लॉकडाउन की मार: मई में 1.5 करोड़ लोगों ने खोई अपनी नौकरी, 11 महीने बाद दोहरे अंकों में पहुंची बेरोजगारी दर

दूसरी लहर के चलते पिछले महीने मई में बेरोजगारी दर 11.9 फीसदी हो गई जबकि उसके पिछले महीने अप्रैल में यह 7.97 फीसदी पर थी। यह पिछले साल किए गए लॉकडाउन के बाद से सबसे अधिक है।

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मई के महीने में भारत में करीब 1.5 करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी नौकरियां गवाई है। (express file photo)

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का कहर अब कुछ कम हो गया है। लेकिन इसके चलते किए गए लॉकडाउन से देश की अर्थव्यवस्था ठप्प हो चुकी है। जिसके चलते करोड़ों लोग अपनी नौकरियों से हाथ धो बैठे हैं। एक प्राइवेट रिसर्च ग्रुप द्वारा किए गए सर्वे के मुताबिक इस साल मई के महीने में भारत में करीब 1.5 करोड़ से अधिक लोगों ने अपनी नौकरियां गवाई है।

इसके चलते बेरोजगारी की दर में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। दूसरी लहर के चलते पिछले महीने मई में बेरोजगारी दर 11.9 फीसदी हो गई जबकि उसके पिछले महीने अप्रैल में यह 7.97 फीसदी पर थी। यह पिछले साल किए गए लॉकडाउन के बाद से सबसे अधिक है। पिछले साल जून में बेरोजगारी 10.18 फीसदी थी। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के अनुसार, कामकाजी आयु वर्ग के लगभग 14.73 प्रतिशत लोग शहरी क्षेत्रों में और 10.63 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगार हुए।

पिछले साल अप्रैल में कोरोना महामारी के चलते देश भर में लगाए गए लॉकडाउन के दौरान सबसे अधिक बेरोजगारी दर थी जब इसकी दर 23.52 फीसदी थी। हालांकि इसके बाद इस दर में अगले ही महीने से गिरावट आने लगी और मई 2020 में देश की बेरोजगारी दर 21.73 फीसदी पर पहुंच गई।

सीएमआईई के मुताबिक मई के महीने में 37.545 करोड़ लोगों के पास रोजगार है। इसमें विभिन्न प्रकार के अनौपचारिक कार्य शामिल हैं। अप्रैल में 39.079 करोड़ लोगों को रोजगार मिला, जिसका मतलब है कि मई में 1.53 करोड़ से अधिक नौकरियां चली गईं।

सूत्रों के मुताबिक संक्रमित होने का डर और लचर वैक्सीनेशन के चलते कई कर्मियों के मन में काम को लेकर डर बढ़ा जिसके चलते लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) में गिरावट आई। एलएफपीआर किसी खास आयु-वर्ग के लोगों द्वारा काम करने वाले या सक्रिय रूप से काम की तलाश कर रहे लोगों और उस खास आयु-वर्ग की कुल जनसंख्या का अनुपात है।

इस रेट में आमतौर पर 15 वर्ष और इससे ऊपर के लोगों को शामिल किया जाता है। वहीं बेरोजगारी दर सक्रिय रूप से काम की तलाश कर रहे बेरोजगारों और कुल श्रमिक बल (लेबर फोर्स) के बीच का अनुपात है।

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