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लॉकडाउनः नौकरी गंवाने के बाद इंजीनियरिंग के प्रोफेसर बन गए बाइक मेकेनिक, परिवार समेत छोड़ना पड़ा शहर

हैदराबाद के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम कर रहे 33 वर्षीय एक आदिवासी व्यक्ति ने लॉकडाउन के कारण अपनी नौकरी खो दी और तब से खम्मम के मढिरा शहर में एक बाइक मैकेनिक के रूप में काम कर रहा है।

सांकेतिक तस्वीर।

कोरोना के बढ़ते प्रकोप से देश को बचने के लिए लॉकडाउन किया गया था। इस लॉकडाउन के चलते कई लोगों ने अपनी नौकरियां गवां दी। ऐसा ही एक मामला तेलंगाना से सामने आया है जहां एक प्रोफेसर नौकरी गंवाने के बाद बाइक मेकेनिक बन गए हैं। हैदराबाद के एक निजी इंजीनियरिंग कॉलेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में काम कर रहे 33 वर्षीय एक आदिवासी व्यक्ति ने लॉकडाउन के कारण अपनी नौकरी खो दी और तब से खम्मम के मढिरा शहर में एक बाइक मैकेनिक के रूप में काम कर रहा है।

बंजारा कॉलोनी के रहने वाले वामकुडोथ रविंदर ने पलवंचा से अपना बीटेक पूरा किया, वहीं स्वर्ण भारती इंजीनियरिंग कॉलेज से उन्होंने मैकेनिकल में अपना एमटेक पूरा किया। एक साल तक मढ़ियारा के एक निजी कॉलेज में काम करने के बाद वे साढ़े तीन साल पहले हैदराबाद आ गए। यहां उन्होंने 24,000 रुपये प्रति माह के वेतन पर सहायक प्रोफेसर के रूप में काम करना शुरू किया। वहीं उनकी पत्नी बुल्ली भी एक एमटेक स्नातक हैं। उनकी दो बेटियाँ भी हैं एक चार साल की है वहीं दूसरी की उम्र सात साल है।

अपने गृहनगर लौटने के बाद, रविंदर ने कई दिनों तक नौकरी खोजने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली। मैकेनिकल इंजीनियरिंग होने के चलते उन्हें एक चोटी सी बाइक रिपेयर वर्कशॉप में काम मिल गया। यहां वे 200 रूपाय दिन कमाते हैं और अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं।

हालांकि, रविंदर की पत्नी अब भी बेरोजगार हैं। रिपोर्ट के मुताबिक रविंदर ने कहा, “मैंने लंबे समय से प्रोफेसर बनने का सपना देखा था, लेकिन लॉकडाउन ने मेरे जीवन को बादल कर रख दिया।” उन्होंने यह भी कहा कि आजकल शिक्षण पेशे का कोई सम्मान नहीं करता। उन्होंने सरकार से उनके और उनकी पत्नी के लिए एक उपयुक्त नौकरी प्रदान करने की अपील की है।

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