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कोरोना: सरकार को कोसने से मरे वापस नहीं आएंगे- गुजरात HC, पहले अहमदाबाद अस्‍पताल को कहा था ‘कालकोठरी’

कोर्ट ने इससे पहले अहमदाबाद के एक सिविल अस्पताल को कालकोठरी करार दिया था, जिसके बाद इस मामले ने खूब तूल पकड़ी थी।

COVID19, Coronavirus, Lockdown, Ahmedabad, Civil Hospital, Government, Dead, Gujarat HC, Gujarat, State News, Hindi Newsकोरोना, लॉकडाउन के बीच एक अस्पताल में पीपीई किट पहनकर मरीज देखने जाता डॉक्टर। (फोटोः पीटीआई)

कोरोना वायरस संकट और लॉकडाउन के बीच गुजरात हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकार को कोसने भर से मरे हुए लोग वापस लौटकर नहीं आ जाएंगे। दरअसल, रविवार को सूबे में मुख्यमंत्री विजय रूपाणी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने अहमदाबाद सिविल अस्पताल में 351 मौत के मामलों के विश्लेषण के आधार पर कोर्ट को बताया कि लगभग 83 फीसदी कोरोना के मरीज अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में मर गए, जो कि अन्य गंभीर बीमारियों (Severe Comorbidities) से जूझ रहे थे। इसी पर कोर्ट की टिप्पणी आई कि कोरोना संकट राजनीतिक नहीं बल्कि मनुष्य जाति से जुड़ा हुआ है। सरकार को कोस भर लेने से न तो लोग जादू की तरह ठीक हो जाएंगे और न ही मरे हुए लोग वापस जिंदा हो जाएंगे।

राज्य सरकार ने गुजरात उच्च न्यायालय को हाल ही में दिये एक जवाब में कहा कि यहां बीजे मेडिकल कॉलेज के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा सिविल अस्पताल में कोविड-19 से मौत के मामलों के किये गये विश्लेषण के अनुसार 351 रोगियों में से 83.24 प्रतिशत को अन्य गंभीर बीमारियां थीं। सरकार के मुताबिक, ये रोगी मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, थायरॉइड, किडनी संबंधी गंभीर रोग, फेफड़े के रोग, टीबी, यकृत के रोग, मानसिक रोग, कैंसर, पार्किंसन आदि गंभीर रोगों से ग्रस्त थे।

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उच्च न्यायालय ने कहा था, ‘‘यह बात बहुत निराशाजनक है कि सिविल अस्पताल में चार दिन तक या इससे अधिक उपचार के बाद रोगियों की मौत हो रही है, जो गहन देखभाल में पूरी तरह कमी को दर्शाता है।’’ सरकार ने जानेमाने संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ अतुल पटेल की एक रिपोर्ट का उल्लेख किया, जिन्होंने कहा है कि गंभीर रोगियों में एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) एक बड़ी समस्या है, जो उनकी सांस लेने में कठिनाई शुरू होते ही सामने आती है।

गुजरात उच्च न्यायालय ने कोरोना वायरस महामारी से संबंधित स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका पर अपने आदेश में सरकार को निर्देश दिया था कि विभिन्न श्रेणियों के रोगियों के लिए निर्दिष्ट सभी जरूरी चिकित्सा प्रोटोकॉलों का कड़ाई से पालन किया जाए ताकि किसी तरह की लापरवाही से किसी की जान नहीं जाए। अदालत ने सरकार के इस जवाब पर संतोष जताया कि सिविल अस्पताल में गंभीर रोगियों के लिए 47 नये वेंटिलेटर लाये गये हैं और चिकित्सा अधिकारियों की संख्या बढ़ा दी गयी है।

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बता दें कि कोर्ट ने इससे पहले अहमदाबाद के एक सिविल अस्पताल को कालकोठरी करार दिया था, जिसके बाद इस मामले ने खूब तूल पकड़ी थी, जबकि अहमदाबाद के अस्पतालों में अब तक कोविड-19 से 789 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अकेले सिविल अस्पताल में 415 मौत के मामले आए हैं। (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)

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