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कोरोनाः लोग हंस रहे, थू-थू हो रही है- विश्व में भारत की ‘छवि’ पर बोले रवीश, कांग्रेसी नेत्री ने कहा- फर्जी विश्वगुरु के विरोध में हम लगवाएंगे 100 पोस्टर

रवीश ने फेसबुक पर लिखा "आज दुनिया में भारत की क्या छवि बनी है, प्रधानमंत्री मोदी के बारे में क्या छप रहा है, ज़रा पता कीजिए। लोग हंस रहे हैं। थू-थू हो रही है। भारत की बदनामी हो गई है। क्योंकि प्रोपेगैंडा का पोल खुल गया है। जिन दो प्राइवेट कंपनियों के टीके को मोदी अपना बता रहे हैं उसमें उनकी सरकार का एक नया पैसा नहीं लगा है।"

वैक्सीन लगवाने के लिए इंतजार करते लोग। (Express Photo: Pradip Das)

भारत में कोरोना का संक्रमण बहुत तेजी से बढ़ रहा है। इसी बीच वैक्सीन को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ पोस्टर लगाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया से लेकर विपक्ष तक हर कोई यही सवाल कर रहा है कि ‘मोदीजी अपने वैक्सीन विदेश क्यों भेज दिया?’ वैक्सीन को लेकर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने भी एक पोस्ट लिखा है।

रवीश ने फेसबुक पर लिखा “आज दुनिया में भारत की क्या छवि बनी है, प्रधानमंत्री मोदी के बारे में क्या छप रहा है, ज़रा पता कीजिए। लोग हंस रहे हैं। थू-थू हो रही है। भारत की बदनामी हो गई है। क्योंकि प्रोपेगैंडा का पोल खुल गया है। जिन दो प्राइवेट कंपनियों के टीके को मोदी अपना बता रहे हैं उसमें उनकी सरकार का एक नया पैसा नहीं लगा है। आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के काम को भी हमारे वैज्ञानिकों के खाते में जोड़ लेते हैं। कंपनियों के निर्यात को भी सरकार की मानवता के नाम पर की जाने वाली मदद के खाते में जोड़ लेते हैं।”

रवीश ने लिखा की प्रधानमंत्री मोदी अक्सर कहते हैं कि ‘हमारे वैज्ञानिकों’ ने टीका बनाया है। कभी नहीं कहते कि दो प्राइवेट कंपनियों के वैज्ञानिकों ने बनाया है जिसमें भारत सरकार ने एक नया पैसा नहीं लगाया है। ख़ुद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि इन दो कंपनियों में टीके के रिसर्च और विकास में सरकार का कोई पैसा नहीं लगा है। तब तो प्रधानमंत्री को यही कहना चाहिए कि भारत की दो कंपनियों और उनके पैसे पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने बनाया है। लेकिन बेहद चालाकी से इस तथ्य को गोल कर दिया जाता है।

बेशक भारत बायोटेक और सीरम इंस्टिट्यूट भारत की कंपनियाँ हैं।दुनिया भर की सरकारें अपनी और प्राइवेट कंपनियों में अरबों डालर का निवेश कर रही थी। मोदी सरकार ने तो वह भी नहीं किया। प्राइवेट कंपनियों को बिल्कुल भारतीय खाते में गिना जा सकता है, गिना ही जाता है, लेकिन प्रधानमंत्री इस तरह से ज़ोर देते हैं जैसे उनकी देखरेख में और आर्थिक मदद से दोनों कंपनियाँ रिसर्च कर रही हैं।

