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कोरोना के हल्के लक्षण वाले मरीज़ों को बाद में हो रही याददाश्त और नसों की समस्या, परहेज में न दें ढिलाई

कोरोना संक्रमित या संक्रमित रह चुके कई मरीज "सर्वाइवर कॉर्प्स" नाम के एक फेसबुक ग्रुप में अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। इस पेज के 96,000 से अधिक सदस्य हैं।

coronavirus, doctorsकोरोना वायरस महामारी में मारे गए डॉक्टरों का डेटा सरकार के पास नहीं। (रॉयटर्स)

कोरोना वायरस महामारी के ऐसे मरीज जिनमें शुरुआती संक्रमण के लक्षण कम थे उन्हें अब रहस्यमय दीर्घकालिक न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसमें याददाश्त, नींद में बाधा आना, सिर चकराना, नसों में दर्द की  समस्या मुख्य रूप से शामिल है। इंडियाना यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की शोधकर्ता नताली लैंबर्ट के अनुसार कोरोना के लक्षण मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं। लैंबर्ट ने अपने शोध में 1567 लोगों पर ऑनलाइन शोध किया जिनमें लंबे समय तक कोरोना के लक्षण रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों परहेज का खास तौर पर ध्यान रखने की जरुरत है।

इसी बीच कनाडा में वेस्टर्न यूनिवर्सिटी के न्यूरोसाइंटिस्ट एडरिन ओवेन ने कहा कि ये पूरी तरह से स्पष्ट हो रहा है कि ऐसे लोगों में से कई न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भले ही ये सिर्फ दस फीसदी लोगों को प्रभावित करता हो मगर इससे एक वर्ष के लिए भारी सामाजिक और आर्थिक बोझ पड़ सकता है।

उदाहरण के लिए न्यूयॉर्क में 42 वर्षीय कॉपी राइटर एली मुसर के लिए कोविड-19 के पहले सप्ताह में बिल्कुल परेशानी नहीं हुई जितनी बाद के सप्ताह में उन्हें समस्याओं का सामना करना पड़ा। मार्च के आखिर में उन्हें कुछ दिनों के लिए हल्के बुखार और थकान की समस्या हुई। ऐसे कई सप्ताह तक चलता रहा। उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया कि बाद के महीनों तक चक्कर आना, मांसपेशियों की कमजोरी और कभी-कभी पैनिक अटैक और डिप्रेशन की परेशानी होती थी।

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ब्लूमबर्ग में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मई माह उन्हें खासी की परेशानी हुई, वो अपना पैर भी उठाकर आगे नहीं रख पा रहे थे। जून में उन्हें रुक-रुककर पसीने आना और कांपने का अनुभव हुआ। कोरोना लक्षणों के अपने शुरुआती पांच महीने के बाद वो अभी भी मेडिकल लीव पर हैं और हाल में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के लिए डॉक्टरी सलाह ले रहे हैं।

एली मुसर ने बताया कि एक अच्छा अनुमान ये है कि हमेशा के लिए ऐसा नहीं रहेगा। समय के साथ ये बेहतर हो जाएगा। हालांकि साथ ही उन्होंने कहा, ‘मगर कितना समय लगेगा? कितना ठीक हो पाऊंगा? मैं क्या उम्मीद कर सकता हूं?’ उल्लेखनीय है कि कोरोना संक्रमित या संक्रमित रह चुके कई मरीज “सर्वाइवर कॉर्प्स” नाम के एक फेसबुक ग्रुप में अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। इस पेज के 96,000 से अधिक सदस्य हैं।

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