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तीन राज्यों में बिहार के 10 लाख प्रवासी मजदूर हैं फंसे, जियोफेन्सिंग टेक्नॉलोजी से 44.5% कैश ट्रांसफर इन्हीं राज्यों में गया

राज्य के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिहार सरकार ने राज्य के बाहर रह रहे श्रमिकों के पंजीकरण के लिए वेबलिंक डाउनलोड करने में जियोफेंसिंग तकनीक का उपयोग किया है

coronavirus Lockdownकोरोना वायरस के चलते लागू किए गए लॉकडाउन के बीच पलायन करते मजदूर। (एक्सप्रेस फोटो)

कोरोना के इस संकट काल में लॉकडाउन की वजह से बिहार से बाहर फंसे प्रवासी मजदूरों की मदद के लिए नीतीश सरकार ने टेक्नॉलोजी को हथियार बनाया है। जियोफेन्सिंग तकनीक से उनकी पहचान कर राज्य सरकार ने कुल 13 लाख पंजीकृत मजदूरों में से 10.11 लाख के आवेदनों पर विचार करते हुए उन्हें एक-एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई है। 17 अप्रैल के उपलब्ध आंकड़ों के हिसाब से बिहार के सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर तीन राज्यों में फंसे हुए हैं। इनमें दिल्ली सबसे आगे है। उसके बाद हरियाणा और महाराष्ट्र है। इन तीनों राज्यों में बिहार सरकार ने कुल कैश ट्रांसफर का 44.5 फीसदी रकम भेजा है।

राज्य के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिहार सरकार ने राज्य के बाहर रह रहे श्रमिकों के पंजीकरण के लिए वेबलिंक डाउनलोड करने में जियोफेंसिंग तकनीक का उपयोग किया है। उन्होंने बताया, “बिहार के बाहर फंसे 10,11,473 श्रमिकों को पैसा हस्तांतरित किया गया है।
जियोफेंसिंग तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि पंजीकरण के लिए लिंक केवल उन्हीं श्रमिकों द्वारा प्राप्त किया जा सकता है जो बिहार से बाहर हैं। इसके तहत उन्हें अपना फोटो और आधार विवरण भी अपलोड करना होगा, जिसके बाद पैसा उनके बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया जाएगा लेकिन ये अकाउंट बिहार के भीतर होना चाहिए।”

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17 अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में 1.99 लाख प्रवासी मजदूरों को एक-एक हजार रुपये हस्तांतरित किए जा चुके थे। हरियाणा में 1.39 लाख मजदूरों और महाराष्ट्र में 1.12 लाख मजदूरों को कैश ट्रांसफर किए गए। इनके अलावा गुजरात में 93,219, यूपी में 81,967, पंजाब में फंसे  58,417 और कर्नाटक में फंसे 48, 329 मजदूरों को रकम उनके खातों में ट्रांसफर की गई है।

बता दें कि राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के बाद, प्रवासी श्रमिकों की अंतर-राज्य यात्रा को प्रतिबंधित करते हुए बिहार सरकार ने दूसरे राज्यों में फंसे मजदूरों को नकद हस्तांतरण के रूप में आर्थिक सहायता देने का निर्णय लिया था। इसके अलावा बिहार सरकार कई जगहों पर प्रवासी बिहारी मजदूरों को खाना भी उपलब्ध करवा रही है। दिल्ली में ऐसे 10 सेंटर चल रहे हैं।
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