साल 2019 में चीन के वुहान से फैले कोरोनावायरस ने 2020 तक पूरी दुनिया में अपने पांव पसार लिए थे। भारत में जहां कोविड वैक्सीन ने इस कठिन समय में लाखों लोगों की जान बचाई वहीं कई लोगों को इसके साइड इफेक्ट भी हुए। इस सबके बीच साल 2021 में जब पूरे भारत में कोविड-19 के मामले तेजी से बढ़ रहे थे कई परिवारों ने अपने परिजनों को खोया। ऐसे ही दो परिवारों ने कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभावों के कारण अपनी बेटियों को खोने के बाद सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। इन दो परिवारों के केस के पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 मार्च को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केंद्र को कोविड-19 टीकाकरण के बाद गंभीर प्रतिकूल प्रभावों का सामना करने वाले लोगों के लिए बिना किसी गलती के मुआवजे की नीति तैयार करने का निर्देश दिया।

कोर्ट के मंगलवार के आदेश से यह सुनिश्चित हो गया कि कोविड-19 टीकाकरण के चलते अपूरणीय क्षति का सामना करने वाले लोग लापरवाही या दायित्व साबित करने की आवश्यकता के बिना मुआवजे का दावा कर सकते हैं।

दो परिवार जिन्होंने कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभाव के कारण अपनी बेटियों को खोया

दो बच्चों के पिता जी वेणुगोपालन की 20 वर्षीय बेटी करुणा को 8 जून 2021 को कोविड-शील्ड वैक्सीन लगाई गई थी, उसे 10 दिनों के भीतर गंभीर दुष्प्रभाव होने लगे जिनमें सांस की नली में सूजन और पैरों में तेज दर्द शामिल था। केरल के मूल निवासी वेणुगोपालन ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “जब हम उसे 20 जून को अस्पताल ले गए तो डॉक्टरों ने कहा कि उसकी हालत का टीकाकरण से कोई संबंध नहीं है क्योंकि उस समय टीके को सुरक्षित माना जाता था। पांच दिनों के भीतर, उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन 10 जुलाई 2021 को उसकी मौत हो गई।

हैदराबाद में दो बच्चों की मां रचना गंगू को पहले भी ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ा था। गंगू की 18 वर्षीय बेटी रिथाइका श्री ओमत्री ने 29 मई 2021 को कोविड-शील्ड का टीका लगवाया था, जिसके पांच दिन बाद ही उसे गंभीर दुष्प्रभाव होने लगे। गंगू ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “उसे तेज सिरदर्द, हथेलियों पर खून के थक्के जमने की शिकायत थी और उसके प्लेटलेट काउंट 40,000 थे (सामान्य औसत 1.5 लाख से अधिक होता है)। लेकिन डॉक्टरों को इस बात की पर्याप्त जानकारी नहीं थी कि यह टीके से संबंधित हो सकता है।”

परिवार ने प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को पत्र लिखकर वैक्सीन की जांच की मांग उठाई

वेणुगोपालन जैसे माता-पिता के लिए यह क्षति अपूरणीय है लेकिन उन्होंने संघर्ष करना कभी नहीं छोड़ा और प्रधानमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री सहित भारतीय प्रशासन को पत्र लिखकर अपनी बेटी की मृत्यु और कोविड-शील्ड वैक्सीन की सुरक्षा की जांच की मांग की। उन्होंने बताया कि करुणा ने गोल्डमैन सैक्स में इंटर्नशिप शुरू ही की थी और एक उज्ज्वल भविष्य के सपने देख रही थी तभी उसे मल्टीसिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम का पता चला और उसे आईवीआईजी (इंट्रावेनस इम्युनोग्लोबुलिन) उपचार दिया गया। वेणुगोपालन ने कहा, “तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हमने उसे खो दिया।”

वहीं,रचना ने बताया कि टीका लगने के पांच दिन बाद रिथाइका को तेज उल्टी और सिरदर्द के साथ एक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। तीन सप्ताह के भीतर, 19 जून को सेरेब्रल वेनस साइनस थ्रोम्बोसिस (सीरब्रल वेनस साइनस थ्रोम्बोसिस) से उसकी मृत्यु हो गई। चूंकि वह बॉडी डोनर थी इसलिए शव परीक्षण किया गया और मृत्यु का कारण वैक्सीन से हुई इम्यून थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (VITT) पाया गया। उसकी मां ने कहा, “वह एक स्वस्थ बच्ची थी जो आर्किटेक्चर में करियर बनाना चाहती थी और भारत या अमेरिका में पढ़ाई करने के लिए पूरी तरह तैयार थी।” उन्होंने आगे बताया कि उनका परिवार 2018 में अमेरिका से भारत आया था।

दिव्यांग सैन्य कैडेटों को लाभ देने में देरी पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ट्रेनिंग के दौरान विकलांगता के कारण सेना से बाहर किए गए अधिकारी कैडेटों को लाभ देने से संबंधित फैसले में देरी करने के लिए केंद्र सरकार को फटकार लगाई। अदालत ने चेतावनी दी कि वह रक्षा और वित्त मंत्रालयों के सचिवों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश देगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें