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COVID-19 in India: अभी लंबी चलेगी कोरोना से लड़ाई, साफ बता रहे ये 5 संकेत

Coronavirus Fight: यह सही है कि भारत में कोरोनावायरस के संक्रमण की दर में कमी आई है, इसके बावजूद यह कहना किसी गलतफहमी पालने से कम नहीं है कि स्थिति हमारे नियंत्रण में आ गई है।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: April 23, 2020 7:37 PM
pm modi and corona 1200प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च की रात 12 बजे के बाद से देश में लॉकडाउन लागू किया था। अब इसे 3 मई तक बढ़ा दिया है।

Fight Against Coronavirus: कोरोनावायरस सारी दुनिया के लिए सिरदर्द बन हुआ है। अब तक इसका कोई असरदार इलाज या वैक्सीन नहीं है, इसलिए दुनियाभर की सरकारें इसे रोकने का एकमात्र उपलब्ध तरीका (लॉकडाउन) ही अपना रही हैं। भारत भी कोविड 19 महामारी के खिलाफ जंग में मजबूती से डटा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च की रात 12 बजे से लॉकडाउन का ऐलान किया था, जिसे अब 3 मई तक बढ़ा दिया गया है।

कोरोना के खिलाफ जंग में पीएम मोदी की ओर से लिए गए फैसलों की विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) से लेकर कई अंतरराष्ट्रीय संगठन तारीफ कर चुके हैं। माइक्रोसॉफ्ट के फाउंडर बिल गेट्स ने भी पीएम मोदी के फैसलों की सराहना की है। यह सही है कि भारत में कोरोनावायरस के संक्रमण की दर में कमी आई है, इसके बावजूद यह कहना किसी गलतफहमी पालने से कम नहीं है कि स्थिति हमारे नियंत्रण में आ गई है।

3 मई तक 1.5 लाख तक हो सकते हैं संक्रमित : भारत में जिस दिन लॉकडाउन लागू हुआ था, उस दिन कोरोना संक्रमित की संख्या 571 थी, जबकि 10 लोगों की जान जा चुकी थी। देश में कोरोना का पहला मामला 30 जनवरी को सामने आया था, यानी इस खतरनाक वायरस को भारत में 500 का आंकड़ा छूने में 53 दिन लगे। जबकि पिछले 10 दिनों में ही 11 हजार से ज्यादा लोगों को यह संक्रमित कर चुका है। यदि इसी गति से भी यह आंकड़ा बढ़ता रहा तो 3 मई तक यह कोरोना संक्रमितों की संख्या डेढ़ लाख तक हो सकती है।

रिकवरी दर निराशाजनक : भारत में कोरोना से अब तक 4382 लोग रिकवर हुए हैं। यानी देश में इसके संक्रमित मरीजों की रिकवरी दर 19.9% है। यदि हम ओवरऑल बात करें तो यह करीब 10 फीसदी कम है। स्पेन से तो हम आधे भी नहीं हैं। स्पेन में रिकवरी दर 41 फीसदी से ज्यादा है। इटली में यह 27 फीसदी है, जबकि जर्मनी में 60 फीसदी है। जर्मनी ने रिकवरी दर 50 फीसदी से ज्यादा होने के बाद ही अपने यहां लॉकडाउन में छूट दी थी।

रिकवरी के मामले में भारत में मध्य प्रदेश और गुजरात की स्थिति बहुत खराब है। गुजरात में कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या सिर्फ 7.44 फीसदी है, जबकि मध्य प्रदेश में अब तक 9.58% मरीज ही ठीक हुए हैं। कमोबेश उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की स्थिति भी अच्छी नहीं है। उत्तर प्रदेश में 11.94% और महाराष्ट्र में 13.97% मरीज ही ठीक हुए हैं। आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और पंजाब में भी कोरोना के मरीजों के ठीक होने का आंकड़ा 20 फीसदी से कम है। आंध्र प्रदेश में 14.76, बंगाल में 17.32, राजस्थान में 17.78 और पंजाब में 19.06 फीसदी मरीज ही ठीक हुए हैं। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जनसंख्या के मामले में क्रमशः पहले और दूसरे नंबर पर हैं। पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश क्रमशः चौथे, 5वें और छठे नंबर पर हैं। राजस्थान और गुजरात भी टॉप 10 में शामिल हैं। यानी इन राज्यों में कोरोनावायरस के तेजी से फैलने की आशंका अभी बनी है।

खराब हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर : भारत में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत खराब है। देश में हर एक हजार लोगों पर सिर्फ 0.7 बेड हैं, जबकि हर 1000 लोगों पर 0.8 डॉक्टर हैं। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, देश में 50 हजार के करीब वेंटिलेटर हैं। कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र की बात करें तो उसकी आबादी 11.2 करोड़ से ज्यादा है, लेकिन वहां के सरकारी अस्पतालों में सिर्फ 450 वेंटिलेटर और 502 आईसीयू बेड ही हैं।

कोरोना टेस्ट की धीमी रफ्तार : देश की आबादी 139 करोड़ के आसपास है, लेकिन अब तक पांच लाख लोगों के ही कोरोना टेस्ट हो पाए हैं। महाराष्ट्र और राजस्थान दो ही ऐसे राज्य हैं, जहां 20 हजार से ज्यादा लोगों का कोरोना टेस्ट हो पाया है। केरल में 15, दिल्ली में 14 और उत्तर प्रदेश में 12 हजार के करीब लोगों के ही कोरोना टेस्ट हुए हैं। यही नहीं, रैपिड टेस्टिंग किट के नतीजे भी सही नहीं आ रहे हैं। इस वायरस के एक से दूसरे में फैलने की गति बहुत तेज है। ऐसे में लॉकडाउन के हटने या उसमें ढील देने के बाद संक्रमितों की संख्या में तेजी से इजाफा होने की आशंका है।

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सोशल डिस्टैंसिंग में फेल : जर्मनी, स्पेन के अलावा दक्षिण कोरिया और हॉन्गकॉन्ग की भी रिकवरी दर बहुत अच्छी है। दक्षिण कोरिया में यह 78%, जबकि हॉन्गकॉन्ग में 65% है। इन देशों ने लॉकडाउन के साथ-साथ सोशल डिस्टैंसिंग पर भी फोकस किया। यहां के लोगों ने सोशल डिस्टैंसिंग का बहुत अच्छे से पालन किया। हमारे यहां स्थिति बिल्कुल इतर है। हमारे यहां जब भी लॉकडाउन में ढील दी गई, लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं किया। सोशल डिस्टैंसिंग मेंटेन करने में जनसंख्या घनत्व भी एक रोड़ा है। भारत में जनसंख्या घनत्व 1,202 प्रति वर्ग मील (464 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर) है।

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