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जब COVID-19 Emergency हो: क्या करें और क्या नहीं? जानें

कई डॉक्टरों ने कहा है कि कोविड के मरीज अस्पताल पहुंचते-पहुंचते बहुत देर कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि वे या तो रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं या अस्पताल पहुंच कर बेड का इंतजार करते-करते सीधे आईसीयू में पहुंच जाते हैं।

देश में कोरोना की लहर अपना कहर बरपा रही है। (पीटीआई)।

कई डॉक्टरों ने कहा है कि कोविड के मरीज अस्पताल पहुंचते-पहुंचते बहुत देर कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि वे या तो रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं या अस्पताल पहुंच कर बेड का इंतजार करते-करते सीधे आईसीयू में पहुंच जाते हैं। तो ऐसे कौन से सिम्टम यानी लक्षण हैं जिनकी पहचान कर तीमारदार को बिजली की तरह दौड़ जाना चाहिए? इस बाबत इंडियन एक्सप्रेस ने कई डॉक्टरों से बात की। इस बातचीत से निम्न निष्कर्ष निकलेः

क्या है कोविड इमरजेंसी?
फोर्टिस, लुधियाना के इमरजेंसी वॉर्ड के हेड डॉ अभिमन्यु शर्मा ने इमरजेंसी हालात के इन बिंदुओं पर प्रकाश डाला-गिरता ऑक्सीजन लेवल (92 से कम होना), अस्थिर रक्तचाप तेज,बुखार का न कम होना,छाती में दर्द,भीषण सरदर्द,सांस लेने में परेशानी, मरीज का छह मिनट चल पाने का टेस्ट न पास कर पाना।

किन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए: लुधियाना के फिजीशियन डॉ सुरेंद्र गुप्ता बताते हैं कि जब मरीज का ऑक्सीजन लेवल 94 प्रतिशत मेंटेन न हो पा रहा हो, या जब वह कुछ मिनट खड़े होने पर बेचैन हो जाए खतरे का संकेत है। दिल की धड़कन बढ़ना, यानी पैलपिटेशन, हाइ पल्स, हार्ट रेट सौ से ज्यादा हो तो भी स्थिति गंभीर मानी जानी चाहिए। उल्टी-दस्त के कारण हाई या लो बीपी और डीहाइड्रेशन तथा बलगम में खून आने को भी कतई हल्के में नहीं लेना चाहिए।

ऐसे में क्या किया जाए?: इन्टास फार्मास्यूटिकल्स के कैंसर विशेषज्ञ डॉ अंकुर शाह कहते हैं कि डाक्टरों के निर्देश का पालन कीजिए। गहरी सांस खींचिए। ऑक्सीजन व पल्स रेट को लगातार जांचिए और पानी या अन्य गरम पेय के जरिए शरीर को तर रखिए। लगातार खुमारी मतलब नींद आना ऑक्सीजन लेवल गिरा देता है, जिससे आगे दिक्कत आती है। खून में कार्बन डाइऑक्साइड इकट्ठा होने से चक्कर आने लगते हैं। इस हालत में गहरी सांसे खींचना एक सीमा तक संतुलन ठीक कर देता है। रोगी को आसानी से पचने वाला भोजन लेना चाहिए और खूब पानी या पेय पदार्थ लेने चाहिए। थोड़ी-थोड़ी देर में पानी के घूंट लेने से भी ऑक्सीजन सप्लाइ सुधरती है।

कोविड इमरजेंसी में क्या करें?: मरीज तुरंत अपने डॉक्टर से बात करें और आगे की चिकित्सा के लिए सुपर स्पेशलिस्ट का एप्वाइंटमेंट हासिल करें अथवा अस्पताल के लिए तुंरत निकल लें। मरीज की हालत को देखते हुए कोविड-बेड-एवेलेबिलिटी-ऐप के जरिए ऑक्सीजन बेड का इंतजाम करना चाहिए।

लक्षण दिखने के बाद आरटी-पीसीआर के अलावा दूसरे जरूरी टेस्ट: आरटी-पीसीआर कोरोना वायरस की मौजूदगी बताएगा। इसके अलावा कम्प्लीट ब्लड काउंट यानी सीबीसी टेस्ट, क्वांटिटेटिव-सीआरपी, एसजीओटी, डी-डाइमर, एलडीएच, फेरेटिन, आइएल-6, किडनी एवं लिवर फंक्शन टेस्ट तथा एचआरसीटी चेस्ट टेस्ट भी डॉक्टर की सलाह के मुताबिक कराने चाहिए। लुधियाना के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ कुलवंत सिंह कहते हैं कि ये टेस्ट बताते हैं कि शरीर के कौन से प्रमुख अंग ठीक से काम कर रहे हैं अथवा नहीं।

