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क्या होता है COVID-19 का ‘पीक’? समझें कब और कैसे आता है

संक्रमण के दौरान अक्सर वैज्ञानिक पीक की बात करते हैं, यानी इसका मतलब है कि नए मामलों में स्थिरता आ गई है। अब नए संक्रमितों का ग्राफ ऊपर नहीं जाएगा।

coronavirus updateये संक्रमण दुनिया में बहुत तेजी से फैल रहा है। प्रभावित देशों में अमेरिका, ब्राजील और भारत सबसे ऊपर हैं। (रॉयटर्स)

भारत में कोरोना वायरस महामारी तेजी से फैल रही है। रविवार (23 अगस्त, 2020) को केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि नए मामलों के साथ देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा तीस लाख के पार पहुंच गया। 16 दिन पहले ही यह संख्या 20 लाख के पार पहुंची थी। हालांकि अच्छी बात ये हैं कि देश में अब तक 22,80,566 लोग इस बीमारी से ठीक हो चुके हैं, जिससे मरीजों के ठीक होने की दर बढ़कर 74.90 फीसदी हो गई है।

देश में कोविड-19 के मामले 21 दिनों में 10 लाख से बढ़कर 20 लाख हो गए थे, जबकि 59 दिनों में संक्रमण के मामले एक लाख से बढ़कर 10 लाख के पार हुए थे। देश में कोविड-19 के मामले एक लाख तक पहुंचने में 110 दिन लगे थे, जबकि इसके बाद 10-लाख पार करने में सिर्फ 59 दिन लगे।

मंत्रालय के अनुसार पिछले 24 घंटे के अंतराल में देश में संक्रमण के 69,239 नए मामले आने के साथ कोविड-19 के मामलों की कुल संख्या 30,44,940 पर पहुंच गई, जबकि संक्रमण के कारण 912 और लोगों की मौत होने के साथ मरने वालों की संख्या 56,706 हो गई। देश में अब कोविड-19 मामलों में मृत्यु दर घटकर 1.86 प्रतिशत रह गई है।

इधर भारत में कोरोना मरीजों के बढ़ते रिकवरी रेट पर वैज्ञानिकों में इस बात पर बहस छिड़ गई है क्या भारत में कोरोना अपने पीक पर पहुंच गया है?

आखिर कोरोना का पीक पर होना क्या होता है?
संक्रमण के दौरान अक्सर वैज्ञानिक पीक की बात करते हैं, यानी इसका मतलब है कि नए मामलों में स्थिरता आ गई है। अब नए संक्रमितों का ग्राफ ऊपर नहीं जाएगा। विभिन्न रिपोर्ट्स में बताया गया कि जब वायरस अनियंत्रित तरीके से बढ़ता है तो हर दिन पिछले दिन से ज्यादा केस आते हैं और अधिक लोगों की मौत होती है। भारत में पीक की बात करें तो 16 अगस्त के मुकाबले 17 अगस्त को नए मामलों में कमी आई मगर 19 अगस्त को केस फिर बढ़ गए। इसलिए इसे पीक नहीं कह सकते हैं।

पीक को लेकर कोई भी विश्लेषण पुख्ता जानकारी देने में सक्षम नहीं है। हालांकि एसबीआई रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में रिकवरी रेट को आधार बनाया और बताया कि जब भारत में रिकवरी रेट 75 फीसदी के पार चला जाएगा, तब शायद देश पीक की तरफ बढ़ता नजर आए। रिपोर्ट में ये भी दावे के साथ नहीं कहा गया। ऐसा इसलिए है क्योंकि अमेरिका दो बार पीक से गुजर चुका है मगर वहां केस लगातार सामने आ रहे हैं।

दूसरी तरफ प्रिटिविटी और टाइम्स नेटवर्क के एक शोध में बताया गया कि जब एक्टिव केस की संख्या न्यूनतम 7.80 लाख और अधिकतम 9.38 लाख होगी तब भारत में पीक आ जाएगा। शोध में बताया गया कि ये सितंबर में कभी भी आ सकता है। दूसरी तरफ इस दावे को एम्स के विशेषज्ञों ने खारिज कर दिया है। (एजेंसी इनपुट)

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