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आंख खोलने वाले आंकड़े: स्मार्ट सिटी मिशन में सिर्फ 1% स्वास्थ्य सेवाओं के लिए, 100 करोड़ की 491 परियोजनाएं, सिर्फ 3 हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की

दिल्ली ने स्वास्थ्य संबंधी परियोजनाओं पर सबसे ज्यादा खर्च किया है। उसने डिजिटल रिकॉर्ड और वर्चुअल मेडिकल सेवाओं जैसे हेल्थकेयर सिस्टम निर्माण पर 34.75 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। सूरत ने जल आपूर्ति प्रबंधन, ठाणे ने परिवहन और चेन्नई में बिजली पर सबसे ज्यादा खर्च किया है।

Author , Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: May 25, 2020 12:04 PM
कोरोना टेस्ट करता एक स्वास्थ्य कर्मी। फोटो: प्रशांत नादकर

कोविड-19 महामारी का प्रकोप सारी दुनिया पर है। भारत में भी कोरोनावायरस से संक्रमित लोगों का आंकड़ा एक लाख 38 हजार को पार कर चुका है। शहरों के कोविड-19 अस्पताल कोरोनावायरस के संक्रमण फैलने पर लगाम लगाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हालांकि, सरकार स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी सेवाओं को लेकर कितनी सजग हैं, इसका अंदाजा उस आंकड़े से पता चलता है, जो देश के 100 स्मार्ट सिटियों में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित परियोजनाओं को लेकर है।

स्मार्ट सिटी मिशन के तहत सार्वजनिक रूप से उपलब्ध परियोजनाओं की जांच से पता चलता है कि 5,861 परियोजनाओं में से सिर्फ 69 ही स्वास्थ्य सुविधाओं और क्षमता निर्माण के लिए हैं। मतलब सरकार ने 2015 के बाद से जितनी परियोजनाएं चुनीं उनमें से करीब एक फीसदी ही हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित हैं।

देश में 100 स्मार्ट सिटी बनाए जा रहे हैं। उनमें से हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ीं परियोजनाएं सिर्फ 55 में ही हैं। उन 69 परियोजनाओं पर सरकार ने 2112.06 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान रखा है। जबकि स्मार्ट सिटी मिशन के लिए सरकार ने 205,018 करोड़ रुपए निवेश किए हैं। इसी आंकड़े को यदि प्रतिशत में समझें तो यह केंद्र और राज्यों के कुल स्वास्थ्य व्यय से भी कम है। यह 2019-20 में जीडीपी का 1.6 प्रतिशत है।

मिशन के तहत स्वीकृत 491 परियोजनाएं 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की थीं। इनमें से सिर्फ तीन इरोड में (370 करोड़ रुपये), बेलागवी (350 करोड़ रुपये) और तुमकुरु (350 करोड़ रुपये) की परियोजनाएं स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर थीं। सरकार ने 2015 में स्मार्ट सिटी मिशन (पांच साल की अवधि के लिए) को लांच किया था। इसमें चार राउंड में 100 शहरों का चयन किया गया था। सरकार का मानना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा किसी भी स्मार्ट सिटी के 10 प्रमुख बुनियादी ढांचे में से एक हैं, लेकिन खर्च करने के मामले में, उसे यह बहुत कम प्राथमिकता वाले लगते हैं।

79 प्रतिशत कोविड-19 मामले होने के कारण सरकार ने 30 नगरपालिका क्षेत्रों को चिन्हित किया है। इनमें से 17 स्मार्ट सिटी के हैं। इन17 स्मार्ट सिटी में से सिर्फ 7 को स्वास्थ्य संबंधित परियोजना में मिशन के धन इस्तेमाल करने के लिए चुना गया है। इन 17 शहरों में स्वीकृत कुल 674 परियोजनाओं में से स्वास्थ्य पर केवल 11 परियोजनाएं थीं। भोपाल, ठाणे, सूरत, चेन्नई और जयपुर ने अपनी स्मार्ट सिटी योजनाओं में स्वास्थ्य संबंधी किसी भी परियोजना को सूचीबद्ध नहीं किया है, जबकि यहां देश के कुछ सबसे बड़े हॉटस्पॉट्स हैं।

स्मार्ट सिटी में शामिल 17 हॉटस्पॉटों में से, दिल्ली ने स्वास्थ्य संबंधी परियोजनाओं पर सबसे ज्यादा खर्च किया है। उसने डिजिटल रिकॉर्ड और वर्चुअल मेडिकल सेवाओं जैसे हेल्थकेयर सिस्टम निर्माण पर 34.75 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। सूरत में जल आपूर्ति प्रबंधन, ठाणे ने परिवहन और चेन्नई में बिजली पर सबसे ज्यादा खर्च किया है।

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