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15 हजार कमाता था मजदूर का इंजीनियर बेटा, पर कोरोना लील गया नौकरी, 207 रुपए दिहाड़ी पर किया काम; फिर कलेक्टर ने दिला दी जॉब

अनंता ने बीटेक की डिग्री हासिल की और चेन्नई की एक कंपनी में सहायक इंजीनियर की नौकरी करने लगे। लेकिन अब 23 साल के अनंता ओडिशा में अपने पिता के साथ मजदूरी कर रहे हैं।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: October 23, 2020 10:40 AM
Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA), coronavirus, lockdown, Unemployment23 साल के अनंता ओडिशा में अपने पिता के साथ मजदूरी कर रहे हैं। (representational pic)

बैष्णब बेरिया ने बेटे अनंता को इंजीनियरिंग कॉलेज भेजा ताकि वह उनकी तरह मजदूर न बने। अनंता ने बीटेक की डिग्री हासिल की और चेन्नई की एक कंपनी में सहायक इंजीनियर की नौकरी करने लगे। लेकिन अब 23 साल के अनंता ओडिशा में अपने पिता के साथ मजदूरी कर रहे हैं।

महामारी के चलते सरकार द्वारा किए गए लॉकडाउन में अनंता की नौकरी चली गई। जिसके बाद उन्हें 15 हज़ार की नौकरी छोड़ 207 रुपये प्रति माह दिन के हिसाब से काम करना पड़ रहा है। लेकिन अनंता की किस्मत तब पलट गई जब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत होने वाले कामों का निरीक्षण करने के लिए बोलंगीर कलेक्टर चंचल राणा मंगलवार को जुरालाकनी गांव पहुंचे।

राणा ने गुरुवार को ‘द टेलीग्राफ’ को बताया, “जब मैंने श्रमिकों की संख्या का पता लगाने के लिए मस्टर रोल की जांच की, तो मुझे इस युवा लड़के के बार में पता चला। जब मैंने उससे बात की तो मैं काफी प्रभावित हुआ। मैंने उसकी योग्यता के बारे में पूछताछ की और यह जानकर हैरान था कि उसके पास बीटेक की डिग्री थी। मैंने अगले दिन उन्हें बोलंगीर में अपने कार्यालय में बुलाया।”

बुधवार को, अनंता भुवनेश्वर से 320 किमी दूर बोलंगीर जिला मुख्यालय पहुंचे। जहां उन्हें कलेक्टर ने उन्हें सरकारी नौकरी देने की बात कही। उन्होंने कहा, ‘हमने उन्हें जिला मुख्यालय में मनरेगा सेल (जो सभी ग्रामीण नौकरी योजना परियोजनाओं और श्रमिकों के रिकॉर्ड का रखरखाव रखता है) में अवशोषित करने का फैसला किया है। राणा ने कहा कि अब उन्हें 10,000 रुपये से लेकर 12,000 रुपये प्रति माह मिलेंगे।

कलेक्टर ने कहा “हम यह स्पष्ट कर देंगे कि यह उसकी वर्तमान वित्तीय समस्याओं से निपटने के लिए एक अस्थायी व्यवस्था है। उसे अब अपने सपनों को साकार करने के लिए काम करना चाहिए। वह उच्च अध्ययन के लिए जा सकता है या चीजों को बदलने की प्रतीक्षा कर सकता है ताकि बाद में वह एक अच्छी नौकरी कर सके। मैं उसकी मदद करने के लिए जो कुछ भी कर सकता हूं वह करूंगा।”

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