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फेक न्यूज के चलते हुआ था लॉकडाउन में मजदूरों का पलायन, गरीबों में बैठ गया था डर: गृह मंत्रालय

मंत्रालय ने मंगलवार को लोकसभा को बताया कि फेक न्यूज के चलते ही लॉकडाउन में श्रमिकों ने पलायन किया। गृह मंत्रालय ने कहा कि प्रवासी श्रमिक भोजन, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और रहने जैसी बुनियादी जरूरतों की पर्याप्त आपूर्ति के लिए चिंतित थे।

Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: September 16, 2020 8:51 AM
गृह मंत्रालय ने कहा फेक न्यूज के चलते ही लॉकडाउन में श्रमिकों ने पलायन किया।(Photo: Gajendra Yadav)

कोरोना वायरस के चलते किए गए लॉकडाउन से सबसे ज्यादा प्रभावित प्रवासी मजदूर हुए थे। लॉकडाउन लागू किए जाने से उनके पास कोई रोजगार नहीं था जिसके चलते उन्हें मजबूरन पलायन करना पड़ा था। लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रवासी श्रमिकों के पलायन के पीछे की वजह फेक न्यूज को बताया है।

मंत्रालय ने मंगलवार को लोकसभा को बताया कि फेक न्यूज के चलते ही लॉकडाउन में श्रमिकों ने पलायन किया। गृह मंत्रालय ने कहा कि प्रवासी श्रमिक भोजन, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और रहने जैसी बुनियादी जरूरतों की पर्याप्त आपूर्ति के लिए चिंतित थे। लोकसभा में एक प्रश्न के जवाब में गृह राज्‍य मंत्री नित्‍यानंद राय ने कहा कि, बड़ी संख्‍या में प्रवासी मजदूरों का पलायन लॉकडाउन की अवधि को लेकर गढ़ी गई खबरों के कारण हुआ। मंत्री ने कहा कि सरकार इसे लेकर पूरी तरह से सचेत थी। लॉकडाउन की अवधि के दौरान सभी जरूरी उपाय किए गए, ताकि कोई भी नागरिक नहीं भोजन, पानी, चिकित्सा सुविधाओं आदि की मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रहे।

वहीं जब सरकार से पूछा गया कि सिर्फ चार घंटे के नोटिस पर पूरे देश में लॉकडाउन क्यों किया गया? इसपर उन्होने कहा “किसी बड़ी आवाजाही को रोकने के लिए ऐसा फैसला लिया गया। कोरोना वायरस संक्रामक बीमारी है। लोगों की आवाजाही इसे देश के अन्य हिस्सों में तेजी से फैला सकती थी।’ मंत्री ने बताया कि लॉकडाउन लगाने के चलते ही कोविड-19 का तेजी से प्रसार नहीं हो सका।

बता दें इससे पहले सोमवार को केंद्र सरकार ने संसद में कहा था कि महामारी के चलते पूरे देश में किए गए लॉकडाउन के दौरान कितने प्रवासी मजदूरों ने अपनी जान गवाई इसका आंकड़ा उनके पास नहीं है। वहीं सरकार से जब पूछा गया कि “क्या सरकार ने पीड़ित परिवारों को कोई मुआवजा या आर्थिक सहायता प्रदान की है।” इसपर मंत्रालय ने कहा कि चूंकि इस तरह का डेटा सरकार के पास नहीं है, इसलिए पीड़ितों के परिजनों को मुआवजा देने का कोई सवाल ही नहीं था।

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