19 हाईकोर्ट्स ने प्रवासी मदजूरों की दुर्दशा पर लगाई लताड़, सॉलिसिटर जनरल बोले- लोग चला रहे समानांतर सरकार

मेहता ने प्रवासी संकट के खिलाफ अर्जी दाखिल करने वालों की साख और उद्देश्यों पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा मेहता ने इनकी अर्जी सुनने वाले उच्च न्यायालयों की भी आलोचना की और लोगो पर समानांतर सरकार चलाने का आरोप लगाया।

मेहता ने प्रवासी संकट के खिलाफ अर्जी दाखिल करने वालों की साख और उद्देश्यों पर सवाल उठाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को प्रवासी संकट को लेकर एक जनहित याचिका पर सुनवाई की गई।  इस दौरान केंद्र की तरफ से अपील करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आलोचकों को फटकार लगाई। मेहता ने इसके खिलाफ अर्जी दाखिल करने वालों की साख और उद्देश्यों पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा मेहता ने इनकी अर्जी सुनने वाले उच्च न्यायालयों की भी आलोचना की और लोगो पर समानांतर सरकार चलाने का आरोप लगाया।

शीर्ष अदालत ने देश भर में फंसे प्रवासी श्रमिकों की दुर्दशा पर सुओ मोटो लिया था। 19 उच्च न्यायालयों ने मदजूरों की दुर्दशा को लेकर कई राज्य सरकारों को फटकार लगते हुए निर्देश दिये हैं। इसपर मेहता ने न्यायालयों पर ‘समानांतर सरकार चलाने’ का आरोप लगाया है। सुनवाई के दौरान सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हस्तक्षेप अर्जी दाखिल करने वाले लोगों को सुने जाने का विरोध करते हुए कहा कि कोर्ट को राजनीतिक मंच नहीं बनने दिया जाना चाहिए। मेहता ने कहा कि जिन लोगों ने हस्तक्षेप अर्जी दाखिल की है और मजदूरों की समस्या पर कोर्ट में बहस करना चाहते हैं उनसे पहले पूछा जाए कि उन्होंने इस दिशा में क्या किया है।

Coronavirus Live update: यहां पढ़ें कोरोना वायरस से जुड़ी सभी लाइव अपडेट….

वर्तमान में, कोरोना वायरस से संबंधित जनहित याचिकाएँ इलाहाबाद, आंध्र प्रदेश, बॉम्बे, कलकत्ता, दिल्ली, गौहाटी, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मद्रास, मणिपुर, मेघालय, पटना, उड़ीसा, सिक्किम, तेलंगाना और उत्तराखंड के उच्च न्यायालयों में सुनी जा रही हैं। जबकि कुछ उच्च न्यायालयों, जैसे बॉम्बे, दिल्ली, आंध्र प्रदेश और पटना ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है। इसके अलावा कोर्ट अन्य याचिकाकर्ताओं और बार के सदस्यों सहित सभी याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं।

गुरुवार को मेहता द्वारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी बात रखने के कुछ घंटों बाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने अस्पतालों से शव को रिहा करने से पहले शवों का परीक्षण करने के लिए कहा है। जस्टिस आर एस चौहान और बी विजयसेन रेड्डी की पीठ ने राज्य सरकार को संक्रमितों की संख्या छुपने पर जमकर फटकार लगाई है।

पढें राष्ट्रीय समाचार (National News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।

अपडेट