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कोरोना: 70 फीसदी मरीजों सेे दूसरे तक नहीं पहुंचा वायरस, बच्‍‍‍‍‍‍चों से फैलता है संक्रमण- रिपोर्ट में दावा

संक्रमित प्राथमिक मामलों में से केवल 8% मरीज 60% नए संपर्कों के लिए जिम्मेदार थे। यह एक बेहद प्रतिकूल प्रभाव है। सुपरस्प्रेडिंग पर संदेह किया गया है, लेकिन वास्तव में प्रलेखित नहीं है।

Corona Virus, Covid-19रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 70 फीसदी संक्रमित ऐसे जिनमें मरीजों के जरिए संक्रमण नहीं फैला है।(फाइल फोटो-PTI)

कोरोना महामारी के चलते विश्वभर में लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना संकट के बीच हो रहे अध्य्यन में कई ऐसे खुलासे हुए हैं जो काफी चिंताजनक हैं।

हाल ही में एक शोध में दावा किया है कि बड़े लोगों के मुताबिक बच्चों में कोरोना संक्रमण फैलने की रफ्तार तेज़ है लेकिन फिर भी इस वायरस के फैलने के लिए प्राथमिक रूप से युवा पीढ़ी ही जिम्मेदार है। सितंबर 30 के दिन प्रकाशित हुए इस दावे के साथ ही एक और दावा यह किया गया कि जो कोरोना से संक्रमित जो 70 % लोग है उन्होंने अपने संपर्क के किसी भी व्यक्ति को संक्रमित नहीं किया है। लेकिन 8% मरीजों से 60% नए संक्रमण हुए है। यह अध्ययन एक विशाल संपर्क ट्रेसिंग प्रयास के आधार पर किया गया है।

शोधकर्ताओं की टीम ने अपनी रिपोर्ट में लिखा हालांकि बच्चों से फैल रहे संक्रमण या बच्चों में फैल रहे संक्रमण के इस विषय पर बहस हुई है और हम पहचान भी कर रहे है कि बच्चे अपने हमउम्र लोगों के साथ कितना रहे है, जिससे कि संक्रमण के बारे में हम और खोज कर सकें।”

“इस अध्ययन के लिए दक्षिण भारत के दो बड़े क्षेत्रों को चुना गया था जहां सार्वभौमिक संपर्क अनुरेखण के आधार पर मार्च से अगस्त तक लगभग 575,000 से अधिक लोगों को ट्रैक किया और उनका परीक्षण किया जिसमें से करीब 85000 संक्रमित पाए गए थे। यह दुनिया में सबसे बड़ा संपर्क ट्रेसिंग अध्ययन है, और लम्बे दौर पर चलने वाला भी।

नई दिल्ली में सेंटर फॉर डिसीज डायनैमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी के अध्ययन नेता लक्ष्मीनारायण ने कहा कि इस ट्रेसिंग के बाद हमें यह जानकर आश्चर्य हुआ कि संक्रमित प्राथमिक मामलों में से केवल 8% मरीज 60% नए संपर्कों के लिए जिम्मेदार थे। यह एक बेहद प्रतिकूल प्रभाव है। सुपरस्प्रेडिंग पर संदेह किया गया है, लेकिन वास्तव में प्रलेखित नहीं है। लेकिन संक्रमण फैलने वाली इस चेन में पहले संक्रमित 20 से 40 वर्ष तक का था।”

अपनी बात को मजबूत करते हुए और संक्रमण की रफ्तार बताते हुए लक्ष्मीनारायण ने कहा – ” 20 से 40 वर्ष का युवा ही है जो संक्रमण को फैला रहा है क्योंकि वह हमेशा किसी न किसी काम से घर से बाहर जा रहा है। क्योंकि हमनें अपने अध्ययन में यह भी साबित किया था कि लॉकडाउन संक्रमण को फैलने से रोकने एवं रफ्तार कम करने के लिए कारगर है। यानी कि संक्रमण जिन्हें जून और मई महीने में हुआ उनकी मौत की संभावना मार्च और अप्रैल में संक्रमित होने वालों ने 13% कम है।”

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