पिछले साल भारत बायोटेक और सीरम इंस्टीट्यूट का दौरा करते हैं। उसकी तस्वीरें ऐसे छप रही हैं जैसे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सब कुछ हो रहा है। वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने गए हैं। उस वक़्त भी आप नहीं जानते हैं और आपको नहीं बताया जाता है कि वो वैज्ञानिक कौन हैं जिन्हें प्रोत्साहित करने प्रधानमंत्री गए थे। उसके वर्णन में भी प्रधानमंत्री मोदी हावी रहते हैं। वैज्ञानिक नहीं। गोदी मीडिया मोदी को वैक्सीन से इस तरह से जोड़ता है जैसे मोर को दाना डालने के साथ साथ टीके पर रिसर्च मोदी ही कर रहे हों।

अब एक बात और समझ लें। सीरम इंस्टीट्यूट ने टीके की खोज नहीं की है। वह एक निर्माता कंपनी है। जिस कोविशील्ड का नाम आप जानते हैं उनका निर्माण भारत में मौजूद एक कंपनी में हुआ है लेकिन उस पर रिसर्च और खोज का काम ब्रिटेन में हुआ है। आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और दवा कंपनी एस्ट्राज़ेनेका के सहयोग से। इसमें 97 पैसा ब्रिटेन के लोगों और संस्थाओं का लगा है। दूसरे देशों और संस्थाओं का भी लगा है। मगर इसमें भारत का ज़ीरो पैसा लगा है। तो कोविशील्ड के अनुसंधान में ‘हमारे वैज्ञानिकों’ का कोई योगदान नहीं है। मुमकिन है आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राज़ेनेका में भारतीय वैज्ञानिक भी काम करते हैं लेकिन उस अनुसंधान में अकेले वही नहीं होंगे। कोविशील्ड का पेटेंट न तो भारत के पास है और न ही प्रधानमंत्री मोदी के ‘हमारे वैज्ञानिकों’ के पास है।

यहाँ तक आपको समझ आ गया कि शुरू से ही दूसरे के माल पर सरकारी नियंत्रण बना कर प्रधानमंत्री ने अपना फ़ोटो चमकाया। अब आते हैं भारत बायोटेक पर। यह एक बड़ी कंपनी है। इसकी दुनिया में साख है। इसकी कोवैक्सिन का पेटेंट भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद भी साझा करता है। हम नहीं जानते कि भारत बायोटेक के अनुसंधान में जो वैज्ञानिक काम करते हैं क्या वो केवल भारतीय हैं? हमें तो उनका नाम तक नहीं बताया गया है।

अगर ICMR के वैज्ञानिकों ने भारत बायोटेक के साथ कुछ काम किया है तो हम वह भी जानते हैं। लेकिन तब भी हम नहीं जानते कि ‘हमारे वैज्ञानिकों’ कौन हैं। जनवरी के पहले हफ़्ते में जब टीके को मंज़ूरी दी जाती है तब भी हम नहीं जानते हैं कि ‘हमारे वैज्ञानिक’ कौन हैं। केवल प्रधानमंत्री मोदी का बयान छपता है कि यह एक निर्णायक मोड़ है। टीके के अनुसंधान से लेकर वितरण पर प्रधानमंत्री मोदी अपना फ़ोटो चिपका देते हैं। जबकि उसमें भारत सरकार का एक नया पैसा नहीं लगा है।

वहीं न्यूज़ 18 के एक शो में कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनाटे ने भी पीएम मोदी पर हमला बोला। कांग्रेस नेता ने कहा “फर्जी विश्वगुरू बनने के चक्कर में मोदी जी ने वैक्सीन को विदेशों में भेज दिया। हम इसका विरोध करने के लिए ऐसे पोस्टर 100 बार लगवाएंगे। जिसे गिरफ्तार करना है हमें कर ले।

दरअसल ऐसे पोस्टर लगाने पर पुलिस ने अबतक दर्जनों लोगों को गिरफ्तार किया है। पीएम मोदी की आलोचना वाले इस पोस्टर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी अपने ट्विटर पर शेयर किया और कहा कि ‘मुझे भी गिरफ्तार कर लो।’ यहां तक कि राहुल गांधी ने इस पोस्टर को अपने ट्विटर का प्रोफाइल फोटो बना लिया।

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