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली को कमजोर कर देती है। इस संक्रमण के कारण डायरिया, उबकाई या उलटी आना, पेट में दर्द और भूख न लगने जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

कम सुनाई पड़नाः पहले खुशबू और स्वाद जाता था। अबकी बार नया वाइरस कुछ लोगों में श्रवण शक्ति घटा रहा है। सुनने में दिक्कत संक्रमण के पहले हफ्ते ही आ जाती है। कुछ लोगों को हल्की दिक्कत होती है तो कुछ को ज्यादा। कुछ के कान में घंटियां सी बजने लगती हैं।

कंजक्टिवाइटिस और लाल या गुलाबी आंखेः कंजक्टवाइटिस में आंखों में तेज जलन, आंसू बहना और कीचड़ आदि दिक्कतें होती हैं। दरअसल, मास्क का इतना प्रचार हुआ है कि लोग आंख की चिंता कर ही नहीं रहे, जबकि कोरोना आंख के जरिए भी शरीर में प्रवेश कर सकता है। कई बार तो व्यक्ति हाथ में संक्रमण होता है जो आंख और चेहरा छूने के कारण आंख तक चला जाता है। इसी लिए संक्रमण होने पर आंख का हिस्सा कंजक्टिवा पर असर पड़ता है।

लार न होने से मुंह सूखनाः कोरोना मुंह में मौजूद लार ग्रंथियों को जब इनफेक्ट करता है तो पाचन प्रणाली का पहला रस लार बनना कम हो जाता है और मुंह सूखा-सूखा रहने लगता है। यह स्थिति खाना पचाने में तो असर डालती ही है मुंह के अंदर छाले आदि का कारण भी बनती है।

स्किन रैशेज़ यानी दाने आदिः कुछ कोरोना संक्रमित लोगों के हाथों-पावों पर दाने आदि देखे गए हैं। मेडिकल भाषा में इन्हें एक्रल रैशेज़ कहते हैं और ये वाइरस के प्रति शरीर की प्रतिरक्षण प्रणाली की जंग का नतीजा होते हैं।

थकान और कमजोरीः यह लक्षण पहले भी था लेकिन इस बार नई लहर में थकान और कमजोरी इस स्तर की हो रही है कि कुछ लोगों को चलते भी नहीं बन रहा। कुछ लोग तो थोड़ा सा भी चलना हो तो बच्चों की तरह बैठकर घिसटते हैं। सरकारी अस्पतालों से इस तरह के वीडियो भी वाइरल हुए हैं।

जैसा कि ऊपर बतया है किसी भी स्थिति में पैनिक नहीं करना चाहिए। लक्षणों का मतलब संक्रमण नहीं होता और संक्रमण हो भी जाए तो उसका मतलब मौत नहीं होता। शरीर में कोरोना के प्रवेश के बाद बीमारी के लक्षणों के उभरने में दो से 14 दिन का समय लगता है। वैसे ज्यादातर लोगों में लक्षण 5 से 8 दिन में दिखने लगते हैं। पर यह भी संभव है कि लक्षण कभी दिखाई ही न दें और कोरोना किसी व्यक्ति के शरीर से यूं ही होकर गुजर जाए। ऐसे आदमी खुद स्वस्थ रहते हैं लेकिन अगर उन्हें अपने पॉजिटिव होने की जानकारी नहीं है तो वे दूसरे लोगों को संक्रमित करते जाते हैं।

ऊपर लिख लक्षणों के अलावा पुराने लक्षण भी मरीजों में पाए जाते हैं। अब भी अनेक लोग बुखार, जाड़ा लगने, मांसपेशियों में दर्द, सरदर्द, गले में खराश, सूखी खांसी, डायरिया, उबकाई या उल्टी आना, नाक बहने या नथुने बंद होने, स्वाद/महक महसूस न होने की शिकायतें करते हैं।

लेकिन ये लक्षण भी संपूर्ण नहीं हैं। और, किसी मरीज में सारे के सारे लक्षण होते भी नहीं। और, यह भी नहीं कि किसी एक या अधिक लक्षणों का आशय कोरोना होना ही है। कोरोना की पुष्टि तो आरटी-पीसीआर टेस्ट से ही होती है। लेकिन मौजूदा वक्त में वाइरस का स्ट्रेन ऐसा भी है जो सामान्य जांच में पकड़ में नहीं आता। इसके लिए फेफड़ों की जांच करनी पड़ती है। किसी तरह से वहां का द्रव को लैब में देखा जाता है।

ऊपर लिखे लक्षणों में जो लक्षण सर्वाधिक, 64.4 प्रतिशत मरीजों में मिलता है वह है स्वाद या महक का महसूस न होता। इसके बाद सूखी खांसी का नंबर आता है जो 60.4 प्रतिशत में मिलती है। बुखार 55.5 प्रतिशत मरीजों में, मसल पेन 44.6 में सरदर्द 42.6 में और सांस लेने में दिक्कत 41.2 प्रतिशत मरीजों में देखने को मिलती रही है। डायरिया का लक्षण नया है और इसके आंकड़े अभी नहीं जुटाए जा सके हैं।

सिर्फ 20 प्रतिशत यानी पांच मरीजो में एक ही गंभीर रूप से बीमार होता है। बाकी सब घर में ही सामान्य दवा-दारू से ठीक हो जाते हैं। यहां यह जानना आवश्यक है कि मरीज को किस हालत में गंभीर माना जाए कि उसे अस्पताल की जरूरत है। सावधानी के तौर पर कोरोना की पुष्टि के बाद मरीज के पास ऑक्सीमीटर रहना ही चाहिए जिससे थोड़ी-थोड़ी देर में खून में ऑक्सीजन का स्तर पता होता रहे। 95 से नीचे का ऑक्सीलेवल खराब माना जाता है। हालांकि एम्स के हेड डॉ गुलेरिया ने कहा है कि 92 तक पैनिक करने और आक्सीजन मांगने की जरूरत नहीं क्योंकि अगर 92-93 वालों पर आक्सीजन नष्ट कर दी जाएगी तो 80-90 वालों को कैसे बचाया जा सकेगा।

आक्सीजन लेवल और निम्न बातें तय करती हैं कि मरीज की हालत अच्छी नहीं है और उन्हें अस्पताल चाहिए। जब मरीज को सांस लेने में दिक्कत हो रही हो। जब छाती में लगातार दर्द या दबाव महसूस हो रहा हो। जब मरीज कन्फ्यूज्ड, भौंचक्का सा नजर आए। उसको सो कर उठने में दिक्कत हो। उसकी आंखें या चेहरा सफेद पड़ रहा हो।

ये सब इमरजेंसी सिचुएशन हैं जब महीज को तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।

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