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रात 11 बजे दी जानकारी, आधार कार्ड देख सुबह 2 बजे बसों में बिठाया, 40 किमी दूर रेलवे स्टेशन पहुंचाया, स्पेशल ट्रेन से लौट रहे लोगों की कहानी

झारखंड के गढ़वा के 45 वर्षीय निर्माण कर्मचारी ने बताया "हमने कुछ कपड़े पैक किए और जल्दी निकले। हमें स्क्रीन किया गया, टोकन नंबर दिये गए, हमें आधार कार्ड दिखाने के लिए कहा गया और फिर एक बस में बैठा दिया। करीब 2 बजे हम रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए।"

ट्रेन में मास्क लगाकर बैठा एक यात्री। (indian express photo)

कोरोना संकट के बीच अलग-अलग राज्यों में फंसे मजदूरों, तीर्थयात्रियों, टूरिस्टों, छात्रों और अन्य लोगों को अपने राज्य पहुंचाने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। इन लोगों को घर पहुंचने के लिए रेलवे ने ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेन चलाई है। जब इस बात की घोषणा हुई तब वासुदेव सिंह सो रहे थे। हैदराबाद से लगभग 40 किलोमीटर दूर संगारेड्डी में गुरुवार दोपहर 11 बजे कुछ अधिकारी आए और उन्होंने सभी से अपने बैग पैक करने के लिए कहा। झारखंड के गढ़वा के 45 वर्षीय निर्माण कर्मचारी ने बताया “हमने कुछ कपड़े पैक किए और जल्दी निकले। हमें स्क्रीन किया गया, टोकन नंबर दिये गए, हमें आधार कार्ड दिखाने के लिए कहा गया और फिर एक बस में बैठा दिया। करीब 2 बजे हम रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुए।”

तीन घंटे बाद वासुदेव सिंह उन 1,200 प्रवासी मजदूरों में शामिल थे, जो एक विशेष ट्रेन से हैदराबाद के लिंगमपल्ली रेलवे स्टेशन से झारखंड के हटिया जा रहे थे। 25 मार्च को पूरे देश में लॉकडाउन लागू होने के बाद यह पहली ऐसी ट्रेन है। 22-कोचों की यह ट्रेन तेलंगाना सरकार द्वारा रेल मंत्रालय से अनुरोध करने के बाद दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा चलाई गई थी।

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गुरुवार को अपने-अपने राज्य भेजे गए सभी मजदूर आईआईटी हैदराबाद फेज 2 की बिल्डिंग के निर्माण का कार्य कर रहे थे। इस साइट में पिछले कुछ दिनों से काम रुका हुआ है। कई मजदूरों का कहना है कि उन्हें उनका बकाया का भुगतान भी नहीं किया गया है।

झारखंड के कुरंगी में रहने वाले संजीव कुमार ने भावुक होते हुए कहा “हम कैंपों में रुके हुए थे। जहां खाने के लिए ना ढंग का खाना था ना ही रहने लायक सुविधाएं थी। मैं जल्दी ही अपने परिवार को देखने की उम्मीद करता हूँ।” कुमार को उम्मेद है कि वे शनिवार की सुबह तक अपने परिवार को देख लेंगे। हालांकि झारखंड सरकार उन्हें स्क्रीन करेगी और उन्हें कुछ दिनों के लिए आइसोलेशन में रखेगी।

मज़दूरों को घर भेजने के फ़ैसले संगारेड्डी में अपने वेतन को लेकर मजदूरी और पर्यवेक्षकों के बीच हुई झड़प के बाद लिया गया। पुलिस से भी मजदूरी की झड़प हुई थी। बाद में, श्रमिकों ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को याचिका दी, जिन्होंने श्रमिकों को वापस पाने के लिए केंद्र के साथ अनुरोध किया। झारखंड ने पहले कहा था कि वह राज्य के बाहर फंसे हुए नौ लाख लोगों को वापस नहीं ला सकता है।

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