अगर आरटी-पीसीआर नेगेटिव है लेकिन सीआरपी पॉजिटिव और एचआरसीटी में कोविड न्यूमोनिया निकले: ऐसे में कोविड प्रोटोकॉल के तहत इलाज शुरू कर देना चाहिए क्योंकि सीटी से फेफड़ों पर असर स्पष्ट हो जाता है। आरटी-पीसीआर केवल 70 फीसदी ही कारगर होता है। ऐसे तमाम मामले आते रहते हैं जिनमें रिपोर्ट नेगेटिव आती है। ऐसा कहना है डॉ अभिमन्यु का।

अस्पताल से पहले घर में यह करें: मरीज को गहरी सांस खींचने का अभ्यास करना चाहिए। उसे हर आठ घंटे में सिक्स-मिनट-वॉक-टेस्ट लेना चाहिए। और, इसके तुरंत बाद ऑक्सीजन लेवल और पल्स रेट जांचनी चाहिए। पेट के बल लेटने (ऐसे लेटने से कि शरीर का पिछला हिस्सा ऊंचा रहे) से ऑक्सीजन लेवल सुधरता है। मरीज होम आइसोलेशन में रहे साथ ही किसी डॉक्टर से संपर्क में। उसे और तीमारदारों को पैनिक नहीं करना चाहिए।

दवाएं ताकि कोविड इमरजेंसी की नौबत न आए: गुटकने वाले या सांस के साथ फेफडों में खींचने यानी इनहेल करने वाले स्टेरॉयड्स और साथ में श्वासनली को खोलने वाले ब्रांकोडायलेटर्स देने चाहिए। इनके अलावा एंटीबायटिक्स, जिंक, विटामिन सी तथा भाप लेना चाहिए। इससे इमरजेंसी के हालात पैदा होने की नौबत टाली जा सकती है। मरीज को शराब या धूम्रपान बिलकुल नहीं करना चाहिए।

अगर रोगी पहले से डायबिटीज, हृदयरोग या फेफड़ो-किडनी आदि के रोगों से ग्रसित हो तो: डॉ गुप्ता कहते हैं कि जब ऐसे लोगों को कोविड हो तो उन्हें अपनी रेगुलर दवाएं लेते रहना चाहिए ताकि ये रोग कंट्रोल में रहें। इन लोगों को भी डीप ब्रीदिंग का अभ्यास करना चाहिए। शांति से रहना चाहिए। तनाव बिलकुल नहीं। इन लोगों का अपने डॉक्टर के संपर्क में रहना बहुत जरूरी है।

टेस्ट कितनी बार: टेस्ट कराने के लिए बार-बार जाना ठीक नहीं। बेहतर होगा कि आरटी-पीसीआर के साथ चेस्ट का एचआरसीटी भी करा लिया जाए। लेकिन डॉक्टर के निर्देश पर दोबारा जांच भी करानी पड़ सकती है। बहरहाल, जितनी बार भी बाहर जाएं पूरी सावधानी के साथ जाएं।

क्या करना है और क्या नहीं? :
*कोविड मरीज का 14 दिन का आइसोलेशन बेहद जरूरी है। यह बात उसे और परिवार को भली भांति समझ लेनी चाहिए। मतलब 14 दिन तक मरीज अलग खिड़कीदार कमरे में रहे। उसका बाथरूम अलग हो। इस हालत में वैक्सीनेशन के लिए सोचें भी नहीं वरना फायदे की जगह भारी-भरकम नुकसान हो जाएगा।

*सिर्फ वही दवाएं लें जो आपका फैमिली डॉक्टर या सुपर स्पेशलिस्ट बताए। खुद अपने ज्ञान के आधार पर दवाएं मत लें।

*डॉ गुप्ता कहते हैं कि घर में सबसे अलहदा रहते हुए मरीज को अपना ऑनलाइन धंधा या नौकरी जारी रखनी चाहिए। परिवार वालों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत करते रहने से मन प्रसन्न रहता है। सो यह भी करते रहना चाहिए। सैंपल लेने के वास्ते लैब वालों को बार-बार बुलाना खतरनाक है। उनसे भी खतरा हो सकता है, हालांकि वे खुद भी खतरे में रहते हैं।

*इसी के साथ मरीज को ताजा खाना नियमित समय के अंतराल में लेना चाहिए। अगर मरीज में ताकत है तो उसे खुद अपने कमरे को साबुन या हाइपोक्लोराइड के घोल से पोछ डालना चाहिए।

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